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    सेंट्रल मार्केट के धरने में शामिल होने वालों को नोटिस:मेरठ में व्यापारी बोले - प्रशासन तानाशाह रवैया दिखा रहा, प्रदर्शन खत्म कराना चाहता है

    3 hours ago

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    मेरठ की सेंट्रल मार्केट प्रकरण को लेकर चल रहा प्रदर्शन रविवार को 10वें दिन भी जारी रहा। महिलाएं अब भी सड़क पर बैठकर विरोध जता रही हैं। इस बीच प्रशासन ने सख्ती बढ़ाते हुए व्यापारियों के समर्थन में पहुंचने वालों को कोर्ट की अवमानना का नोटिस देना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में, जब किसान मजदूर संगठन के महानगर अध्यक्ष विजय राघव रविवार को व्यापारियों के समर्थन में मौके पर पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें भी न्यायालय की अवमानना का नोटिस थमा दिया। पहले भी थी पाबंदी पुलिस और प्रशासन द्वारा लगातार इस मामले में पहले से ही बाहरी लोगों के आने पर पाबंदी लगाई जा रही है। एसपी सिटी विनायक गोपाल भोंसले और एडीएम सिटी ने भी व्यापारियों से अपील का थी कि वह बाहर के लोगों को इसमें शामिल न करें और प्रदर्शन को खत्म कर दें। इसी क्रम में संयुक्त व्यापार संघ द्वारा बीती 17 अप्रैल को हल्ला बोल कार्यक्रम के तहत आवास विकास के कार्यालय के घेराव का आहवान किया गया था। इसमें भी पुलिस द्वारा अध्यक्ष नवीन गुप्ता को हाउस अरेस्ट करते हुए 20 से अधिक लोगों पर तस्करा भी दर्ज किया था। साथ ही व्यापारियों के बीच आने के लिए निकले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को भी पुलिस ने नोएडा में ही हिरासत में ले लिया था। प्रशासन लगातार बना रहा दबाव धरने पर बैठी महिलाओं का कहना है कि कल भी एडीएम सिटी और पुलिस के अधिकारियों द्वारा हमारे ऊपर धरना खत्म करने को लेकर दबाव बनाया गया। इसके साथ-साथ हमें धमकियां भी दी जा रही हैं कि अगर कोई आपके बीच आएगा या आप भी अगर यह धरना खत्म नहीं करोगे तो सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा। राष्ट्रपति शासन या आपातकालीन स्थिति नोटिस मिलने के बाद विजय राघव का कहना है कि मेरठ में न ही तो राष्ट्रपति शासन लागू है न ही कोई आपातकालीन स्थिति है। इसके बाद भी संविधान के अनुछेद19 के अनुसार जो मौलिक अधिकार हैं वह हमें नहीं मिल रहे हैं । अपनी बात को सरकार तक पहुंचाने के लिए या अपनी किसी मांग के लिए धरना देने के लिए लोग स्वतंत्र हैं। इसके बावजूद भी उनकी आवाज को दबाने के लिए इस प्रकार नोटिस देकर कराया जा रहा है।प्रशासन दबाव बनाकर मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है। क्या है मामला दरअसल 9 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था जिससमें कहा कि सभी 859 आवासीय प्लॉट में चल रही दुकानें बंद करानी है और सेटबैक के अनुसार आवासीय में भी जबह छोड़नी हैं। इसको लेकर स्थानीय निवासियों का कहना ळै कि दुकान तो बंद कर सकते हैं लेकिन अगर छोटे- छोटे मकानों को सेटबैक के लिए तोड़ देंगे तो रहेंगे कहा।
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