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    सिद्धार्थनगर में ऑपरेशन के बाद प्रसूता की मौत:परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया, CMO ने गठित की जांच टीम

    23 hours ago

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    सिद्धार्थनगर के मुख्यालय स्थित मैक्स हॉस्पिटल एंड मेटरनिटी सेंटर में ऑपरेशन के बाद एक प्रसूता की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी है। मृतका की पहचान नेपाल के सिसहनिया निवासी 28 वर्षीय संगीता पत्नी विजय कुमार के रूप में हुई है। बताया गया कि संगीता पिछले करीब एक वर्ष से अपने मायके में रह रही थी। उसके भाई सागर निवासी पटली जंगल, थाना सदर के अनुसार संगीता गर्भवती थी और गर्भधारण के बाद से ही मायके में रह रही थी। करीब दो माह पहले उसके पति विजय कुमार मुंबई से गांव आए थे। बुधवार को अचानक प्रसव पीड़ा होने पर परिजन उसे इलाज के लिए शहर के मैक्स हॉस्पिटल एंड मेटरनिटी सेंटर लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन की जरूरत बताते हुए उसे भर्ती कर लिया। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद संगीता की हालत बिगड़ने लगी, लेकिन अस्पताल की ओर से समुचित इलाज नहीं किया गया। कुछ ही देर में उसकी स्थिति गंभीर हो गई और देर शाम उसकी मौत हो गई। परिजनों का यह भी आरोप है कि मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने स्पष्ट जानकारी देने के बजाय उन्हें इधर-उधर भटकाया। हालांकि ऑपरेशन के दौरान जन्मा नवजात शिशु पूरी तरह स्वस्थ बताया जा रहा है। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शहर कोतवाल मिथिलेश कुमार राय ने बताया कि मामले की जानकारी मिलने के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। तीन सदस्यीय जांच टीम गठित मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रजत कुमार चौरसिया ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी है। टीम को तीन दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच टीम में डॉ. एमएम त्रिपाठी, डॉ. अनूप कुमार जायसवाल और डॉ. शाहीन खान को शामिल किया गया है। अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल जिले में निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान मौत के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। कई बार परिजनों द्वारा गलत इलाज और लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से कड़ी कार्रवाई कम ही देखने को मिलती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में कई अस्पताल, अल्ट्रासाउंड सेंटर और पैथोलॉजी लैब बिना पर्याप्त संसाधनों और मानकों के संचालित हो रहे हैं। ऐसे में मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहते हैं। इस घटना के बाद एक बार फिर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली चर्चा में आ गई है।
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