Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    शाह बोले- हिंदी का दूसरी भाषाओं से कॉम्पिटिशन नहीं:विविधता देश की ताकत, युवा दुनियाभर की भाषाएं सीखें, लेकिन अपनी मातृभाषा न छोड़ें

    55 minutes ago

    1

    0

    गृह मंत्री अमित शाह ने हिंदी दिवस पर अपने वर्चुअल संबोधन में कहा कि हिंदी का दूसरी भारतीय भाषाओं से कोई मुकाबला नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत की भाषाई विविधता उसकी सबसे बड़ी ताकत है और हर भाषा अपने साथ इतिहास, लोक परंपराएं और संस्कृति लेकर चलती है। शाह ने युवाओं से दुनिया की ज्यादा से ज्यादा भाषाएं सीखने, लेकिन अपनी मातृभाषा न छोड़ने की अपील की। उन्होंने माता-पिता से भी बच्चों से मातृभाषा में बात करने को कहा। शाह के मुताबिक, अपनी भाषा बोलने को लेकर हीन भावना नहीं होनी चाहिए, क्योंकि भाषा ही लोगों को उनकी मां, मिट्टी, इतिहास और संस्कृति से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भारतीय भाषाओं ने राष्ट्र निर्माण और विकास को लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। शाह ने हिंदी को आगे बढ़ाने में स्वामी दयानंद सरस्वती, महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के योगदान का भी जिक्र किया। शाह के भाषण की 5 बड़ी बातें 1. आजादी के बाद भारतीय भाषाओं की भूमिका शाह ने कहा- आजादी के बाद भारतीय भाषाएं राष्ट्र निर्माण, प्रशासन और विकास को आम लोगों तक पहुंचाने का माध्यम बनीं। हिंदी समेत सभी भारतीय भाषाओं ने जनजागरण, राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्रता के आदर्शों को आगे बढ़ाया। 2. हिंदी से सीधे जुड़ते हैं आम लोग- गृह मंत्री ने कहा- मेरी मातृभाषा गुजराती है। लेकिन जब मैं देश के किसी भी कोने में जाता हूं, तो वहां के आम लोगों से सीधे जुड़ने वाली भाषा हिंदी होती है। 3. गैर-हिंदी भाषी महापुरुषों ने भी दिया योगदान- शाह ने कहा- स्वामी दयानंद सरस्वती की मातृभाषा गुजराती थी, फिर भी उन्होंने ‘सत्यार्थ प्रकाश’ हिंदी में लिखा। महात्मा गांधी ने 1918 में मद्रास में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की स्थापना की। नेताजी सुभाष चंद्र बोस बंगाली भाषी थे, फिर भी उन्होंने आजाद हिंद फौज में हिंदी को संवाद की भाषा बनाया और देश को ‘जय हिंद’ का नारा दिया। 4. औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का जिक्र- गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से औपनिवेशिक मानसिकता की गुलामी से मुक्ति का आह्वान किया है। भाषा इस स्वतंत्रता को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 5. कानूनों में बदलाव को राष्ट्रीय स्वाभिमान से जोड़ा- शाह ने आगे कहा कि राजपथ को कर्तव्य पथ में बदलना केवल नाम बदलना नहीं था। अंग्रेजों के बनाए आपराधिक कानूनों की जगह भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लाए गए। यह केवल शब्दों का बदलाव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वाभिमान और गौरव की पुनर्स्थापना है। 14 सितंबर को मनाया जाता है हिंदी दिवस हिंदी दिवस हर साल 14 सितंबर को मनाया जाता है। इसी दिन 1949 में संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में हिंदी को भारतीय संघ की राजभाषा के रूप में अपनाया था।
    Click here to Read more
    Prev Article
    केदारनाथ रूट पर बारिश-लैंडस्लाइड, एक की मौत, यात्रा रुकी:बिहार के 14 जिलों में बाढ़, गंगा में 6 दिनों से फंसा क्रूज; MP-राजस्थान में तेज बारिश
    Next Article
    देशभर में गणेश उत्सव शुरू:इंदौर में 3 टन मिट्टी से बने बप्पा, हैदराबाद में 72 फीट ऊंची प्रतिमा; लालबाग के राजा में श्रद्धालुओं की भीड़

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment