Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    'शंकराचार्य के आश्रम में मैंने स्विमिंग पूल खुद देखा':भूमिका द्विवेदी का दावा, बोलीं- दीदी खुद को उनकी सखी कहती थीं

    7 hours ago

    1

    0

    'काशी के विद्यापीठ की इमारत कोई आश्रम नहीं है। वहां हर जगह रहस्य हैं। आश्रम में स्विमिंग पूल तो मैंने खुद देखा है। बटुकों को इतनी इजाजत नहीं होती कि वो किसी से बात कर पाएं।' यह कहना है शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के मठ पर सवाल उठाने वालीं लेखिका भूमिका द्विवेदी का। वह कहती हैं- आश्रम जैसा अनुशासन वहां नहीं दिखा। मैं 2 महीने वहां रही, मगर भोर का स्नान, ध्यान और मंत्रोचारण ऐसा कुछ नहीं देखा। जब तक मैं वहां रही, तब तक शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद वहां नहीं थे। इसलिए बटुकों के यौन उत्पीड़न के आरोपों पर मैं कुछ नहीं कह सकती। लेकिन, शंकराचार्य के नहीं रहने पर सारी शक्तियां 'दीदी' के पास रहती हैं। एक दिन मैंने उनसे पूछा- आप शंकराचार्य की कौन हैं? मां, बहन, रिश्तेदार…कौन हैं आप? मुस्कुराकर जवाब मिला- मैं उनकी सखी (दोस्त) हूं। इसके बाद मैंने कुछ नहीं पूछा। एक आश्रम कैसा होता है? जमीन कच्ची, भगवान का ध्यान, बटुकों की पढ़ाई का अनुशासन ऐसा ही होना चाहिए न। लेकिन, वो तो संगमरमर की बनी इमारत है। लिफ्ट, कालीन, वहां सारी लग्जरी सुविधाएं हैं। बाकी जांच तो चल ही रही है, बहुत सारे रहस्य हैं, वो सामने आ ही जाएंगे। लेखिका का पूरा इंटरव्यू पढ़िए… सवाल- आप कब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के आश्रम में रहीं? लेखिका- 18 मार्च, 2022 से मई, 2022 तक काशी के शंकराचार्य के अविमुक्तेश्वरानंद के आश्रम में रही थी। उस वक्त वहां 10-12 बच्चे थे। सभी गांव के और बहुत गरीब घरों के बच्चे थे। एक दीदी थीं, जो वहां की मालकिन कही जाती थीं। एक मैनेजर था, कुछ वर्कर थे। आश्रम के सामने एक गेस्ट हाउस बना है। वहां बहुत लग्जरी सुविधाएं हैं। वहां लोग ठहर सकते हैं, आश्रम में कोई ठहर नहीं सकता। लेकिन जो दीदी हैं, उनकी 2 महिला रिश्तेदार वहां पर रुकी हुई थीं। सवाल- आश्रम में पढ़ाई की क्या व्यवस्था है? लेखिका- वैदिक पठन-पाठन होता है, लेकिन उनका अनुशासन उतना सख्त नहीं था। जैसे सुबह उठकर गंगाजल में स्नान करना चाहिए। गायत्री मंत्र पढ़कर सूर्य को जल देना चाहिए। मैं सुबह जल्दी उठती हूं। वहां बच्चे सुबह जल्दी नहीं उठते थे। न उन्हें योग करने के लिए प्रेरित किया जाता था। सुबह जल्दी उठकर पूजा-पाठ भी नहीं होता था। सवाल- आप शंकराचार्य के आश्रम में किस उद्देश्य से रही थीं? लेखिका- लेखन...बनारस पर लिखने का मन था, इसलिए आश्रम में रही थी। शंकराचार्य स्वरूपरानंद मेरे दादा के मित्र रहे हैं। वो मेरे दादा की तरह थे। उन्होंने कहा कि दुनियाभर के टॉपिक पर लिखती हो। बनारस पर क्यों नहीं लिखती? इसलिए वहां गई थी। सवाल- आश्रम में आपने क्या कुछ देखा, वो बता दीजिए? लेखिका. आश्रम बहुत बढ़िया बना हुआ है, फर्श संगमरमर की है, वो वैसा नहीं बना है, जैसे मठ में कच्ची मिट्‌टी की फर्श होती है। वहां कोई फूलों की क्यारियां नहीं हैं, आश्रम में गोशाला नहीं है, बताते हैं कि कहीं दूर पर कोई गोशाला बना रखी है। वहां एक भी गाय नहीं थी। सवाल- क्या आपने अपनी आंखों से कोई स्विमिंग पूल देखा है? लेखिका- हां, बिल्कुल देखा है। वहां रहते हुए मैंने देखा कि एक स्विमिंग पूल भी बना हुआ है। मुझे बताया गया कि जिस मकसद से बना था, वो पूरा हो चुका है। इसलिए उस वक्त संचालित नहीं था। वो सबसे ऊपर वाली मंजिल पर है। वहां किसी के भी जाने पर रोक है। सवाल- क्या शंकराचार्य से कोई भी व्यक्ति मिल सकता था? लेखिका- शंकराचार्य तो उस दरम्यान वहां नहीं थे। लेकिन जब वो आश्रम में होते हैं, तब कोई यूं ही उनसे मिल नहीं सकता था। सवाल- क्या आपने आश्रम में कोई संदिग्ध गतिविधि देखी थी? लेखिका- आश्रम के कई हिस्सों में बाहर का कोई व्यक्ति आ-जा नहीं सकता। वहां की दीदी (मालकिन) जिस कमरे में रहती हैं, वहां भी जाना प्रतिबंधित है। वो जिन शानदार कमरों में रहती हैं, वह बहुत लग्जरी है। आप कह सकते हैं कि वहां रहने वालों की एक सीक्रेट जिंदगी है। उस आश्रम में रहस्य बहुत हैं। इतने बवाल के बाद भी किसी को छत तक जाने की एंट्री नहीं मिल सकती। उस कमरे तक कोई पहुंचा ही नहीं। सवाल- आश्रम में रहने के दौरान क्या आपकी किसी बटुक से बात हुई? लेखिका- वहां पर बटुकों से बाहर के लोगों को बहुत दूर रखा जाता है। बात तक करने नहीं दिया जाता। बटुकों को भी मनाही होती है कि आप कॉमन लोगों से बात नहीं करेंगे। यहां तक कि पेरेंट्स से भी उनको बहुत ज्यादा बातचीत नहीं करने दी जाती। सवाल- आश्रम में ये कौन डिसाइड करता है कि शंकराचार्य और बटुकों से कोई मिल सकता है? लेखिका- यह सब दीदी और मैनेजर ही तय करते हैं कि कौन आश्रम में आ सकता है? वो किससे मिल सकता है? जो अभिभावक भी आते थे, वो भी बस थोड़ी देर ही मिल सकते हैं। मुझे लगता है कि ऐसा इसलिए करते होंगे, जिससे पेरेंट्स का अटैचमेंट बटुकों से न बढ़ जाए। सवाल- क्या आश्रम में रहने वाले रेगुलर बाहर जा सकते हैं? लेखिका- नहीं, बिल्कुल नहीं..। बटुक तो बिल्कुल भी बाहर नहीं जा सकते। जो आउट साइडर लोग वहां होते हैं, वो उनके जरिए ही चीजें मंगवा सकते हैं। सवाल- क्या आपको आशुतोष ब्रह्मचारी के बारे में पहले से कोई जानकारी थी? लेखिका- नहीं, मैं आशुतोष महाराज को जानती नहीं हूं। अब जब इतना बवाल मचा है, तब मुझे आशुतोष महाराज के बारे में पता चला। सवाल- शंकराचार्य पर आरोप माघ मेले के बाद ही लगे, आपको क्या लगता है? लेखिका. देखिए, ये हो सकता है। किसी आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। सवाल- शंकराचार्य माघ मेले से बिना स्नान काशी लौटे थे? लेखिका- जो उस आश्रम की पीठ पर सबसे बड़े धर्माधिकारी विराजमान हैं, आप नहाने नहीं गए, क्योंकि आपको पालकी से नहीं ले जाया गया। ये बिल्कुल नॉनसेंस बात है। हमारे जो लोग विदेशों में रहते हैं, वो हजारों किमी की यात्रा करके सिर्फ स्नान करने आते हैं। कहते हैं, जिनके नाम की डुबकी लगा लो, उसको भी पुण्य मिल जाता है। लेकिन शंकराचार्य किनारे पर रहे, नहाया नहीं। झूंसी की तरफ से पांटून पुल बनाए जाते हैं, जिससे लोग संगम तक पहुंच सकें। ऐसे लोग भी सैकड़ों किमी पैदल चलकर नहाते हैं, जो ठीक से चल भी नहीं सकते। सवाल- जब शंकराचार्य नहीं होते, तब आश्रम की देखभाल कौन करता है? लेखिका- वहां मैनेजिंग स्टाफ रहता है। वहां एक मैनेजर मिश्रा हैं, साथ में दीदी हैं। वही पूरी व्यवस्था देखते हैं। सवाल- वो दीदी कौन हैं? लेखिका- मैंने खुद उनसे पूछा था कि ये आश्रम शंकराचार्य का कहा जाता है। लेकिन, मालकिन आप बताई जाती हैं। क्या आप उनकी माताजी हैं? क्या आप बहन हैं? उनकी कोई रिश्तेदार हैं? तब उन्होंने मुस्कुराकर कहा कि मुझे आप शंकराचार्य की सखी समझ लीजिए। सवाल- शंकराचार्य पर जो यौन उत्पीड़न के आरोप हैं, उस पर क्या कहेंगी? लेखिका- नहीं, इस बारे में मैं कुछ भी कह नहीं सकती। क्योंकि मैं जब तक वहां रही, तब शंकराचार्य नहीं थे। इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। ………………… ये खबर भी पढ़ें - शंकराचार्य पर यौन उत्पीड़न के आरोपों में कितना दम:वकील ने पूछा- एक ही बटुक क्यों पेश हुआ; मार्कशीट में बालिग होने का दावा शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी टल गई है। उनके खिलाफ 2 बटुकों के यौन उत्पीड़न का केस 7 दिन पहले दर्ज किया गया था। केस दर्ज कराने वाले महंत आशुतोष ब्रह्मचारी ने दावा किया कि मेडिकल रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न की पुष्टि हो चुकी है। 27 फरवरी को शंकराचार्य के वकील ने हाईकोर्ट में कहा- 'यह केस एक धर्मगुरु का है, न कि किसी अपराधी का।' उन्होंने आशुतोष महाराज की क्रिमिनल हिस्ट्री भी रखी। पढ़िए पूरी खबर…
    Click here to Read more
    Prev Article
    इजराइली राजदूत बोले- मोदी को पता नहीं था हमला होगा:PM का इजराइल दौरा खत्म होने के बाद ईरान पर अटैक को मंजूरी दी
    Next Article
    सलीम वास्तिक के हमलावर सगे भाई, एनकाउंटर में जीशान ढेर:गुलफाम फरार; इस्लाम विरोधी बातों से नाराज होकर गला रेता

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment