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    शामली में किसान ने खुद को आग लगाई:राजस्व विभाग और पुलिस की कार्रवाई से था परेशान, संगठन ने जांच की मांग की

    1 hour ago

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    शामली के आदर्श मंडी थाना क्षेत्र के गांव गोहरनी में भूमि विवाद को लेकर किसान आदित्य द्वारा खुद को आग लगाने का मामला गरमा गया है। भारतीय किसान यूनियन (तोमर) ने इस घटना की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। किसान आदित्य की हालत गंभीर बनी हुई है और उनका दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज चल रहा है। संगठन का आरोप है कि किसान आदित्य राजस्व विभाग और पुलिस की कार्रवाई से परेशान था। भाकियू (तोमर) के मंडल उपाध्यक्ष मोहम्मद साजिद अल्वी द्वारा दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि कानूनगो, लेखपाल और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में किसान के खेत में बनी दीवार को हटाने की कार्रवाई की जा रही थी। इसी दौरान विवाद बढ़ने पर किसान आदित्य ने कथित तौर पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर खुद को आग लगा ली। घटना के बाद परिजनों ने किसी तरह आग बुझाई और गंभीर रूप से झुलसे आदित्य को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल ले गए। हालत गंभीर होने के कारण उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया, जहां उनका इलाज जारी है। आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग भारतीय किसान यूनियन (तोमर) ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजा है। इसमें पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की गई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिन के भीतर उनकी मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो 27 अगस्त को जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। परिजनों ने आग बुझाकर अस्पताल पहुंचाया किसान के पिता मनोज कुमार ने जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती प्रार्थना पत्र में घटना को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रार्थना पत्र के अनुसार, खेत में फसल को जंगली जानवरों से बचाने के लिए चहारदीवारी बनाई गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि 17 अगस्त को कानूनगो, लेखपाल, पुलिसकर्मी और अन्य लोग जेसीबी लेकर मौके पर पहुंचे और बिना किसी पूर्व सूचना या सक्षम अधिकारी के आदेश की प्रति दिए दीवार हटाने लगे। परिजनों ने मौके पर कार्रवाई का विरोध करते हुए आदेश की प्रति मांगी थी। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि परिवार ने अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्या रखने का प्रयास किया, लेकिन उनकी शिकायत पर अपेक्षित सुनवाई नहीं हुई। मनोज कुमार ने आरोप लगाया कि इसी घटनाक्रम और कथित उत्पीड़न से परेशान होकर उनके पुत्र आदित्य ने आत्मदाह का प्रयास किया। परिवार का दावा है कि आग लगने के बाद मौके पर मौजूद लोगों में से कुछ वीडियो बनाने लगे, जबकि परिजनों ने आग बुझाकर उसे अस्पताल पहुंचाया। स्थानांतरण करने की मांग भी की शिकायती पत्र में कानूनगो अमरीश शर्मा पर रिश्वत मांगने का भी आरोप लगाया गया है। मनोज कुमार का आरोप है कि कानूनगो को पहले 50 हजार रुपये दिए गए थे और बाद में उन पर 10 लाख रुपये देने का दबाव बनाया जा रहा था। उन्होंने कानूनगो की संपत्ति की जांच कराने और उनका स्थानांतरण करने की मांग भी की है। हालांकि, ये सभी आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं और इनकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग भाकियू (तोमर) ने ज्ञापन में कहा कि यह मामला केवल एक किसान की व्यक्तिगत परेशानी तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की शिकायतों के निस्तारण और प्रशासनिक व्यवस्था की संवेदनशीलता से भी जुड़ा है। संगठन ने मांग की कि घटना की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। मौके पर मौजूद कानूनगो, लेखपाल, पुलिसकर्मियों और अन्य कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जाए तथा यह स्पष्ट किया जाए कि चहारदीवारी हटाने की कार्रवाई किस अधिकारी के आदेश पर की गई थी। शासन स्तर से मदद देने की मांग संगठन ने पीड़ित किसान और उसके परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज कराने, घटना से जुड़े सभी वीडियो और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा जांच में शामिल करने की मांग की है। साथ ही किसान के परिवार को उचित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और उसके भरण-पोषण एवं भविष्य को सुरक्षित करने के लिए शासन स्तर से मदद देने की मांग की गई है। ज्ञापन में किसान से संबंधित भूमि, राजस्व, बिजली, पुलिस अथवा अन्य प्रशासनिक मामलों की भी निष्पक्ष समीक्षा कराने और नियमानुसार समाधान कराने की मांग की गई। संगठन ने कहा कि किसानों की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए और अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर लगवाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। अधिकारी बोले- जांच चल रही है भाकियू (तोमर) ने प्रशासन से मामले की समयबद्ध जांच कर रिपोर्ट पीड़ित परिवार और किसान संगठन को उपलब्ध कराने की भी मांग की है। संगठन का कहना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासन को विशेष कदम उठाने चाहिए। साथ ही जिन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका जांच में दोषपूर्ण पाई जाए, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि सात दिन के भीतर मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो 27 अगस्त 2026 को भारतीय किसान यूनियन (तोमर) जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेगी। अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और उसके निष्कर्ष पर लोगों की नजर है। परिवार और किसान संगठन को उम्मीद है कि जांच के आधार पर जिम्मेदारी तय कर उन्हें न्याय दिलाया जाएगा। जिलाधिकारी आलोक यादव का कहना है जांच चल रही है।
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