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    श्रद्धा सिंह को हाथ-पैर बांधकर जिंदा जलाने का मामला:मां जेल में पिता से मिलने गई थी, आज 2 दोषियों को सुनाई जाएगी सजा

    6 hours ago

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    सुल्तानपुर के श्रद्धा सिंह हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय गुरुवार को सुभाष सिंह चौहान और जयकरन चौहान को सजा सुनाएगा। दोनों को बुधवार को अदालत ने हत्या का दोषी करार देकर जेल भेज दिया था। मामला 21 सितंबर 2020 का है। आरोप है कि जमीन विवाद में घर में अकेली मिली श्रद्धा के हाथ-पैर बांधकर उस पर केरोसिन डालकर जिंदा जला दिया गया था। गंभीर रूप से झुलसी श्रद्धा को इलाज के लिए लखनऊ ले जाया गया, जहां रात करीब 8:30 बजे उसकी मौत हो गई थी। विवादित जमीन करीब 3 बीघे की है और सुल्तानपुर-अयोध्या सीमा पर स्थित है। जमीन अयोध्या जिले में आती है। पीड़ित परिवार और आरोपियों के घर की दूरी करीब 500 मीटर है। श्रद्धा बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा थी। 21 सितंबर की सुबह करीब 7:30 बजे घटना हुई थी। अगले दिन 22 सितंबर की रात करीब 8:30 बजे उसका अंतिम संस्कार किया गया था। उस समय जेल में बंद उसके पिता पैरोल पर बाहर आए थे और उन्होंने अंतिम संस्कार किया था। 3 बीघे जमीन को लेकर दोनों पक्षों में पुराना विवाद मामले की जड़ करीब 3 बीघे जमीन के विवाद से जुड़ी है। बताया गया है कि इस जमीन की करीब 10 बार पैमाइश हो चुकी है और पहले धारा 24 के तहत भी कार्रवाई हो चुकी है। इसी जमीन को लेकर दोनों पक्षों में लंबे समय से विवाद चल रहा था। मामले में आरोप है कि तत्कालीन एसओ अखिलेश सिंह ने प्रदीप सिंह की जमीन में एक शव गड़वा दिया था। इसके बाद विवाद और बढ़ गया। हालांकि, इस आरोप की पुष्टि पुलिस रिकॉर्ड से होना बाकी है। बाद में जमीन पर कब्जे और जुताई को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए थे। खेत जोतने पर हुई मारपीट, बुजुर्ग की मौत के बाद केस मामले के अनुसार, 8 जून को प्रदीप सिंह खेत जोतने पहुंचे थे। इसी दौरान विवाद हुआ और दोनों पक्षों में मारपीट हो गई। इसमें प्रदीप के विपक्षी कुंवर सिंह, उम्र करीब 70 साल, गंभीर रूप से घायल हुए और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। कुंवर सिंह दोषी सुभाष सिंह के पिता बताए गए हैं। पुलिस ने प्रदीप सिंह समेत 14 नामजद और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया था। प्रदीप पक्ष की ओर से 14 लोगों के घायल होने का दावा किया गया, लेकिन उनका मुकदमा दर्ज नहीं होने की बात कही गई है। इस मामले में अब तक छह लोगों की गवाही हो चुकी है। एक गवाह ने कोर्ट में बताया कि दरोगा ने घटना के अगले दिन थाने बुलाकर कागज पर हस्ताक्षर कराए थे, जबकि केस घटना वाले दिन ही दर्ज हो गया था। इस मामले में जयकरन भी दूसरा गवाह बताया गया है। पिता जेल गए तो घर में अकेली मिली थी श्रद्धा कुंवर सिंह की मौत के बाद प्रदीप सिंह जेल चले गए थे। 21 सितंबर 2020 को प्रदीप की पत्नी अर्चना देवी उनसे मिलने जेल गई थीं। परिवार के बाकी बच्चे भी अलग-अलग जगह थे। आरोप है कि इसी दौरान विपक्षी घर पहुंचे और श्रद्धा को अकेला पाकर उसके हाथ-पैर बांध दिए। इसके बाद उस पर केरोसिन डालकर आग लगा दी गई। गंभीर रूप से झुलसी श्रद्धा को अस्पताल ले जाया गया। अभियोजन के मुताबिक, इलाज के दौरान उसने घटना के बारे में बताया और आरोपियों के नाम लिए थे। इसके बाद मां अर्चना देवी की तहरीर पर जगबरन यादव, सुभाष सिंह चौहान, जयकरन चौहान और महंथ के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। दो दोषियों को आज सजा, तीसरे आरोपी की फाइल पर स्टे फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय में अभियोजन ने घटना साबित करने के लिए 12 गवाह पेश किए। अभियोजन की ओर से एडीजीसी क्रिमिनल संजय सिंह और वादी पक्ष के अधिवक्ता शैलेंद्र पांडेय ने पैरवी की। बुधवार को अदालत ने सुभाष सिंह चौहान और जयकरन चौहान को दोषी करार दिया। गुरुवार को दोनों की सजा तय होगी। जयकरन की शादी नहीं हुई है और उसकी हाईकोर्ट से तीन बार जमानत खारिज हो चुकी है। वहीं सुभाष शादीशुदा है और उसके एक बेटा व एक बेटी हैं। उसकी भी हाईकोर्ट से चार बार जमानत खारिज हो चुकी है। दोनों की गिरफ्तारी 24 सितंबर 2020 को हुई थी। मामले के एक अन्य आरोपी जगबरन यादव की फाइल पर हाईकोर्ट से स्टे है, इसलिए उसके खिलाफ आगे की कार्रवाई नहीं हुई है। बताया गया है कि मृतका ने मजिस्ट्रेट के सामने दिए बयान में उसका नाम नहीं लिया था। वहीं एक अन्य आरोपी महंथ लंबे समय तक फरार रहा और जुलाई 2026 में पुलिस ने उसे देहली बाजार से गिरफ्तार कर जेल भेजा था। उसके मामले की सुनवाई अलग से चल रही है।
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