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    शादी-विवाह में लकड़ी पर बना रहे खाना:रिश्तेदारों से मांगकर जुटा रहे इक्का-दुक्का गैस सिलेंडर

    2 hours ago

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    रसोई गैस को लेकर जो हायतौबा मची है, उससे सर्वाधिक परेशानी उन लोगों को है, जिनके घर शादी-विवाह या कोई और मांगलिक कार्यक्रम है। जिन्होंने कई दिन पहले से गैस सिलेंडर की व्यवस्था कर ली थी, उनका तो ठीक है, बाकी लोगों को लकड़ी पर निर्भर होना पड़ रहा है। बुधवार को भी कई शादियों में लकड़ी पर आधे से अधिक खाना बनाना पड़ा। आने वाले समय में यह संकट और गहराने वाला है। जो इक्का-दुक्का सिलेंडर मिल भी रहे हैं, उसे रिश्तेदारों से मांगना पड़ रहा है। रिश्तेदार भी जल्दी सिलेंडर नहीं देना चाह रहे। पिपराइच कस्बे में एक व्यक्ति के यहां बुधवार को शादी थी। काफी प्रयास के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल पाया तो हलुवाई को मजबूरन लकड़ी पर खाना बनाना पड़ा। यहां डेढ़ क्विंटल से अधिक लकड़ी खरीदी गई। इसी तरह महानगर के एक मैरेज हाल में लड़की वालों को खाना बनाने के लिए लगभग 2 क्विंटल लकड़ी खरीदनी पड़ी। उसके बाद वहां खाना बना। शहर में ही एक व्यक्ति के यहां ब्रह्मभोज था लेकिन उन्हें भी सिलेंडर नहीं मिल सका। इधर लकड़ी के दाम भी बढ़ने लगे हैं। कैटरर्स की बढ़ी मुसीबत रसोई गैस सिलेंडर की कमी से सबसे अधिक परेशानी कैटरर्स को है। जिन कैटरर्स ने सारी व्यवस्था का जिम्मा खुद लिया है, उनके लिए सिलेंडर की व्यवस्था कर पाना आसान नहीं है। कुछ लोग ब्लैक में सिलेंडर खरीदने का जुगाड़ तलाश रहे हैं लेकिन पर्याप्त सिलेंडर तब भी नहीं मिल रहे। जिनके घर शादी है, वे घरेलू सिलेंडर देने से साफ इनकार कर रहे हैं। कुछ कैटरर्स ने कमर्शियल सिलेंडर का स्टाक रखा है, उससे कुछ काम आगे बढ़ रहा है। कुछ रेस्टोरेंट में बन गए मिट्‌टी के चूल्हे शहर के तारामंडल स्थित बाटी-चोखा रेस्टोरेंट में विकल्प तैयार कर लिया गया है। यहां मिट्‌टी का चूल्हा बनाया गया है। यहां के संचालक का कहना है कि सिलेंडर मिलना मुश्किल हो गया है। हम उपले (गोबर से बना कंडा) पर लिट्‌टी बनाएंगे। दाल, चावल, चोखा, खीर आदि मिट्‌टी के चूल्हे पर तैयार होगा। उन्होंने लकड़ी स्टोर करना शुरू कर दिया है। जिले में 500 से अधिक शादियां अगले दो से तीन दिनों में जिले में 500 से अधिक शादियां होनी हैं। ऐसे में सभी लोग कहीं से सिलेंडर का जुगाड़ करने में जुटे हैं लेकिन एजेंसी मालिक भी किसी की मदद नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें बुकिंग चाहिए और बिना बुकिंग एवं डीएसी नंबर के किसी को सिलेंडर देना मुश्किल हो रहा है। एक एजेंसी मालिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हम अपने रिश्तेदारों को भी सिलेंडर नहीं दे पा रहे हैं। बुकिंग में आ रही परेशानी शासन-प्रशासन की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि गैस की कोई कमी नहीं है। लेकिन बुकिंग और फिर डीएसी नंबर मिलने के बाद ही सिलेंडर देने का प्रावधान है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से बुकिंग ही नहीं हो पा रही। तिवारीपुर के ज्ञानेंद्र मिश्र ने बताया कि वह बुकिंग करने के लिए फोन कर रहे हैं लेकिन ओटीपी ही नहीं आ रहा। यह सिलसिला पिछले दो से तीन दिनों से चल रहा है। एक उपभोक्ता ने बताया कि उन्होंने 6 मार्च को बुकिंग की थी लेकिन डीएसी नंबर 4 दिन बाद भी नहीं आया। बुकिंग न होने से लोग एजेंसियों के कार्यालय जा रहे हैं, जहां कुछ लोगों की ही बुकिंग हो पा रही है। वहां भी सर्वर की समस्या है। जल्द ही 95 प्रतिशत डीएसी हो सकती है अनिवार्य सिलेंडर लेने के लिए सामान्य दिनों में डीएसी की बाध्यता 40 प्रतिशत थी। कुछ दिन पहले इसे बढ़ाकर 85 प्रतिशत कर दिया गया था। लेकिन संभावना जताई जा रही है कि अगले दो से तीन दिन में यह 95 प्रतिशत तक हो जाएगी। यानी 100 में 95 सिलेंडर के लिए डीएसी नंबर अनिवार्य होगा।
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