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    SI अजय गोंड की मौत मिस्ट्री:बस्ती में पुल के CCTV खराब, बाइक पुलिस ने हटाई… 75 किमी दूर सरयू में मिला शव

    1 hour ago

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    परशुरामपुर थाने में तैनात एएसआई अजय कुमार गोंड की मौत 11 दिन बाद भी रहस्य बनी हुई है। 5 फरवरी को ड्यूटी के दौरान निकले दरोगा का शव 8 फरवरी को अयोध्या की सरयू नदी में मिला, जबकि उनकी बाइक बस्ती जिले में कुआनो नदी किनारे पड़ी मिली थी। दोनों स्थानों के बीच करीब 75 किमी की दूरी है और दोनों नदियां आपस में कहीं नहीं मिलतीं। यहीं से केस उलझ गया। दैनिक भास्कर की पड़ताल में एक और अहम तथ्य सामने आया अमहट पुल पर लगे सीसीटीवी कैमरे उस समय खराब थे। वहीं, दरोगा की बाइक को पुलिसकर्मी खुद एसपी आवास के पास से उठाकर अमहट पुल तक ले गए थे। थाने से निकले, फिर लापता अजय गोंड 5 फरवरी की सुबह चाय-नाश्ता कर ड्यूटी पर निकले थे। थानाध्यक्ष विश्व मोहन राय के अवकाश पर होने के कारण थाने का प्रभार उन्हीं के पास था। पत्नी रंजीता गोंड के मुताबिक, दोपहर करीब 3:30 बजे उनकी आखिरी बातचीत हुई थी। शाम करीब 5 बजे दरोगा अजय थाने के सफाईकर्मी के साथ बाइक से बाहर जाते सीसीटीवी में दिखे। इसके बाद रात 8–9 बजे के बीच पत्नी ने फोन किया, लेकिन मोबाइल बंद मिला। यहीं से चिंता बढ़ी। कुआनो नदी किनारे मिली बाइक लापता होने के अगले दिन 6 फरवरी को दरोगा की बाइक बस्ती के कुआनो नदी किनारे मिली। इसके बाद डूबने की आशंका में पुलिस ने SDRF गोरखपुर की टीम के साथ 3 दिन तक सर्च ऑपरेशन चलाया। अमहट घाट से भद्रेश्वरनाथ तक करीब 2 किमी क्षेत्र में मोटरबोट से 8 राउंड सर्च किया गया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। सर्च बंद और 3 घंटे बाद 75 किमी दूर मिला शव सर्च अभियान बंद होने के करीब 3 घंटे बाद शाम 7 बजे सूचना आई कि अयोध्या के दर्शननगर चौकी क्षेत्र के तिघुरा माझा गांव के पास सरयू नदी में एक शव मिला है। पहचान अजय गोंड के रूप में हुई। पुलिस ने 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली है। हालांकि, अमहट पुल से अयोध्या की ओर जाने वाले मार्ग के कैमरे उस समय खराब थे। अब उन्हें ठीक करा दिया गया है। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि दरोगा की बाइक एसपी आवास (गेट नंबर 2) के पास मिली थी। पुलिसकर्मियों ने ही बाइक को वहां से उठाकर अमहट पुल पर रखा और फिर कोतवाली ले गए। इस कार्रवाई ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार का आरोप: यह सुनियोजित हत्या पत्नी रंजीता गोंड और उनके भाई (एडीएम अरुण कुमार) ने इसे प्लांड मर्डर बताया है। हालांकि, उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है अगर गुमशुदगी दर्ज होने के तुरंत बाद पुलिस ने सक्रियता दिखाई होती, तो शायद अजय आज जिंदा होते।” सोमवार को बस्ती में थाना निलंबन और सीओ पर कार्रवाई की मांग को लेकर एडीएम भाई और उनकी पीसीएस पत्नी ने धरना भी दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी साफ नहीं कर पाई वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। इससे मामला और पेचीदा हो गया है। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। 11 दिन बीत चुके हैं, लेकिन एएसआई अजय गोंड की मौत अब भी रहस्य बनी हुई है। जांच की दिशा और नतीजे पर पूरे पुलिस महकमे की नजर टिकी है।
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