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    तेल मिलों पर कार्रवाई से भड़के व्यापारी:सतीश महाना को सौंपा ज्ञापन; बोले- प्राइवेट लैब की रिपोर्ट पर फैक्ट्रियां बंद करना गलत, दोबारा हो जांच

    2 hours ago

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    उत्तर प्रदेश के खाद्य तेल उद्योग पर इन दिनों संकट के बादल मंडरा रहे हैं। लेड (सीसा) की मात्रा मानक से अधिक पाए जाने के मामले में प्रदेश की 14 तेल निर्माता कंपनियों के खिलाफ हुई कार्रवाई ने व्यापारियों की नींद उड़ा दी है। इस मुद्दे को लेकर भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र के नेतृत्व में उद्यमियों ने विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना से मुलाकात की। हरजिंदर नगर स्थित आवास पर हुई इस वार्ता में व्यापारियों ने अपना पक्ष रखते हुए एक ज्ञापन सौंपा, जिस पर विधानसभा अध्यक्ष ने कमिश्नर से बात कर समाधान का भरोसा दिलाया है। प्राइवेट लैब की रिपोर्ट पर सवाल,'हम तेल में लेड मिलाते नहीं' व्यापारियों का कहना है कि 23 फरवरी 2026 को कानपुर, आगरा, मेरठ और लखनऊ सहित कई शहरों से तेल के नमूने लिए गए थे। 21 अप्रैल को एक निजी लैब की रिपोर्ट के आधार पर इन नमूनों को 'अनसेफ' घोषित कर दिया गया। व्यापारियों का तर्क है कि तेल निर्माण प्रक्रिया में लेड को न तो बढ़ाया जा सकता है और न ही घटाया जा सकता है। यह प्राकृतिक रूप से मिट्टी या सिंचाई के पानी के जरिए फसल में आता है। ऐसे में सिर्फ एक प्राइवेट लैब की रिपोर्ट पर फैक्ट्रियों को बंद करना और स्टॉक पर बैन लगाना पूरी तरह गलत है। पलायन की आशंका, '97 के ड्रॉप्सी कांड जैसा न हो जाए हाल' ज्ञापन में बताया गया कि 1997 के ड्रॉप्सी कांड के बाद यूपी की करीब 80 फीसदी तेल मिलें पहले ही बंद हो चुकी हैं। अब इस नई कार्रवाई से बचे-खुचे उद्योग भी राजस्थान जैसे राज्यों की ओर पलायन कर सकते हैं। उद्यमियों ने डर जताया कि यदि जल्द राहत नहीं मिली, तो लाखों मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा और सरकार को भी करोड़ों के राजस्व का घाटा होगा। सोशल मीडिया पर एकतरफा खबरों के कारण बाजार में पेमेंट भी रुक गई है, जिससे व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है। सरकारी लैब से दोबारा जांच की मांग मंटोरा ऑयल (बावर्ची ब्रांड) और वैभव एडिबल ऑयल के संचालकों ने विधानसभा अध्यक्ष को बताया कि जब उन्होंने खुद एनएबीएल सर्टिफाइड लैब से जांच कराई, तो लेड की मात्रा विभाग के मानकों से काफी कम पाई गई। व्यापारियों की मांग है कि प्रभावित 14 तेल मिलों पर लगा प्रतिबंध तुरंत हटाया जाए और सैंपल्स की दोबारा जांच किसी सरकारी प्रयोगशाला में कराई जाए। इसके अलावा एचबीटीयू कानपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से मिट्टी और पानी में लेड की मौजूदगी का वैज्ञानिक अध्ययन भी कराया जाना चाहिए। सतीश महाना ने दिया आश्वासन मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने लखनऊ में खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के आयुक्त से फोन पर वार्ता की। उन्होंने व्यापारियों को आश्वस्त किया कि वे इस प्रकरण में न्यायसंगत कार्रवाई सुनिश्चित कराएंगे ताकि प्रदेश में उद्योगों का चक्का चलता रहे। इस दौरान अनुराग जायसवाल, हेमंत गुप्ता, तरुण कटारिया और नरेश सांगल समेत कई प्रमुख तेल उद्यमी मौजूद रहे।
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