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    तपती गर्मी बनी दिल की दुश्मन:कानपुर कार्डियोलॉजी में हर दिन 50 मरीज हो रहे भर्ती, ब्लड गाढ़ा होने से बढ़ रहा खतरा

    5 hours ago

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    भीषण गर्मी और सूरज की आग उगलती तपिश अब सिर्फ त्वचा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे आपके दिल पर प्रहार कर रही है। पारा चढ़ने के साथ ही हृदय रोगियों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। कानपुर के हृदय रोग संस्थान (कार्डियोलॉजी) में मरीजों की बढ़ती भीड़ इस बात की तस्दीक कर रही है कि गर्मी का यह दौर दिल के मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। हार्ट पर बढ़ रहा है दोगुना दबाव कार्डियोलॉजी के निदेशक डॉ.राकेश वर्मा ने कहा कि,गर्मी के कारण शरीर में 'हीट स्ट्रेस' और 'डिहाइड्रेशन' यानी पानी की कमी की स्थिति पैदा हो रही है। इससे रक्त संचार प्रभावित हो रहा है, जिसका सीधा असर दिल की धमनियों पर पड़ रहा है। हृदय रोग संस्थान के निदेशक प्रो. राकेश वर्मा बताते हैं कि उच्च तापमान में शरीर का कूलिंग सिस्टम ठीक से काम नहीं कर पाता, जिससे रक्त वाहिकाएं फैल जाती हैं। लंबे समय तक पानी की कमी से खून गाढ़ा होने लगता है, जिससे दिल को शरीर में रक्त पंप करने के लिए सामान्य से कहीं ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इमरजेंसी में हर दिन 50 मरीज हो रहे भर्ती कार्डियोलॉजी विभाग के आंकड़े चिंताजनक हैं। इमरजेंसी में रोजाना 40 से 50 ऐसे मरीज भर्ती हो रहे हैं जिनमें डिहाइड्रेशन, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, लो ब्लड प्रेशर और अत्यधिक थकान जैसे गंभीर लक्षण मिल रहे हैं। व ओपीडी में परामर्श के लिए हर रोज 600 से 700 मरीज पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इनमें से ज्यादातर मरीज वे हैं जो पहले से ही बीपी या हृदय की किसी बीमारी से जूझ रहे हैं। सीने में जलन, सांस फूलना, घबराहट और अचानक बेहोशी जैसी शिकायतें अब आम हो गई हैं। बचाव के लिए बरतें सावधानी डॉ.राकेश वर्मा कहना है कि,यदि आप पहले से ही हृदय रोग या हाई बीपी के मरीज हैं, तो विशेष सावधानी बरतें। सबसे पहले सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें। खान-पान में बदलाव करते हुए सुपाच्य, कम नमक और कम फैट वाला भोजन लें। तरबूज, खरबूजा, संतरा, केला और नारियल पानी जैसे फलों और तरल पदार्थों का अधिक सेवन करें ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। इसके अलावा गर्मी में लगातार काम करने से बचें और शरीर में अधिक गर्मी महसूस होने पर तुरंत किसी ठंडे स्थान पर लेटकर आराम करें। बीपी, शुगर और मोटापे को नियंत्रित रखने के लिए डॉक्टर की सलाह और दवाओं के समय का कड़ाई से पालन करें। विशेषज्ञों का मानना है कि सतर्कता ही इस जानलेवा गर्मी से बचने का एकमात्र उपाय है और थोड़ी सी भी असहजता महसूस होने पर डॉक्टर से संपर्क करने में देरी न करें।
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