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    तय दुकानों से मंहगी किताबें खरीदने को मजबूर अभिभावक:बाेले स्कूल में लगी किताबें नहीं मिलती कहीं और, डीएम ने स्कूल्स को दिए थे पेरेंट्स पर दबाव न बनाने के आदेश

    3 hours ago

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    आगरा में स्कूलों की फीस और किताबों को लेकर अभिभावकों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। जिला प्रशासन की सख्त हिदायतों के बावजूद निजी स्कूलों द्वारा महंगी किताबें निर्धारित दुकानों से खरीदने का दबाव और हर साल सिलेबस बदलने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। हाल ही में डीएम की अध्यक्षता में हुई जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक में स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि फीस का पूरा विवरण वेबसाइट पर अपलोड किया जाए और किसी भी प्रकार की मनमानी पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी कहा गया था कि पुरानी किताबें होने पर नई खरीदने के लिए बाध्य न किया जाए और यूनिफॉर्म व किताबों के लिए किसी एक दुकान की मोनोपोली न हो। लेकिन जमीनी हकीकत अलग इन आदेशों के बावजूद शहर के कई नामी स्कूलों में स्थिति जस की तस बनी हुई है। अभिभावकों का कहना है कि हर साल सिलेबस बदल दिया जाता है, जिससे पुरानी किताबें बेकार हो जाती हैं और नई किताबें खरीदना मजबूरी बन जाती है। अभिभावकों के अनुसार सेंट फेलिक्स प्री-प्राइमरी में एलकेजी की किताबें करीब 3750 रुपए की दी जा रही हैं सेंट पैट्रिक्स में कक्षा 4 की किताबों का खर्च करीब 3750 रुपए है सेंट जॉर्जेस में कक्षा 2 के लिए करीब 5500 रुपए की किताबें खरीदनी पड़ रही हैं सेंट पॉल्स में कक्षा 5 की किताबें लगभग 5000 रुपए तक पहुंच रही हैं निर्धारित दुकानों से ही मिलती हैं किताबें एक महिला अभिभावक ने बताया कि स्कूल भले ही यह दावा करते हों कि किताबें कहीं से भी खरीदी जा सकती हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि ये किताबें केवल तय दुकानों पर ही उपलब्ध होती हैं। अन्य जगहों पर ये किताबें मिलती ही नहीं हैं, जिससे अभिभावक मजबूर होकर वहीं से खरीदारी करते हैं। डीएम के आदेशों की अनदेखी बैठक में साफ निर्देश दिए गए थे कि: अनावश्यक रूप से यूनिफॉर्म और सिलेबस में बदलाव न किया जाए स्कूल किसी एक दुकान से खरीदारी के लिए बाध्य न करें नियमों के उल्लंघन पर एफआईआर, जुर्माना और मान्यता रद्द तक की कार्रवाई हो सकती है इसके बावजूद कई स्कूल इन निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। अभिभावकों में नाराजगी लगातार बढ़ते खर्च और स्कूलों की मनमानी से अभिभावकों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका कहना है कि प्रशासन को केवल आदेश देने के बजाय सख्ती से पालन भी सुनिश्चित कराना चाहिए, ताकि उन्हें हर साल आर्थिक बोझ का सामना न करना पड़े। अब देखने वाली बात होगी कि जिला प्रशासन इन शिकायतों पर क्या ठोस कार्रवाई करता है।
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