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    TET से छूट की मांग, पीएम को भेजा पत्र:सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार की मांग, टीचर्स फेडरेशन ने उठाई आवाज

    2 hours ago

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    कुशीनगर में शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता से छूट की मांग को लेकर आवाज उठाई है। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के बैनर तले गुरुवार को बड़ी संख्या में शिक्षकों ने प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से प्रेषित किया। ज्ञापन में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई)-2009 लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) की अनिवार्यता से मुक्त रखने की मांग की गई है। शिक्षकों ने बताया कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 27 जुलाई 2011 से प्रभावी हुआ था। अधिनियम लागू होने के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया था, जबकि उससे पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इस शर्त से छूट दी गई थी। यह छूट अब सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद प्रभावित हो रही है। फेडरेशन पदाधिकारियों के अनुसार, माननीय सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के निर्णय के बाद अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर भी टीईटी की अनिवार्यता लागू होने की स्थिति बन गई है। इस स्थिति से देशभर में हजारों शिक्षक असमंजस में हैं। शिक्षकों ने तर्क दिया कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति तत्कालीन नियमों के तहत विधिसम्मत प्रक्रिया से हुई थी, उन पर वर्षों बाद नई शर्तें लागू करना सेवा शर्तों में प्रतिकूल बदलाव के समान है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस विषय में अध्यादेश लाकर पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की मांग की। साथ ही, संसद के माध्यम से स्पष्ट कानून बनाकर स्थिति को स्थायी रूप से स्पष्ट करने का आग्रह किया। दोपहर 1 बजे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर एकत्र हुए शिक्षकों ने जिलाधिकारी को यह ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन पर जिला मंत्री, जिला सह संयोजक, जिलाध्यक्ष और जिला संयोजक सहित अन्य पदाधिकारियों के हस्ताक्षर अंकित हैं। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
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