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    ठंड बढ़ते ही बच्चों में रेस्पिरेटरी इंफेक्शन का कहर:प्रति दिन 20% बच्चे ओपीडी में आ रहे संक्रमित, 1 से 2 हो रहे भर्ती

    3 hours ago

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    ठंड के मौसम में बच्चों में वायरल रेस्पिरेटरी इंफेक्शन का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। इसका असर सबसे ज्यादा छोटे बच्चों पर देखा जा रहा है। कानपुर मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना आने वाले बच्चों में 15 से 20 प्रतिशत बच्चे इसी इंफेक्शन से पीड़ित मिल रहे हैं। बाल रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार आर्य ने बताया कि इन दिनों खांसी, जुकाम और बुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इनमें से रोजाना एक से दो बच्चों को निमोनिया की गंभीर स्थिति में भर्ती करना पड़ रहा है। लापरवाही बिल्कुल ना बरते उन्होंने चेतावनी दी कि जो अभिभावक इस इंफेक्शन को हल्के में लेते हैं, उनके बच्चों में यही बीमारी आगे चलकर निमोनिया का रूप ले लेती है।डॉ. आर्य के अनुसार यह संक्रमण 5 साल से कम उम्र के बच्चों को तेजी से प्रभावित करता है, जबकि एक साल से कम उम्र के बच्चों में इसका खतरा सबसे ज्यादा होता है। नवजात और शिशुओं में यह वायरस सांस की नली में सूजन पैदा कर देता है, जिससे सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। एक से दूसरे में तेजी से फैलता है संक्रमण उन्होंने बताया कि यह एक वायरल इंफेक्शन है, जो एक बच्चे से दूसरे बच्चे में संपर्क के जरिए बहुत तेजी से फैलता है। आमतौर पर इस बीमारी को ठीक होने में 7 से 10 दिन का समय लगता है, लेकिन कमजोर इम्युनिटी वाले बच्चों में स्थिति गंभीर हो सकती है। लक्षण जिन पर रखें खास ध्यान - लगातार खांसी आना - नाक बहना या बंद होना - बुखार- सांस लेने में परेशानी - दूध कम पीना या खाना कम खान - सुस्ती या चिड़चिड़ापन बच्चों को ऐसे करें सुरक्षित बच्चों को भीड़भाड़ वाली जगहों पर ले जाने से बचें। बाहर निकलते समय बच्चों को मास्क जरूर पहनाएं। खांसी-जुकाम या बुखार के लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से दवा न लें। बच्चों को पूरे कपड़े पहनाकर रखें, शरीर खुला न रहे। ठंड से बचाव के लिए पैरों में मोजे और हाथों में दस्ताने पहनाएं। 2 महीने से कम उम्र के बच्चों को 4 से 5 लेयर में कपड़े पहनाएं। बच्चों के हाथ बार-बार साफ कराते रहें, स्वच्छता का ध्यान रखें। बीमार बच्चे को अन्य बच्चों से अलग रखें, ताकि संक्रमण न फैले। घर के अंदर धूम्रपान या धुआं बिल्कुल न होने दें, इससे फेफड़ों पर असर पड़ता है।
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