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    दालमंडी में ईद का आखिरी बाजार, गम और गुस्सा:दुकानदार बोले - त्योहार अच्छा नहीं लग रहा, चेहरा उतरा हुआ और सभी मायूस

    2 hours ago

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    'सरकार सिर्फ मकान मालिकों के बारे में सोच रही है। दालमंडी का ध्वस्तीकरण हो रहा है लेकिन मुआवजा केवल मकान मालिकों को मिल रहा है। यह गम काफी नहीं था कि ईद के बाजार पर ग्रहण लग गया। ये त्योहार अच्छा नहीं लग रहा है। बच्चे मना लें त्योहार यही काफी है। सभी का चेहरा उतरा हुआ है। सभी मायूस हैं और दिल रो रहा है। कितना बयान करें इस समय जो कहें वो कम है।’ ये कहना है वाराणसी की दालमंडी गली में वेडिंग लहंगा और शेरवानी की दुकान चलाने वाले इश्तियाक अहमद का। इश्तियाक 40 सालों से दालमंडी में दुकान चला रहे है। उन्होंने कहा- ईद की बाजार आखिरी है कि नहीं पता नहीं। पर यह सच है कि ध्वस्तीकरण की अफवाह का असर बिजनेस में हुआ है। सिर्फ 25 प्रतिशत बिक्री हुई है। इश्तियाक की तरह ही अन्य दुकानदार भी ईद के बाजार से मायूस नजर आये। दालमंडी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बीच ईद के बाजार के लिए काम रोका गया था। लेकिन ईद के इस अंतिम बाजार से क्या मुनाफा हुआ या मायूसी छाई। इन सब बातों पर दैनिक भास्कर ने दालमंडी के दुकानदारों से बातचीत की और जाना उनके दिल का हाल। पढ़िए रिपोर्ट… सबसे पहले देखिये दालमंडी में चहल-पहल की तीन तस्वीरें … दालमंडी के दुकानदारों ने क्या बताया और किस तरह से चल रहा ईद का बाजार; जानिए… ध्वस्तीकरण का बहुत असर हुआ है दालमंडी बाजार में दालमंडी में पिछले पांच महीने (अक्टूबर 2025) से तोड़फोड़ चल रही है। इस तोड़फोड़ को रोकने का बहुत प्रयास किया गया। लेकिन यह तोड़फोड़ बदस्तूर जारी है। इस ध्वस्तिकरण का बहुत ज्यादा असर दालमंडी, वहां के रहने वालों और बिजनेस पर पड़ा है। लोगों का हौसला और टूटने लगा है। अपनी दुकानदारी की पहली ईद है। जिसमें मार्केट में सन्नाटा है। कोई सामना लेने नहीं आ रहा है। आगे लगन है पर लोग शेरवानी और लहंगा नहीं खरीद रहे हैं। लोगों ने ध्वस्तीकरण को ज्यादा हाइलाइट कर दिया है। जिससे यह दिक्कत हुई है। जो बाहर से व्यापारी आते थे वो नहीं आ रहे हैं। इससे मार्किट के लोगों का जहां करोड़ों का नुकसान होगा तो सरकार को भी माल की ढुलाई, टैक्सेशन नहीं मिलेगा। सभी दुकानदार डरे हुए हैं इश्तियाक ने बताया - इस बार किसी भी दूकानदार ने बहार से नया माल नहीं मंगाया है। इससे बाजार पर असर हुआ है। दुकानदार डरे हुए हैं और संहमे हुआ हैं कि आगे क्या होगा। ईद के बाद दुकादारी होगी या नहीं। परिवार कैसे चलेगा और कल क्या होगा ये सब फेस करना पड़ रहा है। आगे की हालत समझ में नहीं आ रहे हैं। सिर्फ अंधेरा ही अंधेरा दिखाई दे रहा है। सरकार से बस यही मांग है कि जैसे मकान मालिकों को दे रहे वैसे ही दुकानदारों को भी दें मुआवजा फिर सब अच्छा होगा। दिल रो रहा है, सब मायूस हैं दालमंडी गली चहल-पहल है। लेकिन त्यौहार की रौनका गायब है। इश्तियाक ने कहा - त्यौहार अच्छा नहीं लग रहा है। सभी का दिल रो रहा है। बच्चे बस ईद मना लें यही हमारे लिए काफी है अब हम लोगों की ईद मायने नहीं रखती। सरे दुकानदारों का चेहरा उतरा हुआ है। सब मायूस हैं और सभी का दिल रो रहा है। गम और गुस्सा बहुत है पर क्या बयान करें। पुराना ही माल नहीं बिका तो नया क्या मंगाते दालमंडी में फुटवियर की दुकान चलाने वाले हैदर अली मायूस नजर आये। हैदर अली बोले - पिछली तीन पीढ़ियों से हमारी फुटवियर की दुकान है। रमजान के बजार की बात करें तो एक रमजान से लेकर आज 29 रमजान हो गई पर जो माल भरवाया था वही नहीं बिका है। ऐसे में हमने पहली बार ईद के बाजार के लिए नया माल नहीं मंगवाया है। क्योंकि पुराना ही माल काफी पड़ा हुआ है। ऐसे में बहुत नुकसान हुआ है। अभी तक बच्चों का नहीं ले पाए कपड़ा हैदर अली ने बताया - कारोबार ऐसा चौपट हुआ है कि अभी तक बच्चों का और घर में किसी का ईद का कपड़ा भी नहीं ले पाए हैं। यह सब इसलिए हुआ कि पूरे में यह अफवाह फैल गई है कि दालमंडी तो टूट गई है। इससे बाहर के ग्राहक जो बल्क में सामान लेने आते थे वो आये ही नहीं। ऐसे में दुकानदारी एकदम चौपट हो गई। हैदर ने कहाअगर पहले ही यह ध्वस्तीकरण रोक दिया जाता तो शायद हमें राहत मिलती पर ऐसा नहीं हुआ। बहुत तकलीफ है क्या क्या तकलीफ है की बता नहीं सकते। जिंदगी में नहीं सोचा था की ऐसा भी दिन आएगा दालमंडी में होजरी की दुकान चलाने वाले मोहम्मद कुद्दुस ने कहा - होजरी की दुकान दालमंडी में पिछली दो पीढ़ियों से चला रहे हैं। हमने कभी जिंदगी में यह नहीं सोचा था कि मार्केट वो भी ईद की ऐसे होगी। समझ लीजिये सिर्फ 25 प्रतिशत दुकानदारी हुई है। सबके दिमाग में यह आ गया है कि दालमंडी खत्म हो गई है और लोग इधर आ ही नहीं रहे हैं। ऐसे में बहुत नुकसान हुआ है। इसकी भरपाई कैसे होगी पता नहीं । इंसान कुछ सोच नहीं पा रहा है क्योंकि सुन रहे हैं कि दालमंडी का ध्वस्तीकरण ईद बाद फिर से शुरू होगा। व्यापार खत्म हो गया है चूड़ी की दुकान चलाने वाले फैसल सिद्दीकी ने बताया - व्यापार तो खत्म हो गया है। ध्वस्तीकरण के आड़ में व्यापार चौपट कर दिया गया है। जो बहार से कस्टमर आते थे वो नहीं आ रहे हैं। बस ये समझ लीजिये की सांस चल रही है। व्यापार तो खत्म हो गया है। तकलीफ बहुत है इतना की दर्द बयान नहीं कर सकते। माल ले आये हैं क्रेडिट में लेकिन ऐसा सन्नाटा कभी नहीं देखा था ईद की बाजार में। लोग कह रहे हैं दालमंडी खत्म हो जाएगी इससे सभी भयभीत हैं और इस भय में काम नहीं हो पायेगा । अब जानिए नई सड़क व्यापार मंडल के अध्यक्ष फारुख सिद्दीकी ने क्या कहा?… वाराणसी पुलिस ने नई सड़क कपड़ा मार्केट व्यापर मंडल के अध्यक्ष और व्यापारी नेता फारुख सिद्दीकी को जेल भेजा था। जब वो मीडिया को बाईट दे रहे थे। फारूक ने भी अपनी राय बेबाकी से रखी। यहां की इतनी अफवाह उड़ गयी की मार्केट ध्वस्त हो गयी इससे दूर दराज के व्यापारी नहीं आये। सिर्फ लोकल लोग आये हैं। इस बार खरीददारी सिर्फ 20 प्रतिशत हुई है। दो दिन बचा है क्या ही कमा पाएंगे। किसी भी दुकानदार की ईद नहीं हुई है। वह बाल बच्चों का भी कपड़ा बनाने के लिए लोग परेशान हैं। दुकानदार ये चाहता है कि उनका कारोबार यहीं रहे बार बार यह रिक्वेस्ट की जा रही है कि इसे इतना छुड़ा नहीं किया जाए पर सरकार के कान में जूं नहीं रेंग रही है। अब कोर्ट का सहारा है उसके फैसले की आस में पड़े हुए हैं । अब जानिए क्या है दालमंडी प्रोजेक्ट… वाराणसी की दालमंडी गली को मॉडल सड़क के रूप में विकसित किया जाना है। प्रधानमंत्री ने अपने 51वें काशी के दौरे पर इस कार्य का शिलान्यास किया था। इसके लिए राज्य सरकार की तरफ से 215.88 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। 186 भवन, दुकान स्वामियों को 191 करोड़ रुपए मुआवजा के रूप में दिए जाएंगे। 60 फुट चौड़ी होगी सड़क पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के अनुसार नई सड़क से लेकर चौक थाने तक 650 मीटर की दाल मंडी गली को 60 फुट चौड़ा किया जाना है। इसमें 30 फुट की सड़क और दोनों तरफ 15-15 फुट की पटरी होगी। इसके अंदर बिजली, सीवर और पानी की व्यवस्था अंडरग्राउंड की जाएगी। यहां तारों का जंजाल साफ किया जाएगा। 220 करोड़ से बनेगी 650 मीटर लंबी सड़क नई सड़क से चौक थाने तक गई दालमंडी की कुल लंबाई 650 मीटर है। इस सड़क को 17.5 मीटर चौड़ा करने का मसौदा पास हो चुका है। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 के अंतिम दिन 220 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ और 2 करोड़ रुपए रिलीज भी कर दिए गए। पीडब्ल्यूडी की टीम ने कहां कितनी सड़क चौड़ी है, कौन सा मकान कितनी जद में आ रहा है, 181 घरों की नपाई के बाद उनकी रजिस्ट्री शुरू हुई और ध्वस्तीकरण का कार्य शुरू हुआ है। इसके अलावा इसमें 6 मस्जिदें भी हैं। PWD के अधिकारियों ने डेटा तैयार किया। इस डेटा के हिसाब से मुआवजे का आकलन किया गया था। जो लगभग 191 करोड़ रुपए हैं। अभी तक 45 मकानों की रजिस्ट्री हो चुकी है। धीरे-धीरे मकानों का ध्वस्तीकरण किया जा रहा है।
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