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    दामाद के खिलाफ झूठा बयान देने वालों पर कोर्ट सख्त:साली बोली थी- जीजू ने सपने में था छेड़ा, ससुर पर मुकदमे का आदेश

    4 hours ago

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    कानपुर में एयरफोर्स कर्मी पर झूठा मुकदमा दर्ज कराने के मामले में कोर्ट ने ससुर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। सात साल पहले नौबस्ता निवासी नाबालिग साली ने अपने जीजा पर छेड़खानी का आरोप लगाया था। इस मामले में एफआईआर के बाद आरोपी जीजा को 19 दिन जेल में रहना पड़ा था, लेकिन साली अपने बयानों से पलट गई, उसने कहा था कि– जीजू ने सपने में छेड़छाड़ की थी। सात साल बाद कोर्ट ने आरोपी जीजा को बरी कर दिया, साथ ही कोर्ट में झूठे साक्ष्य देने पर ससुर के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए है। यह था पूरा मामला… बिठूर निवासी एयरफोर्स कर्मी का विवाह 10 फरवरी 2019 को बिधनू की युवती से हुआ था। 13 फरवरी को एयरफोर्स कर्मी चौथी में पत्नी को लेने ससुराल गया तो 15 वर्षीय साली भी उसके साथ आ गई। एफआईआर के मुताबिक 8 मार्च की रात 9 बजे किशोरी जोर-जोर से चिल्लाने लगी। उसकी बड़ी बहन कमरे में पहुंची तो किशोरी ने आरोप लगाया कि जीजा ने उसके साथ छेड़छाड़ की और दबोच लिया। इस पर बड़ी बहन ने डायल-100 पर फोन कर पुलिस को बुलाया था। पिता की तहरीर पर नौबस्ता थाने में आरोपी एयरफोर्स कर्मी के खिलाफ करीब पांच माह बाद दर्ज की गई थी। जिसके बाद उन्हें 19 दिनों तक जेल में रहना पड़ा था। मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता करीम अहमद सिद्दीकी ने बताया कि पीड़िता ने कोर्ट में बयान दिया कि उससे छेड़छाड़ सपने में हुई थी, सच में नहीं। पीड़िता के पिता और बड़ी बहन ने भी भ्रमवश मुकदमा दर्ज कराने की बात कोर्ट में स्वीकार की थी। इसके बाद कोर्ट ने एयरफोर्स कर्मी को बरी कर दिया था। अधिवक्ता ने बताया कि दरअसल मामला पति–पत्नी के विवाद चल रहा था। पति ने विवाह को शून्य करने का मुकदमा कोर्ट में दाखिल किया था। एयरफोर्स कर्मी पर दबाव बनाने के लिए ससुर ने अपनी नाबालिग बेटी से छेड़छाड़ करने का मुकदमा दर्ज कराया था। कोर्ट में बयान होने के बाद वादी ने एक प्रार्थना पत्र दिया था, जिसमें उसने कहा था कि पहले हमने सही बात नहीं बतायी थी, अब हमे सही बयान देना है। बहस के दौरान कहा कि पुलिस को जो बयान दिए थे वह सही है, जबकि कोर्ट में दिए बयान सही नहीं है। अभियोजन पूरे मुकदमे में साक्ष्य पेश करने में विफल साबिल हुआ। पीड़िता के बयानों के बाद कोर्ट ने कहा कि परिकल्पना के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। कोर्ट ने झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करने पर सख्त रुख अख्तियार करते हुए वादी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए है। ‘सपने में महसूस हुआ कि जीजू ने पकड़ लिया’ अधिवक्ता करीम अहमद सिद्दीकी ने बताया कि कोर्ट में पीड़िता ने दिसंबर 2021 में बयान दर्ज कराए थे। कोर्ट को दिए बयानों में उसने कहा था कि ‘उस दिन रात के नौ बजे थे। मैं एंटीबायोटिक दवा लेकर सो रही थी। दवा नशीली होती है, इसलिए आधी नींद में थी। सपने में ऐसा महसूस हुआ कि जीजू ने मुझे पकड़ लिया है...। मैंने फिर शोर मचा दिया। मेरी दीदी आ गई और मैं अस्पताल चली गई। यह सपना था, सच में ऐसा नहीं था।
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