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    दैनिक भास्कर ने गूगल से पार्टनरशिप की:लैंग्वेज जर्नलिज्म में इनोवेशन के लिए काम करेंगे, टियर 2-3 शहरों पर फोकस

    3 hours ago

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    दैनिक भास्कर ने गूगल के साथ नई रणनीतिक साझेदारी की है। पिछले तीन साल में दैनिक भास्कर देश का सबसे तेजी से बढ़ने वाला न्यूज एप बना है। एप को एक्टिव यूजर और एंगेजमेंट के मामले में भी देश में नंबर-1 रैंक मिली है। यह सफलता गूगल के साथ मिलकर किए गए नए प्रयोगों, बेहतर यूजर एक्सपीरियंस और नए रेवेन्यू मॉडल की वजह से मिली है। खासकर इसका फोकस टियर-2 और टियर-3 शहरों के तेजी से बदलते ‘भारत’ बाजार पर रहा है। दैनिक भास्कर की पहली प्राथमिकता कंटेंट और पत्रकारिता है। कंपनी का मकसद वफादार यूजर बेस बनाना और लंबे समय के लिए सब्सक्राइबर तैयार करना है। साथ ही, एंगेजमेंट से समझौता किए बिना विज्ञापन से कमाई बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। वीडियो न्यूजरूम को नई ताकत मिली इस साझेदारी का बड़ा हिस्सा वीडियो को मजबूत करने पर रहा। टियर-2 और टियर-3 शहरों में लोग तेजी से वीडियो देख रहे हैं। इसे देखते हुए दैनिक भास्कर ने अपने पुराने टेक्स्ट-केंद्रित न्यूजरूम को ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया, जहां वीडियो को भी बराबर महत्व मिले। दैनिक भास्कर डिजिटल के CEO पथिक शाह ने कहा, “गूगल न्यूज इनिशिएटिव के साथ साझेदारी से हमें वीडियो न्यूज पर तेजी से काम करने में मदद मिली। हमने अपने अंदरूनी टूल्स को अपग्रेड किया। अब रियल टाइम, लोकल और ग्राउंड रिपोर्टिंग पर आधारित वीडियो बनाना और मैनेज करना हमारी टेक्स्ट पत्रकारिता जितना ही मजबूत हो गया है। इससे रिपोर्टिंग और वीडियो टीम के बीच बेहतर तालमेल बना है और वीडियो देखने का समय बढ़ाने में मदद मिलेगी।” इस पहल के तहत वीडियो और ग्राफिक्स के लिए खास डिजिटल एसेट मैनेजमेंट (DAM) सिस्टम तैयार किया गया। इसकी मदद से अलग-अलग शहरों में मौजूद रिपोर्टर और वीडियो एडिटर एक साथ रियल टाइम में काम कर रहे हैं। इससे तेजी से और अच्छी क्वालिटी के वीडियो तैयार हो रहे हैं। वीडियो कंजम्प्शन 33.3% बढ़ा गूगल के सहयोग से एप का वीडियो अनुभव भी बेहतर किया गया। अब वीडियो प्लेयर ऐसे बनाया गया है, जो कम डेटा और कम क्षमता वाले मोबाइल पर भी आसानी से चले। अलग-अलग फॉर्मेट और बेहतर एडिटोरियल कंट्रोल भी जोड़े गए हैं। इन बदलावों का असर साफ दिखा। वीडियो प्रोड्यूसर और एडिटर के बीच संतुष्टि स्तर 4 गुना बढ़ा। रिपोर्टरों में यह 10 गुना बढ़ा। वीडियो DAM सिस्टम को 86% लोगों ने अपनाया। यूजर एंगेजमेंट भी बढ़ा है। एप में वीडियो देखने का समय 18.2% बढ़ा और DAM लॉन्च के बाद 4.8% और बढ़ा। वीडियो कंजम्प्शन 33.3% बढ़ा। हाइपरलोकल पत्रकारिता पर फोकस इस साझेदारी का दूसरा बड़ा हिस्सा स्थानीय खबरों को मजबूत करना रहा। खासकर छोटे शहरों और कस्बों में भरोसेमंद और अच्छी क्वालिटी की खबरें पहुंचाने पर ध्यान दिया गया। दैनिक भास्कर समूह के निदेशक गिरीश अग्रवाल ने कहा, “दैनिक भास्कर और गूगल के साथ मिलकर हमने उत्तर प्रदेश जैसे बड़े हिंदी भाषी राज्य में हाइपरलोकल न्यूज को मजबूत किया है। हमारा मकसद उन इलाकों तक सही और भरोसेमंद खबर पहुंचाना था, जहां अच्छी खबरों की कमी है।” उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत 200 से ज्यादा स्ट्रिंगर और पत्रकारों को ट्रेनिंग दी गई। 1 लाख से ज्यादा हाइपरलोकल खबरों की जांच (ऑडिट) की गई, ताकि उनकी गुणवत्ता बनी रहे। यह पहल आंकड़ों तक सीमित नहीं है। इसका मकसद लोगों को सही और भरोसेमंद जानकारी देकर उन्हें जागरूक और मजबूत बनाना है। इंटरैक्टिव कंटेंट से बढ़ी एंगेजमेंट दैनिक भास्कर ने यूजर को जोड़ने के लिए इंटरैक्टिव कंटेंट पर भी काम किया। यानी ऐसी खबरें और फॉर्मेट, जिनमें यूजर सिर्फ पढ़े नहीं, बल्कि उसमें हिस्सा भी ले सके। CEO पथिक शाह ने कहा, “गूगल न्यूज इनिशिएटिव के साथ साझेदारी से हमें पारंपरिक आर्टिकल और वीडियो से आगे बढ़कर इंटरैक्टिव फॉर्मेट पर तेजी से काम करने का मौका मिला। इससे यूजर का अनुभव बेहतर हुआ और एंगेजमेंट में साफ बढ़ोतरी देखी गई।” बड़े न्यूज इवेंट्स के दौरान किए गए इन प्रयोगों में 9% लोगों ने इंटरैक्टिव कंटेंट अपनाया। इस कंटेंट पर औसतन 4.7 मिनट तक यूजर जुड़े रहे। इससे डायरेक्ट एप यूजर बेस और यूजर लॉयल्टी दोनों में बढ़ोतरी हुई। रेवेन्यू मॉडल पर संतुलित रणनीति इस साझेदारी का एक अहम हिस्सा विज्ञापन से कमाई को सही तरीके से बढ़ाना भी रहा। कोशिश यह रही कि कमाई बढ़े, लेकिन यूजर का अनुभव खराब न हो। CEO पथिक शाह ने कहा, “गूगल न्यूज इनिशिएटिव के साथ साझेदारी से हमें एप में विज्ञापन के शुरुआती मॉडल पर तेजी से काम करने का मौका मिला। इससे हम यूजर एक्सपीरियंस से समझौता किए बिना कमाई का एक नया और टिकाऊ तरीका बना पा रहे हैं। आगे चलकर यही मॉडल लॉयल यूजर और सब्सक्राइबर बढ़ाने में मदद करेगा।” ऑडियो पत्रकारिता पर भी प्रयोग दैनिक भास्कर अब ऑडियो पत्रकारिता पर भी काम कर रहा है। कंपनी का मानना है कि ‘भारत’ यानी छोटे शहरों और कस्बों के यूजर के लिए ऑडियो एक अहम माध्यम है। गूगल के साथ मिलकर इस दिशा में शुरुआती प्रयोग किए जा रहे हैं, ताकि अच्छी क्वालिटी का ऑडियो कंटेंट तैयार किया जा सके और यूजर को बेहतर अनुभव मिले। गूगल इंडिया में न्यूज पार्टनरशिप्स की हेड दुर्गा रघुनाथ ने कहा, “दैनिक भास्कर के साथ साझेदारी पर हमें गर्व है। उनका इनोवेशन, यूजर को प्राथमिकता देना और जिम्मेदारी से आगे बढ़ना डिजिटल न्यूज के भविष्य को दिखाता है। हम आगे भी उनके साथ काम करते रहेंगे।” दैनिक भास्कर और गूगल की यह साझेदारी डिजिटल पत्रकारिता में बदलाव की मिसाल मानी जा रही है। कंपनी का कहना है कि अच्छी क्वालिटी के कंटेंट, यूजर-केंद्रित सोच, नए स्टोरी फॉर्मेट और जिम्मेदार कमाई मॉडल के जरिए वह डिजिटल न्यूज में अपनी मजबूत पकड़ आगे भी बनाए रखेगी।
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