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    दुनिया भर में मचा हड़कंप! Donald Trump ने छेड़ा एक और संघर्ष! इस बार निशान China पर साधा, महायुद्ध का ख़तरा मंडराया

    4 hours ago

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    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया बयान ने पूरी दुनिया में सनसनी फैला दी है और वैश्विक राजनीति में भारी तनाव पैदा कर दिया है। पनामा नहर पर चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर ट्रंप ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए साफ चेतावनी दी है कि अमेरिका इस रणनीतिक जलमार्ग पर चीन का कब्ज़ा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा मानी जाने वाली पनामा नहर को लेकर दोनों महाशक्तियों के बीच पैदा हुआ यह टकराव अब एक नए अंतरराष्ट्रीय संकट का रूप ले चुका है। कूटनीतिक गलियारों और डिफेंस एक्सपर्ट्स के बीच इस बात का डर तेजी से गहरा रहा है कि लैटिन अमेरिका में प्रभाव जमाने की यह जंग कहीं दोनों परमाणु संपन्न देशों को एक भीषण महायुद्ध की तरफ न धकेल दे, जिसने इस समय पूरी दुनिया को बेहद तनाव और खौफ के माहौल में डाल दिया है। मेडोरा में थियोडोर रूज़वेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी के उद्घाटन के अवसर पर बोलते हुए ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका अब चीन को पनामा नहर (Panama Canal) पर अपना प्रभाव या कब्ज़ा नहीं बढ़ाने देगा। अपने इस संबोधन में ट्रंप ने न सिर्फ ऐतिहासिक फैसलों पर सवाल उठाए, बल्कि पनामा नहर के जरिए अमेरिका की आर्थिक और रणनीतिक संप्रभुता को लेकर भी बड़ी बात कही।नियंत्रण सौंपने का फैसला 'बेवकूफी भरा': ट्रंपअपने संबोधन में राष्ट्रपति ट्रंप ने अतीत में अमेरिका द्वारा पनामा नहर का नियंत्रण पनामा को सौंपने के फैसले की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि नियंत्रण मिलने के तुरंत बाद पनामा ने जहाजों के लिए ट्रांज़िट फीस (पारगमन शुल्क) चार गुना बढ़ा दी। इसके बाद भी इसे दो बार और बढ़ाया गया, फिर भी नहर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में कोई कमी नहीं आई। ट्रंप ने कहा, "उन्होंने बस सालों-साल तक बहुत सारा पैसा कमाया। यह कितना बेवकूफी भरा फैसला था?"गौरतलब है कि ट्रंप का इशारा 1977 की ऐतिहासिक 'टोरिजोस-कार्टर संधि' की ओर था, जिसके तहत अमेरिका ने धीरे-धीरे इस नहर का नियंत्रण पनामा को सौंपना शुरू किया था और साल 1999 में यह प्रक्रिया पूरी तरह संपन्न हुई थी। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अब चीन इस खाली जगह को भरने और इस रणनीतिक जलमार्ग पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर रहा है, जिसे अमेरिका किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा।अमेरिका के लिए क्यों इतनी महत्वपूर्ण है पनामा नहर?पनामा नहर सिर्फ प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर को जोड़ने वाला एक रास्ता भर नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था और उसकी सैन्य ताकत की रीढ़ है। इसे निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:वैश्विक सप्लाई चेन का केंद्र: अमेरिका के कुल कंटेनर ट्रैफिक का लगभग 40% हिस्सा इसी नहर से होकर गुजरता है। सालाना 270 बिलियन डॉलर से अधिक का अमेरिकी कार्गो इस रूट पर निर्भर है।समय और पैसे की भारी बचत: यदि यह नहर न हो, तो जहाजों को पूरे दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप का चक्कर लगाकर (केप हॉर्न होकर) जाना पड़ेगा। पनामा नहर जहाजों की यात्रा का समय कई दिन कम कर देती है, जिससे ईंधन और लॉजिस्टिक्स की लागत में अरबों डॉलर की बचत होती है।सैन्य और नौसैनिक बढ़त: अमेरिकी नौसेना के लिए अटलांटिक से पैसिफिक महासागर के बीच युद्धपोतों और रसद को तेजी से ट्रांसफर करने के लिए यह नहर हमेशा से रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील रही है।लैटिन अमेरिका में चीन के बढ़ते निवेश और बुनियादी ढांचों (Infrastructures) पर बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अमेरिका इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़े खतरे के रूप में देख रहा है।जन्मसिद्ध नागरिकता और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर भी बोले ट्रंपइस कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने पनामा नहर के अलावा घरेलू मोर्चे पर भी कई बड़ी बातें कहीं। उन्होंने जन्मसिद्ध नागरिकता (Birthright Citizenship) को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पुराने रुख की आलोचना की।ट्रंप ने तर्क दिया कि यह कानून मूल रूप से गृहयुद्ध (Civil War) के बाद गुलामों के बच्चों को अधिकार देने के लिए लाया गया था, न कि दूसरे देशों के अमीर लोगों के लिए जो प्राइवेट जेट (गल्फस्ट्रीम) से आकर यहाँ नागरिकता का फायदा उठाते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मुद्दे को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।राष्ट्रपति की शक्तियां बढ़ने पर जताई खुशीसाथ ही, ट्रंप ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा 29 जून को दिए गए एक बड़े फैसले की जमकर तारीफ की। इस फैसले ने राष्ट्रपति को सीनेट से मंजूर अधिकारियों (एग्जीक्यूटिव ब्रांच एजेंसियों के प्रमुखों) को हटाने का व्यापक अधिकार वापस दे दिया है, जिससे 91 साल पुराना एक नियम पलट गया है।ट्रंप ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा, "यह अधिकार 1932 में एफडीआर (फ्रेंकलिन डी. रूजवेल्ट) से छीना गया था। इस फैसले ने राष्ट्रपति पद को उस समय ताकत वापस दी है, जब देश को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।"राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में अमेरिका अपनी विदेश नीति में 'अमेरिका फर्स्ट' (America First) के तहत लैटिन अमेरिका में चीनी दखलअंदाजी के खिलाफ और आक्रामक रुख अपना सकता है। वहीं घरेलू स्तर पर भी वे राष्ट्रपति पद की शक्तियों को मजबूत करने के पक्ष में हैं। Stay updated with International News in Hindi on Prabhasakshi 
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