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    थारू समाज की महिलाओं ने रचा इतिहास:परंपरागत हुनर से आत्मनिर्भरता की मिसाल, लखनऊ में मिला सम्मान

    2 hours ago

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    लखनऊ स्थित बाबा साहब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी में आयोजित ‘उद्यमिता से समावेशी विकास’ संगोष्ठी में अनुसूचित जनजाति (ST) थारू समाज की महिलाओं ने अपनी मेहनत और हुनर से नई पहचान बनाई। लखीमपुर खीरी की आरती देवी राना को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए इनोवेटर और इंट्रेपरेनर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह पूरे थारू समाज के लिए गर्व का क्षण बन गया। जंगल से जुड़ी परंपरा से बाजार तक का सफर थारू समाज, जो परंपरागत रूप से जंगल और प्रकृति से जुड़ा रहा है, आज अपने हस्तशिल्प और हुनर के जरिए बाजार में नई पहचान बना रहा है। लखीमपुर खीरी की आरती देवी राना थारू महिला हथकरघा सहकारी समिति से जुड़ी हैं। उन्होंने अपने समुदाय की महिलाओं को संगठित कर पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक बाजार से जोड़ने का काम किया है। उनके नेतृत्व में महिलाएं हैंडलूम दरी, तौलिया, साल, गमछा के साथ-साथ मूंज से बने टोकरियां, पूजा सामग्री, गुलदस्ते और जलकुंभी से तैयार किए गए बैग और टोपी जैसे उत्पाद तैयार कर रही हैं। ये उत्पाद न सिर्फ स्थानीय बल्कि बाहरी बाजारों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। ओडीओपी से मिला बढ़ावा, आत्मनिर्भर बन रही महिलाएं आरती देवी राना ने बताया कि ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना से थारू समाज की महिलाओं को बड़ा सहारा मिला है। इस योजना के जरिए उनके उत्पादों को पहचान और बाजार मिला, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं। आज थारू समाज की महिलाएं केवल पारंपरिक कार्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे छोटे उद्योगों के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर रही हैं। संगोष्ठी में मिला सम्मान, बढ़ा आत्मविश्वास संगोष्ठी में डिक्की के प्रदेश अध्यक्ष मनीष वर्मा की मौजूदगी में आरती देवी राना को इनोवेटर और इंट्रेपरेनर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इस सम्मान ने न केवल उनके काम को सराहा, बल्कि पूरे थारू समाज के आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाई दी। कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञों ने कहा कि थारू समाज की महिलाएं अगर इसी तरह आगे बढ़ती रहीं, तो वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत कड़ी बन सकती हैं। सम्मानित उद्यमियों की सूची • सुमित्रा सरोज कंपनी: पिक्सल पावर एंड एनर्जी LLP कार्यक्षेत्र: बायो टॉयलेट, FRP दरवाजे, इवेंट मैनेजमेंट जिला: प्रयागराज • आरती देवी राना फर्म: थारू महिला हथकरघा सहकारी समिति लिमिटेड कार्यक्षेत्र: हैंडलूम व हस्तशिल्प (ODOP उत्पाद) जिला: लखीमपुर खीरी • अर्चना जैसल (Archana Jaisal) कंपनी: Shiksha Saathi Pvt. Ltd. कार्यक्षेत्र: शिक्षा जिला: वाराणसी • मनीष कुमार कंपनी: Smartx Shakti Foundation कार्यक्षेत्र: ग्रामीण सशक्तिकरण एवं रोजगार जिला: वाराणसी • डॉ. राजेश कुमार कंपनी: शुभांगी हॉस्पिटल कार्यक्षेत्र: स्वास्थ्य सेवाएं जिला: सुल्तानपुर • जनजातीय शिल्प प्रा. लि. (Janjatiya Shilp Pvt. Ltd.) कार्यक्षेत्र: सांस्कृतिक व हेरिटेज आधारित हस्तशिल्प • निकिता रावत संस्था: जनजातीय शिल्प कार्यक्षेत्र: हस्तशिल्प व जनजातीय उत्पादों का प्रमोशन • संगीता कंपनी: दौलत गृह उद्योग कार्यक्षेत्र: मसाले, फूड प्रोसेसिंग व मैनपावर सेवाएं • डॉ. रजनीश वर्मा कंपनी: GLOSTA Animal Sciences (UAE) एवं Legacinetics (Australia) कार्यक्षेत्र: एनिमल IVF, क्लोनिंग एवं ह्यूमन स्टेम सेल रिसर्च निवास: लखनऊ समावेशी विकास का मजबूत उदाहरण बना थारू समाज विशेषज्ञों का मानना है कि थारू समाज की यह पहल ‘समावेशी विकास’ का बेहतरीन उदाहरण है, जहां समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोग भी मुख्यधारा में आकर आर्थिक रूप से सशक्त बन रहे हैं। लखनऊ में आयोजित इस संगोष्ठी ने यह साबित कर दिया कि यदि सही अवसर और मंच मिले, तो जनजातीय समाज भी देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
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