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    UCC पर NDA में बंटी राय, Shiv Sena और TDP ने दिया साथ तो JD(U) और Chirag Paswan ने दिखाई सतर्कता

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    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की है कि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले BJP-NDA शासित सभी 21 राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू किया जाएगा। इस घोषणा से सत्ताधारी गठबंधन के भीतर अलग-अलग राय सामने आई है; कुछ सहयोगी दल इस कदम का समर्थन कर रहे हैं, जबकि अन्य अंतिम फैसला लेने से पहले बातचीत करना चाहते हैं। जहां तेलुगु देशम पार्टी (TDP), शिवसेना और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) ने UCC का समर्थन किया है, वहीं जनता दल (यूनाइटेड) और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) जैसे BJP के सहयोगी दलों ने अधिक सतर्क रुख अपनाया है।इसे भी पढ़ें: Arvind Kejriwal का BJP पर आरोप, Punjab में 80 प्रतिशत नशा भाजपा शासित राज्यों से आ रहाखासकर JD(U) ने यह साफ़ कर दिया है कि राष्ट्रीय स्तर पर UCC को समर्थन देने का मतलब यह नहीं है कि वह बिहार में इस कानून को लागू होने देगी। जदयू नेता श्याम रजक ने सोमवार को पार्टी का रुख़ दोहराते हुए कहा कि संसद में इस मुद्दे पर चर्चा के बाद से पार्टी की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने कहा कि जब यह बिल संसद में आया था, तो हमारे नेता (नीतीश कुमार) ने साफ़ तौर पर कहा था कि वह बिल का समर्थन तो करते हैं, लेकिन इसे अपने राज्य में लागू नहीं होने देंगे। हम अपनी उस बात पर कायम हैं।पार्टी ने यह भी संकेत दिया है कि वह BJP नेतृत्व के साथ इस मुद्दे पर बात करेगी। JD(U) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा जल्द ही इस मामले पर शाह से बातचीत करेंगे। JD(U) का हमेशा से यह मानना ​​रहा है कि UCC की दिशा में कोई भी कदम उठाने से पहले देश की सामाजिक और धार्मिक विविधता का ध्यान रखा जाना चाहिए और इस पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। बिहार का रुख अहम हो सकता है क्योंकि JD(U) राज्य में BJP की एक अहम सहयोगी पार्टी है और दोनों पार्टियां सत्ताधारी NDA का हिस्सा हैं।बीजेपी के एक और सहयोगी, LJP (राम विलास) के नेता चिराग पासवान ने भी UCC को तुरंत मंज़ूरी देने से परहेज किया है। पासवान ने इस बात पर ज़ोर दिया कि पार्टी की ओर से कोई अंतिम फ़ैसला लेने से पहले भारत की विविधता को ध्यान में रखना होगा। उन्होंने कहा कि भारत का सामाजिक ताना-बाना विविध है। हर वर्ग की अपनी नागरिक परंपराएँ और रीति-रिवाज हैं। संविधान ने भी इसे मान्यता दी है—पाँचवीं-छठी अनुसूची, अनुच्छेद 371A और 371G, और अब तक हर कानून में अनुसूचित जनजातियों को दी गई छूटें इस बात का सबूत हैं। उन्होंने कहा कि मेरी पार्टी, लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास), समानता और विविधता, दोनों के लिए प्रतिबद्ध है। ड्राफ्ट को सार्वजनिक होने दें, सभी हितधारकों के हितों का आकलन होने दें और व्यापक चर्चा होने दें। इसके बाद, समीक्षा करने के बाद, पार्टी अपना रुख स्पष्ट करेगी।इसे भी पढ़ें: West Bengal Bypolls 2026 | बीजेपी ने उम्मीदवारों का किया ऐलान, नंदीग्राम से सुवेंदु अधिकारी के दिवंगत PA Chandranath Rath की मां को टिकटकेंद्र में BJP की अहम सहयोगी पार्टी TDP ने UCC का समर्थन किया है, साथ ही इस मामले में बातचीत और सलाह-मशविरे की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया है। TDP के एक नेता ने यह भी कहा कि भारत जैसे देश में, जहाँ अलग-अलग धर्म और संस्कृतियाँ हैं, UCC की बहुत ज़्यादा ज़रूरत है। शिवसेना ने शाह की UCC की पहल का और मज़बूती से समर्थन किया है। पार्टी नेता श्रीकांत शिंदे ने कहा ि UCC समानता, न्याय और राष्ट्रीय एकता के सिद्धांतों पर आधारित है। यह हमारे संस्थापक 'हिंदू हृदय सम्राट' बालासाहेब ठाकरे का लंबे समय से चला आ रहा वैचारिक रुख भी रहा है।
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