Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    UGC विवाद पर प्रेसकॉन्फ्रेंस:सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद लखनऊ में रणनीति बैठक, एडवोकेट एपी सिंह ने उठाए सवाल

    8 hours ago

    1

    0

    यूजीसी के कथित ‘काले कानून’ के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की बेंच द्वारा रोक लगाए जाने के बाद रविवार को लखनऊ के प्रेस क्लब, हजरतगंज में अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में अधिवक्ता डॉ. एपी सिंह, याचिकाकर्ता एवं पूर्व सांसद डॉ. कुंवर हरिवंश सिंह और अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के पदाधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान आगे की रणनीति पर चर्चा की गई और यूजीसी की प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर कड़ी आपत्ति जताई गई। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आगे की रणनीति पर मंथन 15 फरवरी 2026 को आयोजित इस बैठक में डॉ. एपी सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की बेंच द्वारा रोक लगाया जाना लोकतंत्र और न्यायपालिका की मजबूती का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अब जरूरत इस बात की है कि समाज यह समझे कि यूजीसी लागू करने के पीछे किन लोगों की सोच काम कर रही है और इसके दूरगामी परिणाम क्या हो सकते हैं। बैठक में उपस्थित पूर्व सांसद डॉ. कुंवर हरिवंश सिंह और महासभा के पदाधिकारियों ने भी इस मुद्दे को सामाजिक एकता से जोड़ते हुए आगे जनजागरण अभियान चलाने की बात कही। ‘क्या पहले से हो रहा था भेदभाव?’-एपी सिंह का सवाल प्रेस वार्ता के दौरान डॉ. एपी सिंह ने कहा कि जिस प्रकार की संरचना प्रस्तावित की गई है, उससे यह संदेश जाता है मानो अब तक विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में व्यापक स्तर पर भेदभाव होता रहा हो। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब शिक्षकों और प्राध्यापकों से यह शपथ पत्र लिया जाएगा कि वे किसी जाति के साथ भेदभाव नहीं करेंगे? उन्होंने कहा कि यदि ऐसी व्यवस्था बनाई जाती है तो इससे शिक्षण संस्थानों की छवि पर प्रश्नचिह्न लगेगा और समाज में अविश्वास का माहौल बनेगा। ‘समाज को बांटने की कोशिश’ का आरोप डॉ. एपी सिंह ने आरोप लगाया कि यूजीसी की इस व्यवस्था से शैक्षणिक संस्थानों में अलग-अलग वर्गों के लिए अलग संरचना, हॉस्टल, कक्षाएं या लेक्चर जैसी व्यवस्थाएं बन सकती हैं, जिससे सामाजिक समरसता प्रभावित होगी। उन्होंने इसे समाज को जातीय आधार पर बांटने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के संदेश के विपरीत इस तरह की व्यवस्था सामाजिक एकता को कमजोर कर सकती है। उनके अनुसार, भारत की परंपरा एकता और समावेश की रही है, जहां समाज ने बिना भेदभाव के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया है। जनजागरण अभियान चलाने का संकेत बैठक में यह भी संकेत दिया गया कि यदि आवश्यक हुआ तो इस मुद्दे पर व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के पदाधिकारियों ने कहा कि वे समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद कर अपनी बात रखेंगे और कानूनी लड़ाई भी जारी रखेंगे। बैठक में मौजूद वरिष्ठ महामंत्री राघवेंद्र सिंह राजू ने कहा कि संगठन इस विषय को लेकर गंभीर है और सुप्रीम कोर्ट में आगे की कार्यवाही पर नजर रखे हुए है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर टिकी नजर बैठक के अंत में वक्ताओं ने कहा कि फिलहाल सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है। उनका कहना था कि न्यायपालिका से उन्हें निष्पक्ष निर्णय की उम्मीद है और वे लोकतांत्रिक व कानूनी तरीके से अपना पक्ष रखते रहेंगे।
    Click here to Read more
    Prev Article
    कन्नौज में जमीन विवाद में चले लाठी-डंडे:4 लोग घायल, पुलिस ने मामला शांत कराया, नहीं हुई एफआईआर
    Next Article
    महाशिवरात्रि पर भाकु वाले बाबा की पालकी यात्रा:श्री महाकाल पालकी सेवा परिवार ने किया आयोजन, शहर भक्तिमय

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment