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    UP के 27 प्रतिशत प्रधानों को नकारा:बुंदेलखंड के 30% और पूर्वांचल के 28% प्रधानों को दो या इससे कम रेटिंग; रोजगार नहीं मिलने से नाराजगी

    20 hours ago

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    दैनिक भास्कर की प्रधान रेटिंग में उत्तरप्रदेश के लोगों ने 27% प्रधानों को नकार दिया है। उन्हें पांच में दो या इससे कम रेटिंग दी है। बुंदेलखंड के 30% और पूर्वांचल के 28% प्रधानों के काम से लोग संतुष्ट नहीं हैं। लोगों ने उन्हें भी दो या इससे कम रेटिंग दी है। प्रदेश के 58,000 प्रधानों में से 15,800 प्रधानों को भी औसत से कम रेटिंग मिली है। उनके काम को जनता ने नकार दिया है। प्रदेश के 8689 प्रधानों को लोगों ने अच्छा माना है। उन्हें तीन से या उससे ज्यादा रेटिंग दी है। अपनी पंचायत की फाइनल रेटिंग देखने के लिए क्लिक करें। क्षेत्रों के हिसाब से मध्य-अवध बेहतर प्रदेश के चार क्षेत्र पश्चिम, मध्य–अवध, पूर्वांचल और बुंदेलखंड के हिसाब से देखें तो पश्चिम और मध्य-अवध के प्रधान सबसे बेहतर दिखाई देते हैं। मध्य-अवध के 17,205 प्रधानों में से 2926 यानि 17% के काम को अच्छा माना है। यहां के 4646 यानि 27% प्रधानों को लोगों ने रिजेक्ट कर दिया है। उन्हें औसत से कम रेटिंग दी है। पश्चिम के 16172 प्रधानों में से 2535 को हर काम में बेहतर मानते हुए उन्हें तीन या इससे ज्यादा रेटिंग दी है। बुंदेलखंड के सिर्फ 12%, पूर्वांचल के 13% और पश्चिम के 16% प्रधानों को बेहतर मानते हुए उन्हें तीन या उससे ज्यादा रेटिंग दी है। बुंदेलखंड में पेयजल के कारण 1047 प्रधान रिजेक्ट बुंदेलखंड के सात जिलों की 2825 में से 1047 पंचायतों के लोगों ने प्रधान को पेयजल को लेकर नकारा है। उन्होंने इसे पांच में से दो या उससे कम रेटिंग दी है। पूर्वांचल में लोगों ने नाली निर्माण को सबसे खराब बताया है। यहां के 21 जिलों की 21,900 पंचायतों में से 40% में लोगों ने इसे दो या इससे कम रेटिंग दी है। पश्चिम के जिलों के लोग भी गांवों में रोजगार न मिलने से नाराज हैं। यहां 36% पंचायतों के लोगों ने नाली निर्माण के काम को औसत से भी खराब माना है। मध्य–अवध क्षेत्र के 21 जिलों में लोग पेयजल की व्यवस्था से संतुष्ट हैं। यहां 20% पंचायतों के लोगों ने पेयजल को तीन या इससे ज्यादा रेटिंग दी है। बुंदेलखंड में सिर्फ 353 प्रधानों को तीन या उससे ज्यादा रेटिंग दी है। 5 कामों पर 1 से 5 स्टार तक रेटिंग दी लोगों ने अपने प्रधान को 5 काम पेयजल, सड़क, सफाई, रोजगार और शौचालय को लेकर रेटिंग दी। रेटिंग 1 से 5 स्टार तक की थी। 1 स्टार यानी सबसे खराब और 5 स्टार यानी सबसे अच्छा। जिन लोगों ने रेटिंग दी, उनका नाम गोपनीय रहा। मतलब, कोई ये कभी नहीं देख पाएगा कि किस व्यक्ति ने क्या रेटिंग दी है। इन्हीं पांच कामों पर मिली रेटिंग का एवरेज प्रधानों की फाइनल रेटिंग है। मान लीजिए किसी प्रधान को सड़क के मामले 4 रेटिंग मिली है, पेयजल में 3, सफाई में 5, रोजगार में 2 और सेनिटेशन में 3 तो इनका एवरेज 3.4 हुआ। पश्चिम के 58% प्रधान औसत पश्चिम के 16,172 प्रधानों में से 16% प्रधानों को लोगों ने बहुत अच्छा माना है। पश्चिम के 26% प्रधानों को लोगों ने खराब बताया है। 58% प्रधानों को दो से तीन से बीच रेटिंग देकर उनको और उनके काम को औसत बताया है। यहां पेयजल और रोजगार के मामले में 36% प्रधानों को नकार दिया है। पश्चिम के 16172 प्रधानों में से 4137 को लोगों ने नकार दिया है। 2535 प्रधानों को हर काम में बेहतर मानते हुए उन्हें तीन या इससे ज्यादा रेटिंग दी है। क्षेत्र के 9500 प्रधानों को औसत मानकर उन्हें दो से तीन के बीच रेटिंग दी है। मध्य-अवध में नाली निर्माण से नाखुश मध्य-अवध के लोगों ने नाली निर्माण को लेकर 17,205 प्रधानों में से 6351 से नाराजगी जताई है। यहां के 37% प्रधानों को दो या उससे कम रेटिंग दी है। जबकि 3138 यानि 18% पंचायतों में नाली निर्माण को काम को बहुत अच्छा बताया है। प्रधानों की टोटल रेटिंग की बात करें तो यहां के 4646 प्रधानों को नकराते हुए उन्हें दो या उससे कम रेटिंग दी है। 2926 प्रधानों को हर काम में अच्छा माना है। यहां के 9633 प्रधानों को औसत बताकर दो से तीन के बीच रेटिंग दी है। पूर्चांचल के 12,852 प्रधान औसत पूर्वांचल के लोगों ने गांवों में नाली निर्माण पर प्रधान को सबसे खराब रेटिंग दी है। यहां के 40% प्रधानों को नाली निर्माण के मामले में रिजेक्ट किया है। उन्हें दो या उससे कम रेटिंग दी है। सिर्फ 14% को तीन या उससे ज्यादा रेटिंग दी है। यहां के 21 जिलों के 21,900 प्रधानों की ओवरऑल रेटिंग देखें तो 6173 को लोगों ने रिजेक्ट कर दिया है। 2875 प्रधानों को हर काम में अच्छा बताकर उन्हें तीन या इससे ज्यादा रेटिंग दी है। 12,852 प्रधान दो से तीन के बीच रेटिंग प्राप्त कर सके हैं। बुंदेलखंड में पानी से बड़ी समस्या रोजगार पेयजल को लेकर पूरे प्रदेश में हमेशा चर्चा रहने वाले बुंदेलखंड के गांवों में लोगों ने इसे तीसरी सबसे बड़ी समस्या माना है। 37 प्रतिशत पंचायतों के लोगों ने इसे पांच में दो या दो से कम रेटिंग दी है। यहां के सात जिलों में आने वाली 2825 पंचायत के लोगों ने गांवों में रोजगार के अवसर और नाली निर्माण को सबसे बड़ी समस्या बताया है। 42% लोगों ने इसे दो या इससे कम रेटिंग दी है। बुंदेलखंड के सात जिलों के 2825 प्रधानों में से सिर्फ 353 ही औसत से अच्छे हैं। 844 को लोगों ने पूरी तरह से नकार दिया है। 1628 प्रधानों को औसत बताया है। 19 दिन चली रेटिंग दैनिक भास्कर न्यूज एप पर प्रधानों की रेटिंग 30 अप्रैल से शुरू हुई थी। 18 मई तक लोगों ने रेटिंग दी थी। 19 दिन में प्रदेश के 75 जिलों के सभी ब्लॉक में इसे अच्छा रिस्पॉन्स मिला। पूरे प्रदेश में इस कैंपेन में लाखों लोग शामिल हुए। पंचायत में रहने वाले लोगों ने प्रधान को उसके काम के आधार पर उनका मूल्यांकन किया है। प्रधान रेटिंग का रिजल्ट ऐसे देखें दूसरी पंचायतों का रिजल्ट ऐसे देखें
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