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    UP Madarsa Fraud: Video में कैद हुआ हाजिरी का 'खेल', Plastic Card से चल रहा था Biometric System

    4 hours from now

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    उत्तर प्रदेश के सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों में फर्जी बायोमेट्रिक उपस्थिति का एक नया मामला बाराबंकी से सामने आया है। एक वीडियो में कथित तौर पर दिखाया गया है कि शिक्षकों की उपस्थिति बायोमेट्रिक सत्यापन के बजाय प्लास्टिक कार्डों से दर्ज की जा रही है। इस घटना ने निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भी इसका संज्ञान लिया है। प्राप्त वीडियो में कई शिक्षकों के नाम प्लास्टिक कार्डों पर लिखे हुए दिखाई दे रहे हैं, जिनका उपयोग अंगूठे के निशान के स्थान पर उपस्थिति दर्ज करने के लिए किया जा रहा है। फुटेज में कथित तौर पर अनुपस्थित शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करते हुए कर्मचारी दिखाई दे रहे हैं, जिससे पता चलता है कि रिकॉर्ड में हेराफेरी की जा रही है, जिसका उपयोग बाद में वेतन वितरण के लिए किया जाता है।इसे भी पढ़ें: Pawan Khera की मुश्किलें बढ़ीं! Guwahati High Court ने अग्रिम ज़मानत याचिका की खारिज, असम CM की पत्नी ने दर्ज कराया है केसअधिकारियों का कहना है कि सभी सहायता प्राप्त मदरसों में बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य है और वेतन जारी करने से पहले अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों द्वारा जिला स्तर पर रिकॉर्ड संकलित किए जाते हैं। हालांकि, इस मामले में प्रणाली में उचित प्रशासनिक नियंत्रण का अभाव प्रतीत होता है और यह कथित तौर पर किसी आधार-आधारित ऑनलाइन प्रमाणीकरण से जुड़ी नहीं है।बाराबंकी मामला अनियमितताओं की श्रृंखला में एक और कड़ी जोड़ता हैबाराबंकी का यह खुलासा जौनपुर में इसी तरह के एक मामले के तुरंत बाद आया है, जहां मदरसे के प्रबंधक के परिवार के सदस्यों के अंगूठे के निशान का इस्तेमाल करके फर्जी उपस्थिति दर्ज की गई थी। उस मामले की जांच अभी जारी है। सूत्रों ने बताया कि मैला रेगंज स्थित बाराबंकी मदरसे, जिसकी पहचान इस्लामिया स्कूल के रूप में हुई है, में लगभग दो दर्जन शिक्षक हैं। बायोमेट्रिक उपकरणों की उपलब्धता के बावजूद, वास्तविक समय में ऑनलाइन सत्यापन की कमी के कारण ऐसी अनियमितताएं संभव हो पाईं।इसे भी पढ़ें: Rahul Gandhi ने RSS को क्यों कहा 'राष्ट्रीय सरेंडर संघ'? Ram Madhav के बयान से मचा सियासी बवालव्यवस्थागत खामियां और निगरानी का अभाव उजागरविशेषज्ञों और अधिकारियों का कहना है कि आधार-आधारित चेहरे की पहचान का अभाव, सीमित निरीक्षण और ऑफ़लाइन रिकॉर्ड रखने जैसी खामियां प्रमुख कमजोरियां हैं जिनका दुरुपयोग किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि उपस्थिति रिकॉर्ड मैन्युअल रूप से प्रिंट करके जमा किए जाते हैं, जिससे सत्यापन को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। यह मुद्दा उन चिंताओं को भी फिर से सामने लाता है जो पहले अदालती निर्देशों के माध्यम से उठाई गई थीं, जिनमें दुरुपयोग को रोकने के लिए मदरसों में ऑनलाइन प्रमाणीकरण प्रणालियों की सिफारिश की गई थी।
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