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    उत्तर और दक्षिण की कला का होगा संगम:CSJMU और बेंगलुरु की आत्मालय अकादमी के बीच MoU; अब UP के छात्र सीखेंगे भरतनाट्यम

    10 hours ago

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    शहर के कला प्रेमियों और शास्त्रीय नृत्य के साधकों के लिए एक अच्छी खबर है। अब कानपुर में रहकर भी दक्षिण भारतीय शास्त्रीय नृत्य 'भरतनाट्यम' की बारीकियां सीखी जा सकेंगी। बुधवार को छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में एक ऐतिहासिक समझौता हुआ। यह करार यूनिवर्सिटी के 'स्कूल ऑफ क्रिएटिव एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स', वीएसएसडी कॉलेज की 'संस्कारशाला' और बेंगलुरु की मशहूर 'आत्मालय अकादमी' के बीच हुआ है। दूर होगी उत्तर और दक्षिण की दूरी इस समझौते (MoU) के बाद उत्तर भारत के कलाकार दक्षिण भारतीय शैली में भरतनाट्यम का विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए छात्र बेंगलुरु जाकर या फिर ऑनलाइन माध्यम से शिक्षा ले पाएंगे। इसी तरह, दक्षिण भारत के कलाकारों को उत्तर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को समझने का मौका मिलेगा। इस करार पर यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार रोकेश कुमार मिश्र, वीएसएसडी कॉलेज की सचिव सीए नीतू सिंह और आत्मालय अकादमी की डॉ. पद्मजा वेंकटेश सुरेश ने हस्ताक्षर किए। नृत्य सिर्फ कला नहीं, एक थैरेपी भी है कार्यक्रम में मौजूद डॉ. वंदना पाठक ने नृत्य के एक अलग पहलू पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि नृत्य असल में एक प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति (Natural Therapy) का हिस्सा है। आज की भागदौड़ भरी और जटिल जीवनशैली में मानसिक शांति और सरसता के लिए नृत्य बहुत उपयोगी है। वहीं, बेंगलुरु से आईं डॉ. पद्मजा वेंकटेश सुरेश ने नाट्यशास्त्र की तकनीकी बारीकियों और आज के दौर में इसकी उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया। नृत्यार्पणम,मंच पर उतरीं दक्षिण की अप्सराएं कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भरतनाट्यम की 'नृत्यार्पणम' प्रस्तुति रही। डॉ. पद्मजा की शिष्याओं अपर्णा डोड्डामालूर, श्रेया श्रीनाथ और आर्या भारद्वाज ने अपनी भाव-भंगिमाओं और कदमों की थाप से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रेक्षागृह में मौजूद हर शख्स इन कलाकारों की प्रतिभा देख दंग रह गया। रिसर्च के भी खुलेंगे नए रास्ते यह समझौता सिर्फ नाच-गाने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए दोनों क्षेत्रों के प्रोफेसर मिलकर भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत ग्रंथों पर शोध भी करेंगे। सीए नीतू सिंह ने कहा कि वे कला सीखने वाले विद्यार्थियों को हर संभव सहयोग और प्रोत्साहन देंगी। कार्यक्रम का संचालन शोध छात्रा तेजस्वी ने किया। इस दौरान प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी, प्रो. वृत्ति मिश्रा, डॉ. सुचिरिता खन्ना और प्रो. नील टंडन सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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