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    वर्ल्ड अपडेट्स:अमेरिका में चीन के सीक्रेट पुलिस स्टेशन का खुलासा, न्यूयॉर्क का रहने वाला लू जियानवांग दोषी करार

    11 hours ago

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    न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट ने अमेरिकी नागरिक लू जियानवांग को चीन सरकार की ओर से सीक्रेट पुलिस स्टेशन चलाने के मामले में दोषी ठहराया है। अभियोजन पक्ष का दावा है कि यह स्टेशन मैनहटन के चाइनाटाउन इलाके में संचालित हो रहा था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक 64 वर्षीय लू जियानवांग चीन के पब्लिक सिक्योरिटी मंत्रालय के लिए काम कर रहा था। उसे हैरी लू के नाम से भी जाना जाता है। जूरी ने उसे चीन सरकार के अवैध एजेंट के तौर पर काम करने और जांच में बाधा डालने के आरोप में दोषी माना है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार कथित पुलिस स्टेशन 2022 की शुरुआत में शुरू किया गया था। यह मैनहटन के चाइनाटाउन में एक रामेन स्टॉल के ऊपर पूरे फ्लोर में चल रहा था। FBI जांच शुरू होने के बाद 2022 के अंत में इसे बंद कर दिया गया। प्रॉसिक्यूटर्स ने बताया कि जांच की जानकारी मिलने के बाद लू और उसके सह-आरोपी चेन जिनपिंग ने चीन के अधिकारियों के साथ हुए टेक्स्ट मैसेज डिलीट कर दिए थे। FBI के असिस्टेंट डायरेक्टर जेम्स सी बार्नाकल जूनियर ने कहा कि इस स्टेशन का इस्तेमाल चीन विरोधी और लोकतंत्र समर्थक लोगों को टारगेट करने के लिए किया गया। मामले के दूसरे आरोपी चेन जिनपिंग दिसंबर 2024 में चीन के एजेंट के तौर पर साजिश रचने का आरोप स्वीकार कर चुके हैं। उनकी सजा पर फैसला अभी बाकी है। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि दुनिया के 53 देशों में चीन के ऐसे 100 से ज्यादा कथित आउटपोस्ट मौजूद हैं। हालांकि चीन इन आरोपों से इनकार करता रहा है और इन्हें सिर्फ ‘सर्विस स्टेशन’ बताता है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… ICC वारंट से बचने संसद भवन में भागते रहे फिलीपींस के पूर्व पुलिस चीफ डेला रोजा फिलीपींस के सीनेटर और पूर्व पुलिस प्रमुख रोनाल्ड डेला रोजा ICC के गिरफ्तारी वारंट से बचने के लिए संसद भवन में सुरक्षा एजेंसियों से भागते नजर आए। CCTV फुटेज में डेला रोजा संसद के गलियारों और सीढ़ियों से भागते दिखाई दिए। इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने उन पर पूर्व राष्ट्रपति रोड्रिगो डुटर्टे के साथ मिलकर मानवता के खिलाफ अपराध करने का आरोप लगाया है। 64 वर्षीय डेला रोजा सोमवार को संसद भवन में स्थानीय जांच एजेंसियों से बचते नजर आए। फुटेज में वे अपने सहायकों के साथ भागते दिखाई दिए और एक बार गिरते भी नजर आए। ICC ने सोमवार को पुष्टि की कि डेला रोजा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। कोर्ट का आरोप है कि 2016 से 2018 के बीच ड्रग्स विरोधी अभियान के दौरान 32 लोगों की हत्या के मामलों में उन्होंने डुटर्टे के साथ साजिश रची। डेला रोजा सोमवार से सीनेट भवन में ही मौजूद हैं। फेसबुक लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि उन्हें हेग नहीं भेजा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैध कानूनी प्रक्रिया होने पर वे जांच का सामना करेंगे। डेला रोजा पूर्व राष्ट्रपति रोड्रिगो डुटर्टे के बेहद करीबी सहयोगी रहे हैं। वे उस समय पुलिस प्रमुख थे जब फिलीपींस में ड्रग्स के खिलाफ सख्त अभियान चलाया गया था। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक इस अभियान के दौरान हजारों लोगों की बिना न्यायिक प्रक्रिया के हत्या हुई। पुलिस आंकड़ों के अनुसार 6 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे। पूर्व राष्ट्रपति डुटर्टे को मार्च 2025 में गिरफ्तार कर हेग भेजा गया था, जहां वे फिलहाल ICC की हिरासत में हैं। हालांकि डुटर्टे और डेला रोजा दोनों ही आरोपों से इनकार करते रहे हैं। कीव पर रूस का बड़ा हमला: ड्रोन-मिसाइल अटैक में कई इमारतें क्षतिग्रस्त रूस ने गुरुवार तड़के यूक्रेन की राजधानी कीव पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। हमले में कई इमारतों को नुकसान पहुंचा, जबकि एक रिहायशी बिल्डिंग का हिस्सा ढह गया। यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक मलबे में लोगों के फंसे होने की आशंका है। हमले में कम से कम 4 लोग घायल हुए हैं। कीव सैन्य प्रशासन प्रमुख तैमूर तकाचेंको ने बताया कि शहर के पूर्वी डार्नित्स्की जिले में एक रिहायशी इमारत का हिस्सा ढह गया। मेयर विताली क्लिट्स्को के मुताबिक राजधानी के अलग-अलग इलाकों में भी नुकसान हुआ है। ड्रोन का मलबा एक 12 मंजिला अपार्टमेंट बिल्डिंग पर गिरा, जिससे आग लग गई। उन्होंने बताया कि 9 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि 2 लोगों को प्राथमिक उपचार दिया गया। हमले के बाद कीव में चार घंटे से ज्यादा समय तक एयर रेड अलर्ट जारी रहा। यूक्रेन की एयर फोर्स ने कहा कि रूसी ड्रोन राजधानी और अन्य क्षेत्रों में सक्रिय रहे। इससे एक दिन पहले बुधवार को भी रूस ने यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला किया था। अधिकारियों के मुताबिक पश्चिमी यूक्रेन के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया था, जिसमें कम से कम 6 लोगों की मौत हुई थी। जेलेंस्की के करीबी पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ की गिरफ्तारी के आदेश; मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप यूक्रेन के एंटी-करप्शन कोर्ट ने राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के करीबी सहयोगी और पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ आंद्रिय यरमाक की गिरफ्तारी का आदेश दिया है। यरमाक पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। कोर्ट ने उनकी जमानत के लिए 14 करोड़ ह्रीव्निया यानी करीब 31.9 लाख डॉलर की राशि तय की है। यूक्रेन की एंटी-ग्राफ्ट एजेंसियों के मुताबिक यरमाक पर एक आपराधिक नेटवर्क के जरिए करीब 1.05 करोड़ डॉलर की रकम को सफेद करने का आरोप है। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह रकम कीव के बाहर बने एक लग्जरी हाउसिंग प्रोजेक्ट के जरिए ट्रांसफर की गई। यरमाक ने सभी आरोपों से इनकार किया है। कोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने कहा कि उनके पास इतनी रकम नहीं है और उनकी लीगल टीम फैसले के खिलाफ अपील करेगी। आंद्रिय यरमाक को राष्ट्रपति जेलेंस्की के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिना जाता था। उन्हें यूक्रेन की राजनीति में राष्ट्रपति के बाद सबसे प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता था। पूर्व फिल्म निर्माता और वकील रहे यरमाक कई अंतरराष्ट्रीय बैठकों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में जेलेंस्की के साथ नजर आते थे। वे रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका समर्थित शांति वार्ताओं में भी यूक्रेन की ओर से प्रमुख वार्ताकार रहे थे। यरमाक ने पिछले साल सरकार में हुए बड़े फेरबदल के दौरान पद छोड़ा था। उस समय राष्ट्रपति कार्यालय पर सत्ता केंद्रीकरण के आरोप लग रहे थे। विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला फिलहाल जेलेंस्की सरकार के लिए तत्काल राजनीतिक खतरा नहीं बनेगा, लेकिन भविष्य में उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। रूस का अफगानिस्तान के साथ ‘फुल पार्टनरशिप’ बनाने का ऐलान रूस ने कहा है कि वह अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के साथ ‘पूर्ण साझेदारी’ स्थापित कर रहा है। मॉस्को ने क्षेत्र के अन्य देशों से भी काबुल के साथ सहयोग बढ़ाने की अपील की है। रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु ने कहा कि अफगानिस्तान के साथ सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए जरूरी है। शोइगु ने कहा कि मॉस्को तालिबान के साथ व्यावहारिक संवाद बना रहा है। इसमें सुरक्षा, व्यापार, संस्कृति और मानवीय सहायता जैसे क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने यह बयान शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में दिया। SCO में चीन, भारत, पाकिस्तान, ईरान और कई मध्य एशियाई देश शामिल हैं। रूस पिछले साल तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता देने वाला पहला देश बना था। तालिबान ने अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा कर लिया था, जब अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सेनाएं 20 साल बाद वहां से लौट रही थीं। रूस ने 2003 में तालिबान को आतंकवादी संगठन घोषित किया था। हालांकि अप्रैल 2025 में यह प्रतिबंध हटा लिया गया। मॉस्को का कहना है कि अफगानिस्तान से लेकर मध्य पूर्व तक सक्रिय इस्लामिक चरमपंथी समूहों से खतरे को देखते हुए काबुल के साथ सहयोग जरूरी है। शोइगु ने SCO से अफगानिस्तान के साथ संपर्क समूह फिर से सक्रिय करने की अपील भी की।
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