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    वर्ल्ड अपडेट्स:चीन में लूनर न्यू ईयर से पहले पटाखों की दुकान में विस्फोट, 8 लोगों की मौत, 2 घायल

    5 hours ago

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    पूर्वी चीन में लूनर (न्यू ईयर) से ठीक पहले पटाखों की दुकान में हुए विस्फोट और आग में 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 2 अन्य लोग मामूली रूप से झुलस गए। अधिकारियों ने सोमवार को इसकी पुष्टि की। यह धमाका रविवार दोपहर जिआंगसू प्रांत के डोंगहाई काउंटी के एक गांव में हुआ। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, एक निवासी ने दुकान के पास गलत तरीके से पटाखे जलाए, जिससे विस्फोट हो गया। घटना के कारणों की जांच जारी है। सरकार के बयान में कहा गया कि दुकान के आसपास पटाखों को जलाना बैन है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि लापरवाही से पटाखे जलाने के कारण आग भड़की और फिर विस्फोट हुआ। चीन में लूनर न्यू ईयर में पटाखे जलाना परंपरा का हिस्सा है। इसे बुरी शक्तियों को दूर भगाने का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, हाल के वर्षों में वायु प्रदूषण और सुरक्षा कारणों से कई शहरों में पटाखों पर प्रतिबंध लगाया गया था। पिछले साल कुछ स्थानीय सरकारों ने इन प्रतिबंधों में ढील दी थी, जिससे बाजार में पटाखों की बिक्री बढ़ी। रविवार की घटना के बाद आपातकालीन प्रबंधन मंत्रालय ने सभी क्षेत्रों से पटाखों के उत्पादन, परिवहन, बिक्री और उपयोग की निगरानी कड़ी करने का आदेश दिया है। मंत्रालय ने कहा कि दुकानों के आसपास पटाखे जलाने पर सख्ती से रोक लगाई जाए और स्थानीय प्रशासन जोखिम वाले जगहों की पहचान करे, ताकि लोग सुरक्षित तरीके से त्यौहार मना सके। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… अमेरिका ने सीरिया में IS के 30 से ज्यादा ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की, हथियार भंडार को निशाना बनाया, हजारों कैदी इराक ट्रांसफर अमेरिकी सेना ने सीरिया में इस्लामिक स्टेट (IS) के 30 से ज्यादा ठिकानों पर पिछले दो हफ्तों में हवाई हमले किए हैं। यह कार्रवाई पिछले साल अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमले के जवाब में की गई, जिसमें दो सैनिक और एक अमेरिकी नागरिक मारे गए थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक 3 फरवरी से 12 फरवरी के बीच 10 एयरस्ट्राइक की गईं। इन हमलों में IS के हथियार भंडार, लॉजिस्टिक ठिकाने और अन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। CENTCOM का दावा है कि दिसंबर में हुए घातक हमले के बाद शुरू की गई कार्रवाई में अब तक 100 IS ठिकानों पर हमला किया जा चुका है। कम से कम 50 आतंकी मारे गए या पकड़े गए हैं। सीरिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि पूर्वी क्षेत्र में स्थित अल-तनफ बेस पर सरकारी बलों ने नियंत्रण कर लिया है। यह बेस कई वर्षों तक अमेरिकी सेना के अधीन रहा और IS के खिलाफ अभियान में अहम भूमिका निभाता रहा। इस बीच अमेरिका ने सीरिया से हजारों IS बंदियों को इराक स्थानांतरित कर दिया है। इन्हें इराक की अल-करख जेल में रखा जाएगा। यह वही परिसर है जिसे पहले कैंप क्रॉपर कहा जाता था और जहां सद्दाम हुसैन को फांसी से पहले रखा गया था। CENTCOM प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि बंदियों का ट्रांसफर क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी कदम है। उन्होंने मिशन को चुनौतीपूर्ण बताते हुए संयुक्त बलों की सराहना की। अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि IS के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। ईरानी विदेश मंत्री अमेरिका से बातचीत के लिए स्विट्जरलैंड पहुंचे, परमाणु समझौते को लेकर विवाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची रविवार को जेनेवा (स्विट्जरलैंड ) पहुंचे, जहां मंगलवार को अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता का दूसरा दौर होना है। वे ईरान की टीम का नेतृत्व करेंगे। ओमान इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अरागची एक कूटनीतिक और तकनीकी प्रतिनिधिमंडल के साथ रवाना हुए। यह वार्ता इस महीने की शुरुआत में मस्कट (ओमान) में हुई पहली बैठक के बाद हो रही है, जिससे कई महीनों की ठहराव के बाद बातचीत फिर शुरू हुई है। ये वार्ताएं क्षेत्र में बढ़ते तनाव और अमेरिका की सैन्य तैयारियों के बीच हो रही हैं। वार्ता में ईरान के यूरेनियम इनरिचमेंट की सीमा, निगरानी व्यवस्था और अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। अरागची जेनेवा में स्विस और ओमानी अधिकारियों से मिलेंगे, साथ ही अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी से भी मुलाकात करेंगे। ईरान का कहना है कि वह एक नया परमाणु समझौता चाहता है, जो दोनों पक्षों को आर्थिक फायदे दे। ये वार्ताएं 2025 के मध्य में हुए 12 दिनों के संघर्ष के बाद हो रही हैं, जिसमें अमेरिका ने ईरानी परमाणु स्थलों पर बमबारी की थी। पिछले साल ईरान और इजराइल के बीच हुए संघर्ष के बाद बातचीत रुक गई थीं। ईरान के पास अब काफी मात्रा में उच्च संवर्धित यूरेनियम जमा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ी है। ईरान कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है। दूसरी ओर, अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। दो विमानवाहक पोत, यूएसएस अब्राहम लिंकन और यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड तैनात किए गए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि अगर बातचीत से समझौता नहीं हुआ तो ताकत का इस्तेमाल करना पड़ेगा।
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