Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    वंदेमातरम गीत को राष्ट्रगान जैसा दर्जा, कैबिनेट ने मंजूरी दी:अपमान करने या गायन में बाधा डालने पर सजा-जुर्माना; जन-गण-मन से पहले गाया जाएगा

    1 hour ago

    1

    0

    केंद्र सरकार ने वंदे मातरम को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा देने का फैसला किया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली जीत के बाद PM नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की पहली बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। कैबिनेट के फैसले के अनुसार, बंकिम चंद्र चटर्जी रचित वंदे मातरम पर अब वही नियम और पाबंदियां लागू होंगी जो वर्तमान में राष्ट्रगान पर लागू हैं। यानी इसके अपमान या गायन में बाधा डालने की स्थिति में सजा होगी। अभी राष्ट्रीय ध्वज,संविधान और राष्ट्रगान के अपमान पर जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है, और अब वंदे मातरम भी इसमें शामिल किया जाएगा। कानून में बदलाव और सजा का प्रावधान सरकार वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर यह बदलाव कर रही है। इसके लिए कानून की धारा 3 में संशोधन किया जाएगा। इस धारा के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगान गाने में बाधा डालता है या उसे रोकता है, तो उसे तीन साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। दोबारा अपराध करने पर कम से कम एक साल की सजा का प्रावधान है। संशोधन के बाद यही नियम वंदे मातरम पर भी लागू होंगे। सरकार ने जारी की गाइड लाइन केंद्र सरकार ने बुधवार को भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के गायन के लिए आधिकारिक प्रोटोकॉल के लिए गाइडलाइन जारी की। गाइड लाइन के अनुसार, वंदे मातरम का संपूर्ण आधिकारिक वर्जन, जिसमें छह श्लोक हैं और जिसकी अवधि लगभग 3 मिनट और 10 सेकंड है, प्रमुख राजकीय समारोहों के दौरान प्रस्तुत या बजाया जाना चाहिए। इनमें राष्ट्रीय ध्वज फहराना, राष्ट्रपति और राज्यपालों के आधिकारिक कार्यक्रमों में औपचारिक आगमन और प्रस्थान समारोह और ऐसे समारोहों में उनके निर्धारित भाषणों से पहले और बाद के कार्यक्रम शामिल हैं। पहले ‘राष्ट्रगीत’ गाया जाएगा और उसके बाद ‘राष्ट्रगान’ अगर किसी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ और ‘राष्ट्रगान’ दोनों होने हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम’ (राष्ट्रगीत) गाया जाएगा और उसके बाद ‘राष्ट्रगान’।दिशा-निर्देशों में आगे यह भी स्पष्ट किया गया है कि दर्शकों से अपेक्षा की जाती है कि वे सम्मान के प्रतीक के रूप में दोनों प्रदर्शनों के दौरान सावधान मुद्रा में खड़े रहें। वंदे मातरम गाने को बढ़ावा देने का भी आग्रह गृह मंत्रालय ने स्कूल-कॉलेज और महत्वपूर्ण संस्थागत कार्यक्रमों के दौरान वंदे मातरम गाने को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया है।इस कदम का उद्देश्य स्टूडेट्स और आम जनता के बीच राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति जागरूकता और सम्मान को प्रोत्साहित करना है। यह भी बताया गया है कि जब वंदे मातरम का प्रदर्शन किसी बैंड द्वारा किया जाता है, तो उससे पहले ढोल की थाप या बिगुल की ध्वनि से औपचारिक रूप से गायन की शुरुआत का संकेत दिया जाना चाहिए। सिनेमा हॉल और फिल्म स्क्रीनिंग के लिए छूट साथ ही, मंत्रालय ने सिनेमा हॉल और फिल्म स्क्रीनिंग के लिए विशिष्ट छूट प्रदान की है। निर्देश के अनुसार, फिल्म के साउंडट्रैक के हिस्से के रूप में वंदे मातरम बजाए जाने पर दर्शकों को खड़े होने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि मनोरंजन स्थलों में दर्शकों को खड़े होने के लिए मजबूर करने से देखने का अनुभव बाधित हो सकता है और संभावित रूप से दर्शकों के बीच भ्रम पैदा हो सकता है। चुनाव में ‘वंदे मातरम्' बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा बजट सत्र के समापन पर संसद के दोनों सदनों में वंदे मातरम के सभी छह अंतरों का पाठ किया गया। पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान भाजपा ने वंदे मातरम को बंगाली अस्मिता और राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में पेश किया था। पार्टी ने इसके 150 वर्ष पूरे होने पर राज्यभर में सामूहिक गायन और पदयात्राओं का आयोजन किया।साथ ही, बंकिम चंद्र चटर्जी की विरासत को भी चुनावी अभियान में प्रमुखता से उठाया गया। बंकिम चंद्र ने 1875 में लिखा था, आनंदमठ में छपा था भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गई थीं। ‘वंदे मातरम’ एक संस्कृत वाक्यांश है, जिसका मतलब है- हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ‘वंदे मातरम’ भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे स्वतंत्रता सेनानियों का नारा बन गया था। केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय ने आदेश में कहा है कि अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों या अन्य औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ बजाया जाएगा। इस दौरान हर व्यक्ति का खड़ा होना अनिवार्य होगा। यह आदेश 28 जनवरी को जारी हुआ, लेकिन मीडिया में इसकी जानकारी 11 फरवरी को आई। गणतंत्र दिवस परेड में वंदे मातरम की झांकी निकली थी दिल्ली में कर्तव्य पथ पर मुख्य परेड में इस साल 77वें गणतंत्र दिवस पर मुख्य परेड की थीम वंदे मातरम रखी गई थी। परेड में संस्कृति मंत्रालय ने वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने का जश्न मनाने वाली झांकी निकाली थी। इस झांकी को मंत्रालयों और विभागों की कैटेगरी में बेस्ट झांकी का अवॉर्ड मिला। संस्कृति मंत्रालय की 'वंदे मातरम: एक राष्ट्र की आत्मा की पुकार' थीम पर आधारित झांकी में बंकिम चंद्र चटर्जी के गीत की रचना, एक प्रसिद्ध मराठी गायक द्वारा औपनिवेशिक काल की रिकॉर्डिंग और Gen Z का प्रतिनिधित्व करने वाले एक समूह द्वारा इसका गायन दिखाया गया था। झांकी के आगे के भाग में वंदे मातरम की पांडुलिपि बनाते हुए दिखाया गया था। इसके निचले हिस्से में एक पैनल पर चटर्जी की एक छवि दिखाई गई थी। मध्य भाग में पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों का एक समूह था जिसने भारत की लोक विविधता को दर्शाया। शीतकालीन सत्र के दौरान हुआ था विवाद केंद्र सरकार ने पिछले साल वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान विशेष चर्चा का आयोजन किया था। लोकसभा और राज्यसभा में इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी चुनावों को लेकर राष्ट्रगीत को मुद्दा बना रही है। वहीं भाजपा ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति के तहत वंदे मातरम के हिस्से काटने का आरोप लगाया था। भाजपा ने 1937 में देश के पहले PM जवाहरलाल नेहरू की एक चिट्ठी शेयर की थी, जो उन्होंने सुभाष चंद्र बोस को लिखी थी। भाजपा ने आरोप लगाया था कि चिट्ठी में नेहरू ने संकेत दिया था कि वंदे मातरम की कुछ लाइनें मुसलमानों को असहज कर सकती हैं। संसद में बहस के दौरान भाजपा के पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा था कि राष्ट्रगीत को भी राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय ध्वज के समान दर्जा दिया जाना चाहिए। 8 दिंसबर 2025: PM बोले- कांग्रेस ने वंदे मातरम के टुकड़े किए पीएम मोदी ने लोकसभा में वंदे मातरम पर बहस की शुरुआत की थी। उन्होंने अपनी एक घंटे की स्पीच में कहा था, ‘कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के आगे घुटने टेक दिए और वंदे मातरम के टुकड़े कर दिए। नेहरू को लगता था कि इससे मुसलमानों को चोट पहुंच सकती है।’ पीएम ने कहा, 'वंदे मातरम के साथ विश्वासघात क्यों हुआ। वो कौन सी ताकत थी, जिसकी इच्छा पूज्य बापू की भावनाओं पर भी भारी पड़ी। पीएम मोदी ने एक घंटे की स्पीच में 121 बार वंदे मातरम कहा था।' वंदे मातरम के चार छंद क्यों हटाए गए थे? सव्यसाची भट्टाचार्य की किताब ‘वंदे मातरम: द बायोग्राफी ऑफ ए सॉन्ग’ के मुताबिक, 20 अक्टूबर 1937 को सुभाष चंद्र बोस को लिखी चिट्ठी में नेहरू ने लिखा था कि वंदे मातरम् की पृष्ठभूमि और भाषा मुसलमानों को असहज करती है और इसकी भाषा इतनी कठिन है कि बिना डिक्शनरी के समझना मुश्किल है। उस समय वंदे मातरम को लेकर देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहा था। जवाहरलाल नेहरू को यह विवाद एक संगठित साजिश का हिस्सा लगता था। इसी मुद्दे पर उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर से सलाह लेने की बात भी लिखी। 22 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने मूल गीत के छह पैरा में चार पैरा हटाने का फैसला लिया था। इस बैठक में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, राजेंद्र प्रसाद, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरोजनी नायडू सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। ------------------------------ वंदे मातरम से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें: ‘जितने साल मोदी PM, उतने साल नेहरू जेल में रहे’:वंदे मातरम् की डिबेट में RSS भी घसीटा गया, 6 बड़े दावों की पूरी हकीकत लोकसभा में वंदे मातरम पर 10 घंटे की बहस में सरकार और विपक्ष की तरफ से कई बड़े दावे हुए। पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के आगे घुटने टेक दिए। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने मोदी पर ही निशाना साधते हुए कहा कि जितने दिन से वो प्रधानमंत्री है, नेहरू उतने दिन जेल में रह चुके हैं। कांग्रेस ने RSS पर भी आरोप लगाया कि संघ ने आजादी के आंदोलन में हिस्सा नहीं लिया। वंदे मातरम की बहस के दौरान किए गए 6 बड़े दावे और उनकी हकीकत; जानने के लिए पूरी खबर पढ़ें… बंकिमचंद्र चटर्जी का घर खंडहर: 20 साल पहले आखिरी बार मरम्मत, वंशज बोले- ममता सरकार ने हमें भुला दिया राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्‘ लिखने वाले बंकिम चंद्र चटोपाध्याय की पांचवीं पीढ़ी से आने वाले सजल चट्टोपाध्याय सरकार की बेरुखी से नाराज हैं। वो कोलकाता में मौजूद बंकिम चंद्र के घर की जर्जर हालत के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराते हैं। उन्होंने 9 नवंबर 2025 को इसे लेकर BJP के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा था कि सरकार ने जिस मकान को धरोहर मानकर लिया, उसे ही बदहाल छोड़ दिया। पूरी खबर पढ़ें…
    Click here to Read more
    Prev Article
    बंगाल में चुनाव बाद हिंसा, TMC ऑफिस पर बुलडोजर चला:ममता-अभिषेक बनर्जी के घरों की सुरक्षा हटाई; 24 घंटों में भाजपा-तृणमूल के 4 कार्यकर्ताओं की हत्या
    Next Article
    पंजाब में आर्मी कैंप-BSF हेडक्वार्टर के बाहर IED ब्लास्ट,VIDEO:DGP बोले- PAK का हाथ, CM ने कहा- BJP ने कराए; चंडीगढ़ में भी हाई अलर्ट

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment