Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    “व्यक्ति-निर्माण से ही होगा राष्ट्र-निर्माण”:वाराणसी के BHU में आयोजित संगोष्ठी में आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण महराज का संबोधन

    2 hours ago

    1

    0

    सेवाज्ञ संस्थानम् काशी एवं शिक्षा संकाय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘उत्तिष्ठ भारत : संवाद से समझ की ओर’ कार्यक्रम में युवा चेतना, समाज और उत्तरदायित्व पर विमर्श हुआ। मुख्य अतिथि आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण जी महाराज, सारस्वत अतिथि डॉ. वागीश शुक्ल, व्योमेश शुक्ल, प्रो. हरेंद्र कुमार राय, प्रो. अंजली बाजपेयी एवं महानगर संयोजक शिवम् पांडेय उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण जी महाराज ने कहा कि “शत्रु विजयी नहीं होता, दुर्बलताएं परास्त होती हैं।” उन्होंने कहा कि व्यक्ति-निर्माण और राष्ट्र-निर्माण के बीच जो फांक उत्पन्न हुई है, वही आज की सबसे बड़ी चुनौती है। जो विकसित हुआ, उसने विकास को वैयक्तिक माना, राष्ट्रीय नहीं; परिणामस्वरूप भारतीय तो विकसित हुए, पर भारत के विकास पर संदेह बना रहा। उन्होंने स्वामी स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए कहा कि विश्व में सम्मान प्राप्त करने के बाद भी वे भारत की मिट्टी में लौटने को धन्य मानते थे। यही राष्ट्रबोध है। उन्होंने कहा कि आज की स्थिति स्वतंत्रता नहीं, बल्कि निरंकुशता है। केवल अभिव्यक्ति की उच्छृंखलता स्वतंत्रता नहीं होती। चेतना का केंद्र होती हैं संस्थाएं : व्योमेश शुक्ल अपने उद्बोधन में व्योमेश शुक्ल ने ‘जीवन, समाज एवं उत्तरदायित्व’ विषय पर मुक्तिबोध, रघुवीर सहाय, धूमिल और आचार्य रामचंद्र शुक्ल के संदर्भों के माध्यम से समाज की वैचारिक दिशा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्थाएं केवल संरचना नहीं, बल्कि चेतना का केंद्र होती हैं। सेवाज्ञ संस्थानम् द्वारा युवाओं के बीच वैचारिक संवाद की यह पहल अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि नागरी प्रचारिणी सभा को भी इस प्रकार के प्रयासों से सीखने की आवश्यकता है। कार्यक्रम का संचालन प्रज्ञा दुबे ने किया। अंत में शिक्षा संकाय की डीन प्रो. अंजली बाजपेयी ने अध्यक्षीय भाषण देते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल बड़े मंचों पर दिए गए भाषणों से नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के छोटे-छोटे उत्तरदायित्वों के निर्वहन से होता है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    गाजीपुर सपा विधायक जय किशन साहू को जनता ने नकारा:सपा के राजकुमार पहली पसंद, 72% लोग भाजपा नेता अवधेश को बनाना चाहते कैंडिडेट
    Next Article
    'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के समर्थन में आक्रोश रैली:अयोध्या में सपा-कांग्रेस का फूंका पुतला, महिलाओं ने कहा- आरक्षण में अड़ंगा बर्दाश्त नहीं

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment