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    'योगी महाराज आप न्याय करना, मैं जान देने जा रहा...':कानपुर में वॉयस रिकॉर्डिंग भेज दिल्ली भाजपा मंडल अध्यक्ष ने दी जान, पत्नी से विवाद था

    1 hour ago

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    मैं सबको बताना चाहता हूं कि, मैं मरना नहीं चाहता था… लेकिन मेरे ससुरालवालों ने मुझे मारने की पूरी प्लानिंग कर ली थी, इन्होंने ऐसा व्यूह रचा था कि मैं खुद सुसाइड कर लूं, इन्होने मेरे पूरे परिवार को खत्म करने की पूरी कसम खा ली थी… मैं अपनी जिंदगी बहुत अच्छे से जी रहा था, हर त्योहार, बर्थडे बड़ी धूमधाम से मनाया जाता था… मेरी पत्नी की मां बहुत दिनों से मेरे पीछे पड़ी हुई थी, घर में तोड़फोड़ करना, मेरी पत्नी को बरगलाना, इसके बाएं हाथ का खेल था… अब मैं अपनी जान दे रहा हूं। योगी महाराज, यूपी पुलिस आप देखना, आप न्याय करना। मैं जा रहा हूं, मैं मरना नहीं चाहता था, अपने बच्चों के साथ बहुत कुछ करना चाहता था, लेकिन इस आदमी ने मुझे कहीं का नहीं छोड़ा। वॉयस रिकॉर्डिंग परिजनों को भेज दी जान दिल्ली, नरैला के भाजपा मंडल अध्यक्ष विनोद कुमार मिश्रा ने गुरुवार को यह वॉयस रिकॉर्डिंग अपने दोस्तों व परिजनों को भेजकर जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ती देख दोस्त ने परिजनों को जानकारी देकर उन्हें हैलट अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने बताया कि एक माह पहले पत्नी शादी समारोह में शामिल होने की बात कहकर मायके चली आ गई थी, जिसके बाद से वह वापस नहीं जा रही थी। जिसके चलते उन्होंने सुसाइड कर लिया। दिल्ली में फील्ड ऑफीसर के पद पर थे कार्यरत मूलरूप से कन्नौज, तालिग्राम, नेपालपुर निवासी विनोद कुमार मिश्रा (38) दिल्ली के एक्सिस बैंक में फील्ड ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे। बर्रा विश्व बैंक कॉलोनी निवासी चाचा आरके मिश्रा ने बताया कि विनोद की शादी 16 साल पहले इलाके में रहने वाली अनीता उर्फ आरती मिश्रा के साथ हुई थी। उनके तीन बच्चे कार्तिक, पीहू व अटल है। विनोद दिल्ली में ही परिवार के साथ रहते थे। कार्तिक नरेला स्थित डीएवी कॉलेज में 10वीं, पीहू 9वीं की छात्रा है। जबकि सबसे छोटा बेटा अटल एयरफोर्स स्कूल में कक्षा 4 का छात्र है। परिजनों ने बताया कि दिल्ली नगर निगम में कांग्रेस पार्टी से पार्षद का चुनाव लड़ने के बाद विनोद भाजपा में शामिल हो गए थे। जिसके बाद उन्हें नरैला का मंडल अध्यक्ष बनाया गया था। चाचा आरके मिश्रा के मुताबिक विनोद का अक्सर पत्नी से मायके जाने को लेकर झगड़ा होता था। 3 महीने पहले पहले ही विनोद पत्नी को समझा–बुझाकर मायके से दिल्ली ले गया था, जिसके बाद 2 अप्रैल को परिवार में शादी समारोह की बात कहकर आरती कानपुर आ गई थी, जिसके बाद वापस नहीं लौटी। मरने से पहले अयोध्या दर्शन करने गया था विनोद ने फोन कर आने को कहा तो दोनों के बीच झगड़ा होने लगा, 26 अप्रैल को विनोद पत्नी को घर ले जाने के लिए मायके पहुंचे, लेकिन ससुरालीजनों ने उसे मिलने नहीं दिया। इसके बाद विनोद ने मामले की शिकायत बर्रा पुलिस को दी। पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलाया, लेकिन आरती थाने नहीं पहुंची। जिसके बाद विनोद अपने चाचा के घर चले गए थे। आरके मिश्रा ने बताया कि बुधवार को विनोद अपने दोस्त मनीष के साथ अयोध्या रामलला मंदिर दर्शन करने गए थे। गुरुवार को वह वापस लौटे और पत्नी को प्रसाद देने के लिए ससुराल गए, जहां घर चलने को लेकर उनकी पत्नी से कहासुनी हो गई। इसके बाद वह ससुराल से बाहर निकले और जहरीला पदार्थ खा लिया, इसके बाद करीब 9 मिनट की वॉयस रिकॉर्डिंग कर परिजनों, दोस्तों और बर्रा इंस्पेक्टर रवींद्र श्रीवास्तव को भेजी। तबियत बिगड़ने पर साथी मनीष ने परिजनों को जानकारी दी। आनन–फानन में परिजन उन्हें हैलट अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अब पढ़िए मंडल अध्यक्ष ने वॉयस रिकॉर्डिंग में क्या कहा… मैं सबको बताना चाहता हूं कि, मैं मरना नहीं चाहता था… लेकिन मेरे ससुरालवालों ने मुझे मारने की पूरी प्लानिंग कर ली थी, इन्होंने ऐसा व्यूह रचा था कि मैं खुद सुसाइड कर लूं, इन्होने मेरे पूरे परिवार को खत्म करने की पूरी कसम खा ली थी… इसमें जो शामिल लोग है, उसमें मेरी धर्मपत्नी आरती मिश्रा की मां मिथलेश कुमारी, उसका भाई विकास तिवारी, मामा का लड़का सुनील तिवारी, बहन अंजू और उसका पति है। मैं अपनी जिंदगी बहुत अच्छे से जी रहा था, कोई भी देख सकता है… हर त्योहार, बर्थडे बड़ी धूमधाम से मनाया जाता था… मेरी पत्नी की मां बहुत दिनों से मेरे पीछे पड़ी हुई थी, घर में तोड़फोड़ करना, मेरी पत्नी को बरगलाना, इसके बाएं हाथ का खेल था… मेरी पत्नी इसके कहने में आ जाती थी और वह इसका नाजायज फायदा उठाती थी। फिर भी मैं किसी तरह अपने घर को, हाथ पैर जोड़कर समेट कर चल रहा था। घटना 2 अप्रैल की है, मैं सुबह ऑफिस जा रहा था, मेरी पत्नी खाना बना रही थी… मैने खाना खाया और ऑफिस चला गया। मेरी पत्नी, बेटी पीहू, बेटा कार्तिक और अटल मेरे घर में था, अचानक साढ़े चार बजे पत्नी बेटी पीहू और घर का सामान, ज्वैलरी लेकर चली गई। मेरे बेटे 6 बजे घर आए तो ताला बंद था, मेरे घर के सामने रहने वाली लेडीज ने बच्चों को चाभी देते हुए कहा कि तुम्हारी मम्मी मार्केट गई हैं। जब वह 6:30 बजे तक नहीं आई तो बेटे ने मुझे फोन किया, मैं घर आया तो देखा कि घर का सारा सामान अस्त–व्यस्त था। वो सारा सामान उठा कर ले गई थी। मुझे सामान रुपए, पैसों की कोई परवाह नहीं, मैं अपने परिवार से ज्यादा किसी को नहीं मानता हूं… मैं अपनी बेटी पत्नी सबको बहुत प्यार करता हूं, इसके बाद मैंने अपनी पत्नी का पता किया, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। जिसके बाद मैने अपने बहनोई को फोन किया और कानपुर आया। इसकी मां अलग–अलग तरह से स्वांग रचती रहती थी, वह मुझे हमेशा नीचा दिखाती थी। मेरा एक एच ब्लॉक में मकान था, जो इसके घर के काफी पास था, इसलिए ही मैं उसे बेच कर दिल्ली आ गया। पांच–छह साल मैं दिल्ली में सुकून से रहा, फिर इसकी मां ने बदतमीजी शुरू कर दी। मैं अपने बहनोई, बेटों के साथ ससुराल पहुंचा, जहां मेरे साले ने मुझे बाहर से ही गालियां देकर भगा दिया। मैने मोहल्ले की सुशीला सचान को इसके घर भेजा, तो पता चला कि मेरी बेटी और पत्नी ससुराल में ही थी। मैं शांत हो गया, कि मेरी पत्नी और बेटी सुरक्षित है। मैं 11 अप्रैल को पत्नी और बेटी को लेने घर गया, क्योंकि उसकी पढ़ाई खराब हो रही थी। उसका सैनिक स्कूल में एडमीशन कराना था, मैंने उसकी कोचिंग के लिए 40 हजार रुपए क्रेडिट कार्ड से भरे। उसके अलावा साढ़े छह हजार की किताबें लाया था। मैं मानसिक रूप से परेशान था, कि मेरे बेटी के भविष्य का नुकसान हो रहा है। मैं 12 अप्रैल को पहुंचा तो ससुरालीजन अभद्र भाषा का प्रयोग करते रहे। मैंने अपनी पत्नी से पूछा कि तो उसने बताया कि गलती हो गई आप साढ़े छह बजे आ जाना मैं आपके साथ चल दूंगी। साढ़े छह बजे घर लेने पहुंचा, तो पता चला कि मामा का लड़का सुनील तिवारी पत्नी को लेकर अपने घर चला गया, मैने कई बार फोन किया, लेकिन उसने फोन नहीं उठाया। सुनील तिवारी ने मेरी जिंदगी में बहुत गलत रोल प्ले किया है। मेरा 8 साल का बेटा जब अपनी मां ने बात करने के लिए फोन करता था, तो वह बात नहीं करने देता था। मेरा बच्चा बात करने के लिए रोता रहा, मैंने सुनील तिवारी से कहा कि बोलो तो मैं तुम्हारे पैर छू लूं, आरती के मम्मी के पैर छू लूं, मेरा 8 साल का बेटा है जो कुछ खा पी नहीं रहा था। मेरी जिंदगी को खत्म करने में सुनील तिवारी का अहम रोल है। मैने रविवार को दोबारा फोन किया तो उसने कहा कि तुम्हारी पत्नी को गांव भेज दिया। कल शाम को मेरे बेटे अटल ने अपनी मां को फोन किया तो सुनील ने उठाया। बेटे ने मां से बात कराने की बात कही तो उसने मना कर दिया, उसने पूछा कि मां कब आएंगी, तो उसने कहा कि मुझे नहीं मालूम कब आएंगी। अब मेरी जीने की इच्छा खत्म हो गई है इन्होंने मेरी जिंदगी नरक कर दी, मेरी सामाजिक छवि खत्म हो गई। मैं अपने बच्चों की पढ़ाई की वजह से परेशान हूं। मुझे पता नहीं था कि क्या दुश्मनी ये लोग निकाल रहे, अब मेरी जीने की इच्छा खत्म हो गई, अब मैं माफी मांग रहा हूं सबसे… बेटे कार्तिक व अटल से माफी मांग रहा हूं कि बेटा मैं तुम्हारा साथ नहीं दे पाया, अपनी मां, चाचा, भाई से माफी मांग रहा। मेरे चाचा मेरे ले लिया झुक गए। अब मैं अपनी जान दे रहा हूं। योगी महाराज, यूपी पुलिस आप देखना, आप न्याय करना। मैं जा रहा हूं, मैं मरना नहीं चाहता था, अपने बच्चों के साथ बहुत कुछ करना चाहता था, लेकिन इस आदमी ने मुझे कहीं का नहीं छोड़ा। मेरी हाथ जोड़कर सबसे प्रार्थना है कि ऐसे लोगों का पर्दाफाश हो, मेरी मौत का जिम्मेदार सुनील तिवारी, पत्नी की मां मिथलेश कुमारी, विकास तिवारी, बहन अंजू और उसका पति है। अब मेरे पास कुछ नहीं बचा जिस पर मैं आत्महत्या कर रहा हूं।
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