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    यूक्रेन से लौटते ही मौत, क्या रूस ने दिया ट्रंप के करीबी सांसद को जहर?

    2 hours ago

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    लिंडसे ग्राहम सिर्फ ईरान की हिट लिस्ट पर ही नहीं थे बल्कि वह रूस के रडार पर भी थे। इसलिए एक थ्योरी यह भी दी जा रही है कि क्या उनकी हत्या के पीछे ईरान के साथ-साथ रूस का भी हाथ है? इस थ्योरी के पीछे तथ्य और दलीलें क्या दी जा रही है?  क्या रूस ने लिंडसेग्राहम की मौत की साजिश रची है? क्या रूसी एजेंट्स ने लिंड से ग्राहम को जहर देकर मार दिया? लिंडसे ग्राहम की मौत के पीछे का सस्पेंस जैसे-जैसे गहराता जा रहा है, वैसे-वैसे उनकी मौत के पीछे कई थ्योरी सामने आ रही हैं। ऐसी ही एक थ्योरी उनकी मौत को रूसी साजिश से जोड़ रही है। यह दावा सबसे पहले अमेरिकी खोजी पत्रकार लोरा लूमर ने किया। लोरा लूमन ने लिंड सेग्राहम की मौत के तुरंत बाद एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्या रूस ने लिंड सेग्राहम को जहर दे दिया। उन्होंने इस एंगल से जांच की मांग की है। इसे भी पढ़ें: अमेरिका ने बम से उड़ाया चीन-ईरान रेल ट्रैक, बीजिंग का भड़का गुस्सालिंटसे ग्राहम की मौत 12 जुलाई को हुई है। लेकिन इससे ठीक पहले वो यूक्रेन में थे। लिंडसे ने 10 जुलाई को कीव में यूक्रेन के राष्ट्रपति वदम जेलस्की के साथ बैठक की थी। लिंडसे ने यूक्रेन को अमेरिका के पूर्ण समर्थन की बात कही थी। साथ ही वो रूस पर नए प्रतिबंधों को लेकर लगातार ट्रंप के साथ चर्चा कर रहे थे। अपनी कीव यात्रा के दौरान लिंडसेग्राहम ने रूस पर नए प्रतिबंधों को लेकर क्या कहा था आपको वो सुनना चाहिए। लिंडसेग्राहम ने यह बयान दिया और उसके 48 घंटे के भीतर उनकी मौत हो। ब्लुमेंथल ने कहा कि ग्राहम अपनी मर्ज़ी से चलने वाले" इंसान थे और उन्हें मज़बूत इरादों वाला, बेहद जुनूनी और कभी-कभी अप्रत्याशित बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि दुख और अन्याय देखकर वे बहुत दयालु और सहानुभूति रखने वाले व्यक्ति बन जाते थे।" उन्होंने यह भी बताया कि वीकेंड पर उनकी ग्राहम से बात हुई थी और वे प्रतिबंधों के पैकेज को आगे बढ़ाने को लेकर बहुत उत्साहित" थे। ब्लुमेंथल ने कहा कि अब इस बिल को ग्राहम को सच्ची श्रद्धांजलि के तौर पर पास किया जाना चाहिए।इसे भी पढ़ें: ईरान के पास एटम से भी बड़ा बम, जनाजे में रूस ने किया 'धमाका'यूक्रेन के लिए ग्राहम की मौत एक राजनीतिक और व्यक्तिगत नुकसान है। जब अमेरिका के समर्थन को लेकर बहस तेज़ हो रही थी, तब भी वे कीव के मज़बूत समर्थक बने रहे; और अब यूक्रेनी नेताओं के सामने वॉशिंगटन में उस रिश्ते को बनाए रखने की चुनौती है, जबकि उनके सबसे भरोसेमंद समर्थकों में से एक अब उनके साथ नहीं हैं।
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