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    यूपी एटीएस का बड़ा खुलासा:पाकिस्तानी हैंडलर के इशारे पर चल रहा था आतंकी नेटवर्क, लखनऊ में बड़ी साजिश नाकाम

    14 hours ago

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    उत्तर प्रदेश एटीएस ने एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के निर्देश पर भारत में आगजनी और दहशत फैलाने की साजिश रच रहे थे। यह गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए न केवल विदेशी नंबरों से जुड़ा था, बल्कि देश के प्रतिष्ठित संस्थानों, रेलवे संपत्तियों और वाहनों को निशाना बनाने की योजना पर काम कर रहा था। समय रहते की गई कार्रवाई से लखनऊ में होने वाली एक बड़ी घटना टल गई। सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान और विदेशी नेटवर्क से जुड़ा था गिरोह एटीएस जांच में सामने आया कि गिरोह का मुख्य आरोपी साकिब उर्फ डेविल मेरठ के अगवानपुर गांव का रहने वाला है, जो सामान्य तौर पर नाई का काम करता था, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान के हैंडलर्स के संपर्क में आ गया। टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और सिग्नल जैसे प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से वह न केवल पाकिस्तानी नेटवर्क बल्कि कट्टरपंथी समूहों और अफगानिस्तान के कुछ संदिग्ध नंबरों से भी जुड़ा हुआ था। जांच एजेंसियों के अनुसार, इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल सुरक्षित और गुप्त बातचीत के लिए किया जा रहा था, जिससे देश विरोधी गतिविधियों की योजना बनाई जा सके और उसे अंजाम दिया जा सके। रेकी कर तैयार किए जा रहे थे टारगेट, कई शहरों में फैला नेटवर्क गिरोह का मुख्य उद्देश्य भारत में भय और अस्थिरता का माहौल पैदा करना था। इसके लिए आरोपी देश के प्रतिष्ठित संस्थानों, भीड़भाड़ वाले स्थानों, वाहनों और रेलवे सिग्नल बॉक्स की रेकी कर रहे थे। गाजियाबाद, अलीगढ़ और लखनऊ जैसे शहरों में कई जगहों की रेकी की गई थी। पाकिस्तानी हैंडलर्स द्वारा आरोपियों को गूगल लोकेशन भेजी जाती थी, जिसके आधार पर यह लोग मौके की जांच करते और पूरी जानकारी वीडियो के रूप में भेजते थे। आगजनी की घटनाएं कर भेजे जाते थे वीडियो, QR कोड से मिलती थी रकम पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य छोटी-छोटी आगजनी की घटनाओं को अंजाम देकर उसका वीडियो बनाते थे और उसे पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स को भेजते थे। इन वीडियो के जरिए वे अपने “काम” का सबूत देते थे। इसके बदले में उन्हें QR कोड के माध्यम से पैसे भेजे जाते थे। इस तरह यह नेटवर्क दहशत फैलाने के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी कमा रहा था। कट्टरपंथी विचारधारा से प्रेरित कर फैलाया जा रहा था आतंक जांच में यह भी खुलासा हुआ कि पाकिस्तानी हैंडलर्स आरोपियों को उकसाने के लिए कट्टरपंथी और आतंकी विचारधारा से जुड़े नामों और संगठनों का इस्तेमाल करते थे। टेलीग्राम और इंस्टाग्राम पर उन्हें ऐसे ग्रुप्स से जोड़ा गया था, जहां धर्म के आधार पर हिंसा और आगजनी के लिए प्रेरित किया जाता था। इनका मकसद समाज में भय, अविश्वास और सांप्रदायिक तनाव पैदा करना था, ताकि देश की आंतरिक शांति और सुरक्षा को नुकसान पहुंचाया जा सके। मुख्य आरोपी ने साथियों को जोड़कर तैयार किया पूरा नेटवर्क साकिब ने अपने गांव के ही अरबाब को इस नेटवर्क में शामिल किया। इसके बाद उसने सोशल मीडिया के जरिए गौतमबुद्ध नगर के रहने वाले विकास गहलावत उर्फ रौनक और लोकेश उर्फ पपला को भी गिरोह से जोड़ा। ये सभी आरोपी पैसों के लालच और कट्टरपंथी प्रभाव में आकर इस नेटवर्क का हिस्सा बने और अलग-अलग जगहों पर रेकी और अन्य गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। लखनऊ में रेलवे संपत्ति को निशाना बनाने की थी साजिश एटीएस के मुताबिक, 2 अप्रैल 2026 को गिरोह ने लखनऊ रेलवे स्टेशन के पास रेलवे सिग्नल बॉक्स और अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की योजना बनाई थी। इस साजिश का मकसद बड़ी दुर्घटना और जनहानि कराना था, जिससे व्यापक दहशत फैल सके। हालांकि, एटीएस को पहले ही इसकी सूचना मिल गई और टीम ने समय रहते कार्रवाई करते हुए आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया। चार आरोपी गिरफ्तार, ज्वलनशील पदार्थ और मोबाइल फोन बरामद कार्रवाई के दौरान एटीएस ने साकिब उर्फ डेविल, विकास गहलावत उर्फ रौनक, लोकेश उर्फ पपला पंडित और अरबाब को गिरफ्तार किया। इनके पास से एक ज्वलनशील पदार्थ से भरा कैन, सात मोबाइल फोन, 24 पंपलेट और आधार कार्ड बरामद किए गए हैं। बरामद मोबाइल फोन से कई अहम डिजिटल सबूत मिलने की संभावना है, जिनकी जांच की जा रही है। देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने की थी बड़ी साजिश जांच एजेंसियों का मानना है कि यह गिरोह भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से काम कर रहा था। रेलवे जैसे संवेदनशील ढांचे को निशाना बनाकर बड़ी दुर्घटना और जनहानि की योजना बनाई जा रही थी।
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