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    यूपी के निकायों में अवैध ठेकेदारी, भ्रष्ट भर्ती का आरोप:सफाई मजदूर संघ ने डीएम को दी शिकायत, बोले - नियमों की अनदेखी जारी

    6 hours ago

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    उत्तर प्रदेशीय सफाई मजदूर संघ ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। कहा कि मेरठ नगर निगम सहित उत्तर प्रदेश के अन्य स्थानीय निकायों में सफाई व्यवस्था से संबंधित अवैध ठेकेदारी, सफाई कर्मचारियों की भ्रष्ट तरीकों से भर्ती और शासनादेशों व उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय के आदेशों के निरंतर उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। संघ के अनुसार, सितंबर 2015 से मेरठ नगर निगम में ठेका श्रम (विनियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम, 1970 की धारा 7 और 12 का उल्लंघन करते हुए गैरकानूनी ठेकेदारी जारी है। इस दौरान ठेकेदार बदलते रहे हैं, लेकिन किसी के पास भी धारा 12 के तहत वैध लाइसेंस नहीं रहा। इसी तरह की अवैध ठेकेदारी प्रदेश के सभी स्थानीय निकायों में सफाई जैसी अनिवार्य सेवाओं में मनमाने ढंग से चल रही है। शिकायत में बताया गया है कि सफाईकर्मियों की भर्ती ठेकेदारों के नाम पर दिखाई जाती है, जबकि वास्तव में नगर आयुक्त, नगर स्वास्थ्य अधिकारी और अधिशासी अधिकारी जैसे प्रबंधकीय अधिकारी ही बाबुओं और बाहरी व्यक्तियों के माध्यम से भर्तियां करते हैं। इस प्रक्रिया में किसी भी नियम का पालन नहीं किया जाता, और यह स्थिति मेरठ सहित सभी स्थानीय निकायों में हैं। कर्मचारियों को बिना किसी प्रक्रिया के हटाया या निकाला भी जाता है, और उनके स्थान पर भ्रष्ट तरीकों से अन्य नाम जोड़कर नई भर्तियां दिखाई जाती हैं। इसमें भी कोई निर्धारित प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती। मेरठ नगर निगम में सितंबर 2015 में शुरू की, अवैध ठेकेदारी के लिए नगर निगम बोर्ड से कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था। आरोप है कि जालसाजी के अभिलेख तैयार कर अलकनंदा फर्म को पहला ठेकेदार अवैधानिक रूप से बनाया गया था। आज भी सफाई कर्मचारियों की भर्ती, सेवा समाप्ति और स्थानांतरण नगर निगम केअधिकारियों के मौखिक आदेशों पर होते हैं। अधिकांश निकायों में महिला अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव किया जाता है। उन्हें नई भर्तियों में आवेदन करने से हतोत्साहित किया जाता है, और यदि वे आवेदन करती भी हैं, तो उनकी भर्ती आसानी से नहीं की जाती। विशेष रूप से मेरठ नगर निगम में, आबादी और हेल्थ मैनुअल के अनुसार सफाई कर्मचारियों की भर्ती के लिए नए पद सृजित करने की कार्रवाई की आवश्यकता है।
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