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    यूपी में फर्जी अंकपत्र से शिक्षक भर्ती:लखनऊ के एंटी करप्शन कोर्ट ने दो दोषियों को सुनाई 3 साल की सजा

    18 hours ago

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    आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) की प्रभावी पैरवी के चलते फर्जी अंकपत्रों के आधार पर विशिष्ट बीटीसी में दाखिला लेकर सहायक अध्यापक की नौकरी पाने वाले आरोपी अशोक कुमार और आगरा विश्वविद्यालय के कर्मचारी रनवीर सिंह को विशेष न्यायालय ने तीन-तीन वर्ष के साधारण कारावास और कुल एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। फैसला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विशेष न्यायाधीश, सीबीआई (सेंट्रल) लखनऊ की अदालत ने सुनाया। फर्जी अंकपत्रों से हासिल की थी डिग्री और नौकरी जांच में सामने आया कि आगरा जनपद के ग्राम बीसलपुर, तहसील खैरागढ़ निवासी अशोक कुमार ने वर्ष 1988 में आगरा विश्वविद्यालय से बीए तृतीय श्रेणी में 352/800 अंक प्राप्त किए थे। इसके बाद वर्ष 1992 में वैष्णेय महाविद्यालय, आगरा से बीएड परीक्षा 482/800 अंकों के साथ उत्तीर्ण की थी। आरोप है कि वर्ष 2007 में विशिष्ट बीटीसी, डायट आगरा में दाखिला लेने के लिए अशोक कुमार ने बीए और बीएड के फर्जी अंकपत्र तैयार कराए। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसने विशिष्ट बीटीसी की डिग्री प्राप्त की और बाद में प्राथमिक विद्यालय नगला, चक्रपान (जनपद आगरा) में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति हासिल कर ली। विश्वविद्यालय कर्मचारी की मिलीभगत उजागर EOW की विशेष जांच टीम (SIT) की विवेचना में यह तथ्य प्रमाणित हुआ कि अशोक कुमार ने आगरा विश्वविद्यालय के कर्मचारी रनवीर सिंह तथा शैलेन्द्र गुप्ता के साथ मिलकर बीए और बीएड के फर्जी अंकपत्र तैयार कराए थे। इन्हीं जाली दस्तावेजों के आधार पर शिक्षक भर्ती में लाभ उठाया गया। जांच तत्कालीन निरीक्षक पूतान सिंह द्वारा संपादित की गई थी। अभियोजन पक्ष की ओर से ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी श्री लाल साहब सिंह ने प्रभावी पैरवी की। कुल 17 अभियोजन साक्षियों को न्यायालय में परीक्षित कराया गया। पैरोकार सुमित यादव ने समय से साक्षियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराई, जिससे मामले की सुनवाई सुचारु रूप से आगे बढ़ सकी। अदालत ने सुनाई 3 वर्ष की सजा व जुर्माना विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण, सीबीआई (सेंट्रल) लखनऊ रबीन्द्र कुमार द्विवेदी ने सुनवाई के बाद अभियुक्त अशोक कुमार और रनवीर सिंह को दोषी करार देते हुए तीन-तीन वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोनों पर कुल एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।
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