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    1 लाख 51 हजार रुपये की कुश्ती बराबरी पर छूटी:अयोध्या में वाराणसी, गोरखपुर, जौनपुर के पहलवानों ने की जोर आजमाईश

    2 hours ago

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    अयोध्या। रामनगरी में बुढ़वा मंगल के अवसर पर मंगलवार को भक्ति, परंपरा और कुश्ती की दमदार परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने प्रातःकाल पावन सरयू नदी में स्नान कर विभिन्न मंदिरों में पूजन-अर्चन किया, वहीं दूसरी ओर श्याम क्लब मैदान, अशर्फी भवन चौराहा स्थित कटरा स्कूल में आयोजित राज्यस्तरीय विराट दंगल में प्रदेश के नामी-गिरामी पहलवानों ने अपनी ताकत और दांव-पेंच का प्रदर्शन किया। होली के बाद पड़ने वाले पहले मंगलवार को मनाए जाने वाले बड़ा मंगल (बुढ़वा मंगल) के अवसर पर मातगैड़ स्थित मतगजेंद्र मंदिर पर पारंपरिक मेले का आयोजन भी हुआ, जहां दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने मतगजेंद्र भगवान के दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया। इसी अवसर पर आयोजित विराट दंगल का उद्घाटन कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि दंगल केवल खेल नहीं बल्कि हमारी परंपरा और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। वे इस खेल को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं उन्होंने जिला कुश्ती संघ के अध्यक्ष बाबा घनश्याम दास पहलवान की सराहना करते हुए कहा कि घनश्याम पहलवान दशकों से इस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। कुश्ती के प्रति उनका प्रेम और समर्पण यह दर्शाता है कि वे इस खेल को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने पहलवानों से अपील की कि वे खेल भावना के साथ अखाड़े में उतरें और कुश्ती की परंपरा को आगे बढ़ाएं। पहलवानों ने दमदार मुकाबले पेश किए दंगल के संयोजक घनश्याम पहलवान ने बताया कि वर्ष 1974 से लगातार बुढ़वा मंगल के अवसर पर इस विराट कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इस बार भी प्रदेश के कई जिलों से पहलवानों ने अखाड़े में जोर आजमाइश की। वाराणसी, गोरखपुर, जौनपुर, अंबेडकरनगर, गोंडा और अयोध्या के पहलवानों ने दमदार मुकाबले पेश किए। उन्होंने बताया कि दंगल की सबसे बड़ी कुश्ती 1 लाख 51 हजार रुपये की रही, जो कड़े मुकाबले के बाद बराबरी पर छूटी। कार्यक्रम के दौरान आए हुए सभी पहलवानों और अतिथियों का सम्मान भी किया गया। आयोजन समिति के प्रियेश दास ने कहा कि यह दंगल अयोध्या की पुरानी परंपरा है, जिसमें यहां के संत-महंत और स्थानीय लोग बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। उन्होंने सभी अतिथियों और पहलवानों का स्वागत करते हुए इस परंपरा को आगे भी जारी रखने का संकल्प दोहराया।दंगल में संत समाज और गणमान्य लोगों की भी बड़ी उपस्थिति रही। इस अवसर पर मैथिलीरमण शरण, जगद्गुरु कृपालु राम भूषण दास, डॉ जयरामदास, महंत गोविंद दास, महंत संजय दास, राजेश पहलवान तथा महंत राम कुमार दास सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।बुढ़वा मंगल के इस पावन अवसर पर एक ओर जहां श्रद्धालुओं ने भक्ति में डुबकी लगाई, वहीं अखाड़े में पहलवानों के दांव-पेंच और जोश ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। धार्मिक आस्था और पारंपरिक खेल के इस संगम ने अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत को एक बार फिर जीवंत कर दिया।
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