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    10 बीघे में फैक्ट्री, 5 कमरों में भरा था बारूद:सहारनपुर हादसे के प्रत्यक्षदर्शी बोले- ऐसा मंजर नहीं देखा, भागते नहीं तो जिंदा न होते

    3 hours ago

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    सहारनपुर में शुक्रवार शाम 5 बजे पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हो गया। हादसे के समय कुल 23 मजदूर काम कर रहे थे, जिनमें से 19 सुरक्षित बाहर आ गए। जबकि ठेकेदार दीपराज देवड़े (23) और संदीप (25) अंदर ही फंसे रहे गए बाद में उनकी मौत हो गई। वहीं राहुल उर्फ लालू, और आकाश रावत 2 अब भी लापता हैं। उनकी तलाश जारी है ये सभी मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के रहने वाले थे। धमाका इतना तेज था कि मरने वालों के शरीर के टुकड़े करीब 1 KM दूर तक बिखर गए। खेतों, पेड़ों और झाड़ियों में मानव शरीर के हिस्से मिले। पुलिस, फोरेंसिक विशेषज्ञ और स्वास्थ्य विभाग की टीम घंटों तक घटनास्थल पर बॉडी पार्ट्स तलाशती रही। कई स्थानों पर कपड़े, जूते और शरीर के टुकड़े अलग-अलग पड़े मिले। प्रशासन ने डीएनए टेस्ट के लिए सभी अवशेष सुरक्षित रखवाए हैं। दैनिक भास्कर की टीम जब घटनास्थल पहुंची तो फैक्ट्री का अधिकांश हिस्सा मलबे में तब्दील था। लोहे की टीनें कई मीटर दूर जाकर गिरी थीं। ईंटें और कंक्रीट खेतों तक बिखरे पड़े थे। पुलिस पूरे परिसर को घेरकर इंसानी अवशेष इकट्ठा कर रही थी। वहां काम कर रहे मजदूरों ने बताया- फैक्ट्री में शाम को अचानक तेज धमाके की आवाज सुनाई दी। ऊपर की ओर धुआं उठता दिखाई दिया। किसी को कुछ भी समझ में नहीं आया। लोग इधर भागने लगे। उस समय फैक्ट्री में काफी संख्या में मजदूर काम कर रहे थे। बाद में पता चला कि दो लोगों की मौत हो गई है। हमने पहले कभी ऐसा मंजर नहीं देखा। भागे नहीं होते तो आज जिंदा न होते। आइए अब हम आपको प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी हादसे की पूरी कहानी बताते हैं। पहले हादसे की 3 तस्वीरें देखिए… अब पढ़िए प्रत्यक्षदर्शियों ने जो कहा… तेज धमाका हुआ, धुंआ उठते देख भागने लगे, समझ में नहीं आया क्या हुआ फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर गोपाल ने बताया- वह मध्य प्रदेश का रहने वाला है। पटाखा फैक्ट्री में करीब 3 महीने से काम कर रहा है। हादसे के समय वह फैक्ट्री के एक हिस्से में काम कर रहा था। अचानक तेज धमाके की आवाज सुनाई दी। ऊपर की ओर धुआं उठता दिखाई दिया। इसके बाद सभी मजदूर अपनी जान बचाकर बाहर की ओर भागे। उस समय फैक्ट्री में काफी संख्या में मजदूर काम कर रहे थे, लेकिन उन्हें सही संख्या की जानकारी नहीं है। घटना के बाद पता चला कि दो लोगों की मौत हो गई है और कुछ मजदूर लापता बताए जा रहे हैं। ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा, सोच कर मन सिहर उठता है सूरज ने बताया कि वह मध्य प्रदेश के खंडवा का रहने वाला है। हादसे के समय वह फैक्ट्री के दूसरे हिस्से में काम कर रहा था, जबकि उसका भाई उस स्थान पर काम कर रहा था जहां विस्फोट हुआ। अचानक तेज धमाका हुआ और अफरा-तफरी मच गई। सभी मजदूर जान बचाकर बाहर भागे। हमने अपनी जिंदगी में ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा। घटना के बारे में सोचकर ही मन सिहर उठता है। अगर भागे नहीं होते तो आज जिंदा नहीं होते। अब सिलसिलेवार ढ़ंग से पढ़िए, स्थानीय लोगों ने क्या कुछ देखा पहले लगा गाड़ी का टायर फटा है, तभी इंसान का हाथ आकर गिरा फैक्ट्री के पास मौजूद स्थानीय निवासी मुबारक अली ने बताया- पहले लगा किसी गाड़ी का टायर फटा है। लेकिन अगले ही पल मेरी गाड़ी के सामने किसी इंसान का हाथ आकर गिरा। तब समझ आया कि बहुत बड़ा हादसा हुआ है। फैक्ट्री से धुएं का विशाल गुबार उठ रहा था और अंदर से लोग चीखते हुए बाहर भाग रहे थे। वहीं खुर्शीद अली ने बताया- धमाके की आवाज कई किलोमीटर तक सुनाई दी। मैं छत पर चढ़ा तो फैक्ट्री से काला धुआं उठता दिखा। जब मौके पर पहुंचा तो हर तरफ शरीर के टुकड़े बिखरे पड़े थे। ऐसा मंजर जिंदगी में कभी नहीं देखा। जबकि कुंडा बसी गांव के प्रधान सनव्वर का कहना है कि शाम करीब साढ़े चार बजे अचानक पूरा गांव हिल गया। लोग पहले समझ ही नहीं पाए कि हुआ क्या है। कुछ देर बाद फैक्ट्री से धुआं उठता दिखाई दिया। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचा। धमाके के बाद पुलिस, फायर ब्रिगेड, फोरेंसिक टीम और प्रशासनिक अधिकारी लगातार मलबा हटाकर लापता मजदूरों की तलाश में जुटे रहे। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए हैं। विस्फोटक विशेषज्ञों ने बारूद और अन्य सामग्री के नमूने भी लिए हैं। पुलिस पूरे परिसर को सील कर चुकी है। इन सवालों के जवाब तलाश रही पुलिस… 10 बीघे की फैक्ट्री के पांच कमरों में कैसे इतना बारुद रखा था गंगोह के कुंडाबसी स्थित पटाखा फैक्ट्री 10 बीघे में बनी है। कर्मचारियों और गांव वालों के अनुसार- परिसर में पांच अलग-अलग कमरे ऐसे थे, जहां भारी मात्रा में बारूद और तैयार पटाखों का स्टॉक रखा गया था। शुक्रवार शाम हुए विस्फोट के बाद पूरा परिसर मलबे में बदल गया। कई भवन पूरी तरह ध्वस्त हो गए और टीनशेड सैकड़ों मीटर दूर तक जा गिरे। अधिकारियों ने फैक्ट्री के रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और लाइसेंस से संबंधित दस्तावेज जब्त किए हैं। 100 मीटर दूर पर है घनी आबादी, कैसे मिला लायसेंस सबसे बड़ा सवाल इस हादसे के बाद फैक्ट्री के लाइसेंस पर उठ रहा है। 100 मीटर दूर घनी आबादी का गांव है, लेकिन फिर भी लाइसेंस दिया गया। जिस स्थान पर विस्फोट हुआ, वहां से कुंडा बसी गांव की दूरी महज 100 मीटर है। धमाका इतना तेज था कि गांव के घरों की दीवारें हिल गईं और लोग दहशत में घरों से बाहर निकल आए। प्रशासनिक दस्तावेज बताते हैं कि इस फैक्ट्री को 2023 में एलई-1 (LE-1) श्रेणी का लाइसेंस जारी किया गया था। इसके तहत एक समय में अधिकतम 15 किलोग्राम पटाखा या गनपाउडर निर्माण की अनुमति थी। लाइसेंस 31 मार्च 2028 तक वैध है। इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए अब विस्फोटक विशेषज्ञों और फोरेंसिक टीम ने जांच शुरू कर दी है। फैक्ट्री में क्षमता से अधिक विस्फोटक कब से रखी जा रही थी फैक्ट्री में क्षमता से अधिक विस्फोटक सामग्री रखी गई थी। सुरक्षा मानक पूरे नहीं थे। ऐसे अब सवाल ये उठ रहा है कि कब से यहां पर विस्फोटक सामग्री रखी जा रही थी। क्या गांव के लोगों को इसकी जानकारी नहीं थी। क्या कभी किसी ने इसकी शिकायत नहीं की। डीएम बोले- फैक्ट्री का लाइसेंस 2028 तक मान्य है डीएम अरविंद चौहान का कहना है कि फैक्ट्री का लाइसेंस 2028 तक मान्य है। हादसे के बाद फैक्ट्री को तत्काल सील कर दिया गया है। विस्फोटक विशेषज्ञों की टीम मौके से सैंपल लेकर जांच कर रही है। एसडीएम को जांच के निर्देश दिए गए हैं कि कहीं लाइसेंस की शर्तों या सुरक्षा मानकों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मृतकों के परिजनों को सूचना दे दी गई है तथा लापता मजदूरों की तलाश जारी है।
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