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    100 करोड़ का सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल धूल फांक रहा:सपा सरकार में बना था 300 बेड सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, 9 साल से मिल रही सिर्फ 'तारीख पर तारीख'

    9 hours ago

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    स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे करने वाली योगी सरकार बरेली में सपा शासनकाल में बने 300 बेड सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल को आज तक पूरी तरह शुरू नहीं करवा सकी है। प्रदेश में भाजपा सरकार के 9 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन इस अस्पताल के भाग्य में अब तक सिर्फ 'तारीख पर तारीख' ही आई है। पिछले 9 वर्षों से जनता को यही आश्वासन मिल रहा है कि इसे जल्द शुरू कर मेडिकल कॉलेज में तब्दील किया जाएगा। आखिर भारी भरकम बहुमत के बावजूद यह प्रोजेक्ट क्यों परवान नहीं चढ़ सका, आइए जानते हैं विस्तार से। अखिलेश सरकार का 'तोहफा' भाजपा राज में अधर में बरेली के खुर्रम गोटिया में समाजवादी पार्टी की सरकार ने शहर की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए गरीबों को एक बड़ा तोहफा दिया था। तत्कालीन अखिलेश सरकार ने यहाँ 300 बेड का सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल बनवाया। हालांकि, अस्पताल पूरी तरह क्रियाशील होने से पहले ही सरकार बदल गई और यूपी में सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। दुर्भाग्यवश, प्रचंड बहुमत होने के बावजूद आज तक यह अस्पताल अपनी पूर्ण क्षमता के साथ शुरू नहीं हो सका है। हॉस्पिटल की बदहाली की 3 तस्वीरें…. दिग्गज जनप्रतिनिधियों की फौज, फिर भी अस्पताल बेहाल बरेली में भाजपा की सिर्फ 'डबल इंजन' नहीं, बल्कि 'चार इंजन' वाली सरकार है। यहाँ केंद्र, प्रदेश, नगर निगम और जिला पंचायत, चारों स्तरों पर भाजपा का ही कब्जा है। जिले में भाजपा के 7 विधायक, सांसद, 3 एमएलसी, मेयर और जिला पंचायत अध्यक्ष जैसे कद्दावर नेता मौजूद हैं। इसके बावजूद जनप्रतिनिधियों की कथित सुस्ती के कारण यह महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र सफेद हाथी साबित हो रहा है। नेताओं के अपने निजी अस्पताल, क्या यही है अड़चन? शहर में चर्चा है कि सत्ताधारी दल के कई दिग्गजों के अपने निजी अस्पताल हैं। शहर विधानसभा से विधायक और यूपी सरकार में मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना पेशे से चिकित्सक हैं और उनका प्रेमनगर में निजी अस्पताल है। इसी तरह बिथरी चैनपुर के विधायक डॉ. राघवेंद्र शर्मा का बदायूं रोड पर और नवाबगंज विधायक डॉ. एमपी आर्या का भी अपना अस्पताल है। आंवला से विधायक और कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह के बेटे भी चिकित्सक हैं और उनका वहां बड़ा अस्पताल है। मेयर डॉ. उमेश गौतम का अपना मिशन हॉस्पिटल है। इसके अलावा भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ से जुड़े डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी, डॉ. विमल भारद्वाज और डॉ. विनोद पागरानी के भी शहर में बड़े निजी अस्पताल संचालित हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या निजी हितों के कारण ही सरकारी मेडिकल कॉलेज का सपना अधूरा है? यहाँ तक कि केंद्र का 'क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल' प्रोजेक्ट भी लखनऊ शिफ्ट हो गया। 100 करोड़ की लागत, पर जनता को नहीं मिला लाभ करीब 100 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस अस्पताल से बरेली सहित आसपास के कई जिलों के मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती थी। लेकिन प्रशासनिक अनदेखी के कारण यह प्रोजेक्ट आज भी अधूरा है। अब जनता सवाल पूछ रही है कि क्या इसी दिन के लिए उन्होंने भारी जनादेश दिया था? दुर्दशा: वेंटिलेटर फांक रहे धूल, टपक रही छत करीब एक दशक पहले बनकर तैयार हुई इस बिल्डिंग की हालत अब खस्ता होने लगी है। परिसर में बड़ी-बड़ी घास उग आई है और कई जगहों से लिंटर टपकने लगा है। करोड़ों के वेंटिलेटर और आधुनिक मशीनें बिना इस्तेमाल के खराब हो रही हैं। भारी दबाव के बाद यहाँ वर्तमान में सिर्फ ओपीडी संचालित की जा रही है, जो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। अब पीपीपी मोड पर चलाने की तैयारी संसाधनों की कमी को देखते हुए सरकार अब इस अस्पताल को पीपीपी (Public Private Partnership) मॉडल पर चलाने पर विचार कर रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद इसे 'सुपर स्पेशलिटी अस्पताल' के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव मांगा गया है। लगभग 200 डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को देखते हुए इसे निजी हाथों में सौंपने की कवायद चल रही है, ताकि मशीनों और बुनियादी ढांचे का उपयोग हो सके। बजट से फिर हाथ लगी निराशा योगी सरकार ने इस बार अपना अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश किया, लेकिन इस बजट में भी इस अस्पताल को लेकर कोई विशेष घोषणा नहीं हुई। स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि इस बार इसे मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए बजट आवंटित होगा, लेकिन यह उम्मीद भी टूट गई। बयान: "9 साल बीते, पर अब तक पदों का सृजन नहीं" "300 बेड सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के संबंध में शासन स्तर से कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी गई थीं, जिन्हें भेज दिया गया है। वर्तमान स्थिति यह है कि अस्पताल के लिए अभी तक न तो पदों का सृजन (Staff Sanction) हुआ है और न ही बजट का कोई विशेष प्रावधान किया गया है। वर्तमान में जनता की सुविधा को देखते हुए हमने स्थानीय स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था कर ओपीडी (OPD) शुरू करवा रखी है। उम्मीद है कि शासन स्तर पर इस दिशा में जल्द ही कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा।" - डॉ. विश्राम सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), बरेली सियासी हमला: "राजनीतिक द्वेष का शिकार हुआ 300 बेड अस्पताल" ​"अखिलेश यादव जी के नेतृत्व वाली समाजवादी सरकार ने बरेली को जो 300 बेड का 'मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल' तोहफे में दिया था, वह आज अपनी खासियत के आसपास भी नज़र नहीं आता। यह उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति घोर लापरवाही का जीता-जागता प्रमाण है। केवल राजनीतिक द्वेष और ईर्ष्या के कारण इस अस्पताल को पूरी तरह नहीं चलाया जा रहा है। अगर यह अस्पताल सुचारू रूप से शुरू हो जाए, तो बरेली और आसपास के पूरे मंडल को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मिल सकती हैं, लेकिन सरकार को जनता के स्वास्थ्य की फिक्र नहीं है।" ​- मयंक शुक्ला, वरिष्ठ सपा नेता
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