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    27 मार्च तक आवास विकास करेगा सेंट्रल मार्केट का सर्वे:सुप्रीम कोर्ट में देने होंगे ध्वस्तीकरण के साक्ष्य, व्यापारियों में बनी है असमंजस की स्थिति

    16 hours ago

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    मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में आवासीय प्लॉट में की जा रही कार्मशियल गतिविधियों को बंद कराते हुए सुप्रीम कोर्ट के ध्वस्तीकरण के आदेश से व्यापारियों में बेचैनी बढ़ती जा रही है। अपने प्रतिष्ठानों को बचाने के लिए व्यापारी हर संभव प्रयास कर रहे हैं लेकिन अभी तक भी उनको इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि उनके प्रतिष्ठान सुरक्षित हैं। 80 भू- खंड़ को मिला नोटिस आवास विकास की और से मार्केट के व्यापारियों को भू उपयोग बदलने के लिए शमन शुल्क जमा कर सेटबैक के तहत दुकानों को पीछे करने का भी नोटिस दिया है। इसके बाद भी अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है क्योंकि ध्वस्तीकरण का आदेश सुप्रीम कोर्ट का है। जनप्रतिनिधियों ने भी साधी चुप्पी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अवमानना से बचने के चलते कोई भी जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी व्यापारियों को अस बात से आश्वस्त नहीं कर पा रहा है कि सेटबैक के तहत दुकानों को करने के बाद उनके प्रतिष्ठान सुरक्षित हैं। 27 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में रखेंगे रिपोर्ट आवास एवं विकास परिषद हो या फिर प्रशासन, इस बात से पूरी तरह वाकिफ हैं कि अगर न्यायालय के आदेशों की अह्वेलना हुई तो खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। ऐसे में वह जरा भी राहत देने के मूड में नहीं हैं। आमत्यक्ष रूप्य से व्यय केवल इतनी है कि व्यापारी इस अवैध सिमीगणों को स्थत ध्यस्त कर लें साकि पीले पंजे की सौबत सा आए। राहत की बात यह है कि पहले आवास एवं विकास परिषद के अफसरों को 13 मार्च में कार्रवाई की रिपोर्ट के साथ जवाब दाखिल करुया था लेकिन अब 27 तारीख इसके लिए निर्धारित हुई है। पहले जानिए क्या है सेंट्रल मार्किट शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्किट में भूखंड संख्या 661/6 आवासीय भूखंड था। यह भूखंड वर्ष 1986 में काजीपुर निवासी वीर सिंह को आवंटित किया गया था।। 30 अगस्त, 1986 को उन्हें भूखंड का कब्जा दे दिया गया। 6 अक्टूबर, 1988 को फ्री होल्ड डीड जारी की गई, जिसमें साफ तौर पर उल्लेख किया गया था कि यह भूखंड आवासीय है। इसके कुछ समय बाद विनोद अरोड़ा नाम के व्यक्ति ने पावर ऑफ अटर्नी के माध्यम से इन संपत्तियों का नियंत्रण प्राप्त किया और वहां 22 दुकानों का निर्माण करा डाला। इसके बाद पूरा इलाका कमर्शियल एक्टिविटी से पटता चला गया। 30 साल से ज्यादा सालों से चल रहा प्रकरण सेंट्रल मार्किट के आवासीय प्लॉटों पर हुई व्यावसायिक गतिविधियों को शुरु से ही रुकवाने का प्रयास हुआ लेकिन आवास एवं विकास परिषद रुकवा पाने में नाकाम रहा। लगभग 30 साल बाद 17 दिसंबर, 2024 को लंबी लड़ाई के बाद कोर्ट ने 661/6 भूखंड व उसकी तर्ज पर बने निर्माणों को ध्वस्त करने के आदेश जारी कर दिए। तनाव बढ़ता चला गया और 25 अक्टूबर, 2025 को आवास एवं विकास परिषद ने पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर 22 दुकानों को ध्वस्त कर दिया। व्यापारियों ने स्वंय शुरू किया ध्वस्तीकरण बिना कुछ स्पष्ट हुए ध्वस्तीकरण को लेकर आ सही सुचनाओं और अफवाहों के बीच व्यापारियों की बेचैनी और भी बढ़ती जा रही है। व्यापारी खुद ही अवैध निर्माण गिरा रहे हैं। कुछ ने कमर्शियल गतिविधियों को बंद करने का ऐलान भी कर दिया है। आलम यह है कि दुकानों पर लगे बोर्ड हट गए हैं और आवास नंबर दर्शाने वाले बैनर चस्पा होते जा रहे हैं। इस बीच आवास एवं विकास परिषद की टीमें भी एक्टिव हो गई हैं जो घर घर जाकर सर्वे रिपोर्ट तैयार करेंगी। आवास एवं विकास परिषद के आधिशासी अभियंता अभिषेक राजा का कहना है कि यह सुप्रीम कोर्ट का आदेश है जो टल नहीं सकता। जहां तक ध्वस्तीकरणा की बात है तो व्यापारी स्वतः ध्वस्त करें। विभागीय टीम घर घर जाकर सर्वे रिपोर्ट तैयार करेगी और अब साक्ष्यों के साथ 27 मार्च में कोर्ट में दाखिल करेगी।
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