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    47-लाख बिजली उपभोक्ताओं का लोड बदलने पर कांग्रेस का सवाल:अजय राय ने स्मार्ट मीटर और नेट मीटरिंग पर भी उठाए सवाल

    3 hours ago

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    उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने प्रदेश में करीब 47 लाख बिजली उपभोक्ताओं के स्वीकृत बिजली भार (लोड) में किए गए बदलाव को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली और नेट मीटरिंग से जुड़ी शिकायतों को लेकर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखा। आरोप लगाया कि इसके चलते बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त स्थायी शुल्क, सुरक्षा जमा और अन्य वित्तीय देनदारियों का बोझ बढ़ा है, जिससे बिजली वितरण कंपनियां आर्थिक वसूली का माध्यम बना रही हैं। अजय राय ने कहा कि यदि इन मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो लाखों उपभोक्ताओं के आर्थिक और वैधानिक अधिकार प्रभावित होंगे। उन्होंने आयोग से पूरे मामले की तकनीकी, वित्तीय और नियामकीय स्तर पर स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। गरीबों पर सबसे अधिक मार कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने अपने पत्र में कहा कि यह समस्या केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। उद्योग, व्यापार, शिक्षण संस्थान, अस्पताल, डॉक्टर, इंजीनियर, पत्रकार, अधिवक्ता, सरकारी और गैर-सरकारी कर्मचारी, लघु उद्यमी, सेवा क्षेत्र से जुड़े लोग और यहां तक कि बिजली विभाग के कर्मचारी भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि बढ़ी हुई बिजली लागत का असर गरीब, निम्न और मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं पर सबसे अधिक पड़ेगा। स्मार्ट मीटर की जांच सार्वजनिक दायरे में लाएं उन्होंने आयोग से स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली, एल्गोरिदम आधारित निर्णय प्रक्रिया और उपभोक्ताओं का विद्युत भार तय करने के आधारों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। साथ ही कहा कि इन प्रक्रियाओं को सार्वजनिक परीक्षण के दायरे में लाया जाए ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। अजय राय ने नेट मीटरिंग व्यवस्था में आ रही व्यावहारिक समस्याओं के समाधान की भी मांग की। उन्होंने कहा कि यदि किसी उपभोक्ता से निर्धारित नियमों का पालन किए बिना अतिरिक्त आर्थिक भार या शुल्क वसूला गया है तो उसे राहत देने के लिए आयोग आवश्यक निर्देश जारी करे। कांग्रेस अध्यक्ष ने पत्र में कहा कि उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग विद्युत अधिनियम के तहत गठित एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था है, जिसकी प्राथमिक जिम्मेदारी उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और बिजली वितरण कंपनियों की जवाबदेही तय करना है। ऐसे में करोड़ों नागरिकों को प्रभावित करने वाले इस मुद्दे की समयबद्ध, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराना आयोग की संस्थागत जिम्मेदारी है।
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