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    5555 ‘ॐ’ की अनूठी चित्र-साधना से रचा इतिहास:यूरेशिया वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज,काशी की कुमारी स्वर्णा निगम ने किया कठिन परिश्रम

    7 hours ago

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    काशी की मेधावी छात्रा कुमारी स्वर्णा निगम ने 5555 अलग-अलग प्रकार के “ॐ” (ओंकार) के विशिष्ट चित्रों का सृजन कर इतिहास रच दिया है। पाणिनि कन्या महाविद्यालय (तुलसीपुर, महमूरगंज) की कक्षा 10वीं की छात्रा स्वर्णा की इस अद्वितीय कला-साधना को प्रतिष्ठित ‘यूरेशिया वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दर्ज किया गया है। यह उपलब्धि न केवल विद्यालय बल्कि संपूर्ण काशी और देश के लिए गौरव का विषय बन गई है। एक वर्ष की साधना का परिणाम यह उपलब्धि केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि लगातार एक वर्ष तक किए गए कठोर परिश्रम, अनुशासन और आध्यात्मिक एकाग्रता का परिणाम है। स्वर्णा द्वारा निर्मित 5555 “ॐ” चित्रों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रत्येक चित्र आकार, रंग-संयोजन, रेखांकन और भाव-अभिव्यक्ति में एक-दूसरे से पूर्णतः भिन्न है। इन चित्रों में सनातन परंपरा के मूल मंत्र “ॐ” की आध्यात्मिक ऊर्जा को सृजनात्मक रूप से उकेरा गया है। भव्य प्रदर्शनी एवं विमोचन समारोह इस ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में पाणिनि कन्या महाविद्यालय परिसर में भव्य प्रदर्शनी और विमोचन समारोह आयोजित किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुए इस गरिमामयी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम में वाराणसी संसदीय कार्यालय के समन्वयक शिव शरण पाठक, विश्व वैदिक न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सिंह, वरिष्ठ पर्यावरणविद् अनिल कुमार सिंह, ‘परिवार ब्रेड’ संस्था के प्रतिनिधि गोविंद किशनानी एवं राजेश भाटिया सहित चांदपुर औद्योगिक क्षेत्र के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि का उद्बोधन मुख्य अतिथि विश्व भूषण मिश्र ने कुमारी स्वर्णा को आशीर्वाद देते हुए कहा “5555 ‘ॐ’ की अलग-अलग कला-कृतियों का सृजन कर विश्व रिकॉर्ड स्थापित करना अत्यंत अद्भुत और दुर्लभ उपलब्धि है। इतनी विशाल संख्या में ‘ॐ’ को एक साथ देखना दिव्य अनुभूति प्रदान करता है। यह काशी के लिए एक शुभ और पुण्य क्षण है। स्वर्णा को मेरी हार्दिक बधाई।” गुरुकुल परंपरा की सशक्त अभिव्यक्ति महाविद्यालय की आचार्या नंदिता शास्त्री ने कहा कि गुरुकुल की शिक्षा पद्धति में संस्कृत और वेद अध्ययन के साथ कला, साधना और व्यक्तित्व विकास को समान महत्व दिया जाता है। उन्होंने बताया कि छात्राओं को सृजनात्मकता और सांस्कृतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता है। स्वर्णा की उपलब्धि इसी समग्र शिक्षा प्रणाली का परिणाम है।
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