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    आकाश आनंद को मायावती फिर BSP से निकाल सकती हैं:नेताओं से बोलीं- उन्हें अनफॉलो करें; छोटे भतीजे को संगठन समीक्षा का काम सौंपा

    18 hours ago

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    बसपा प्रमुख मायावती कभी भी अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से फिर बाहर कर सकती हैं। रविवार को मायावती और आकाश आनंद ने इस बात के संकेत खुद दिए। आकाश आनंद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना बायो (परिचय) बदल दिया। उन्होंने खुद को बसपा समर्थक लिखा। 4 दिन में यह दूसरा मौका है, जब आकाश ने अपना बायो बदला है। 3 सितंबर को लखनऊ बैठक में न बुलाए जाने पर उन्होंने बायो में बसपा कार्यकर्ता बताया था। उससे पहले वे बसपा के नेशनल कोआर्डिनेटर लिखा करते थे। इसे आकाश की पार्टी से दूरी बढ़ने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, आकाश को पार्टी से औपचारिक रूप से निष्कासित किए जाने की कोई स्पष्ट घोषणा सामने नहीं आई है। पार्टी सूत्रों की मानें तो मायावती कभी भी इसका ऐलान कर सकती हैं। इसके अलावा रविवार को तीन बड़े घटनाक्रम हुए। आकाश आनंद के 2 पोस्ट देखिए… पार्टी कार्यालय प्रभारी ने जिलाध्यक्षों से फोन पर बात की पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मायावती ने रविवार को सबसे पहले मेवालाल गौतम को बुलाया। मेवालाल से कहा- पार्टी के जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों से फोन पर बात करो। आकाश आनंद और अशोक सिद्धार्थ को सोशल मीडिया पर अनफॉलो करवाओ। मेवालाल लखनऊ पार्टी कार्यालय के प्रभारी हैं। मायावती के आंख-कान यही बताए जाते हैं। इस पूरे घटनाक्रम के पीछे सोशल मीडिया पर आकाश को लेकर चल रही गतिविधियां हैं। दिल्ली के यू-ट्यूबर समरराज के आकाश आनंद से जुड़े दो पोस्ट में से एक को अशोक सिद्धार्थ द्वारा री-ट्वीट किए जाने की बात सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, इसकी जानकारी सतीश चंद्र मिश्रा ने मायावती तक पहुंचाई। इसके बाद मायावती ने मेवालाल गौतम को दोनों नेताओं को अनफॉलो कराने के निर्देश दिए। भास्कर पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दे सकते हैं… सोशल मीडिया पर ‘उम्मीदों का आकाश’ ट्रेंड कराने से मायावती नाराज आकाश आनंद को लेकर बसपा कार्यकर्ताओं के एक वर्ग में नाराजगी की चर्चा है। सोशल मीडिया पर ‘उम्मीदों का आकाश’ जैसे शब्द ट्रेंड कर रहे हैं। आकाश के समर्थक उनके पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसे लेकर मायावती तक कुछ लोगों ने इस तरह पेश किया है कि अशोक सिद्धार्थ अपने दामाद आकाश के जरिए पार्टी पर कब्जा करना चाहते हैं। इसके बाद से ही मायावती एक–एक कर कई फैसले ले रही हैं। मायावती ने देश में पार्टी को तीन सेक्टरों में बांटा बसपा प्रमुख मायावती ने रविवार को संगठनात्मक ढांचे में भी बड़ा बदलाव किया। उन्होंने देश में पार्टी को तीन सेक्टर में बांटा है। इनमें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को अलग रखा गया है, जबकि बाकी राज्यों को दो बड़े सेक्टरों में बांटकर वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। राज्य : दिल्ली, हरियाणा, पंजाब/चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार व झारखंड। राज्य : पश्चिम बंगाल,ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल। रणधीर सिंह बेनीवाल को फिर पंजाब की जिम्मेदारी, हिमाचल भी मिला संगठनात्मक फेरबदल में रणधीर सिंह बेनीवाल की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। उन्हें सहारनपुर के साथ रामजी गौतम के साथ पंजाब की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा उन्हें हिमाचल प्रदेश की स्वतंत्र जिम्मेदारी भी दी गई है। इस बदलाव का एक राजनीतिक मतलब यह निकाला जा रहा है कि अशोक सिद्धार्थ के करीबी माने जाने वाले नितिन सिंह से हिमाचल की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। हालांकि, नितिन सिंह को पार्टी से बाहर किए जाने की कोई सूचना नहीं है। मायावती ने अचानक रामजी गौतम, आनंद कुमार और अतर सिंह को बुलाया इन बदलावों के बीच मायावती की सक्रियता भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि मायावती ने अचानक रविवार को अचानक रामजी गौतम, आनंद कुमार और अतर सिंह को बुलाया था। सतीश चंद्र मिश्रा भी वहां पहुंचे। इसके बाद नेताओं के साथ बैठक हुई। बैठक के बाद हुए इस तरह के संगठनात्मक आदेश जारी किए गए। 9 सितंबर को दिल्ली जाने का था कार्यक्रम, अब बदला समीकरण पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मायावती का 9 सितंबर को दिल्ली जाने का कार्यक्रम था। बताया गया था कि उन्होंने आकाश आनंद की पत्नी प्रज्ञा को लंदन से बुलाया था और आकाश की बेटी से मिलने की योजना थी। दिल्ली में ही मायावती ईशान आनंद को लेकर संगठनात्मक घोषणा करने वाली थी, लेकिन आकाश को लेकर किए गए निर्णय के बाद उन्होंने दिल्ली जाने का कार्यक्रम स्थगित कर दिया। यही कारण है कि ईशान को लेकर उन्होंने रविवार को ही फैसले ले लिए। क्या बसपा में अब आकाश की जगह उनके छोटे भाई ईशान लेंगे? बसपा में बदलाव की शुरुआत 3 सितंबर की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से ही दिखाई देने लगी थी। मायावती ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई थी। इसमें पहली बार उनके छोटे भतीजे और आनंद कुमार के छोटे बेटे ईशान (ईशू) आनंद भी पहुंचे थे। खास बात यह रही कि इस बैठक में आकाश आनंद को नहीं बुलाया गया। इसके बाद आकाश ने सोशल मीडिया बायो में बदलाव कर राष्ट्रीय समन्वयक पद से हटाए जाने का संकेत खुद दिया था। बसपा में यह पूरा घटनाक्रम सिर्फ संगठनात्मक फेरबदल नहीं माना जा रहा। इसके केंद्र में मायावती के बाद पार्टी की अगली पीढ़ी का नेतृत्व भी है। एक तरफ आकाश आनंद लंबे समय से पार्टी की युवा राजनीति का चेहरा रहे हैं। दूसरी तरफ अब ईशान आनंद को राष्ट्रीय स्तर पर संगठन की निगरानी का अधिकार दिया जाना बताता है कि मायावती ने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में ईशान की भूमिका बढ़ाई है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि ईशान को आकाश के विकल्प के तौर पर औपचारिक रूप से स्थापित कर दिया गया है। लेकिन आकाश से जुड़े लोगों की जिम्मेदारियों में बदलाव और ईशान को मिली नई भूमिका ने बसपा की अंदरूनी राजनीति में चर्चा जरूर तेज कर दी है। आकाश आनंद ने जेवर में पार्टी के अंदरूनी ढांचे पर उठाए थे सवाल आकाश आनंद ने 25 अगस्त को नोएडा के जेवर में कहा था कि उन्होंने अपने करियर को उसी दिन दांव पर लगा दिया था, जिस दिन उन्होंने ऐलान किया था कि सुधार करेंगे और अब सबकी सुनेंगे। उन्होंने कहा था- “हमारे कुछ पदाधिकारी हमें काम नहीं करने देते हैं। गलत लोग गलत जगह बैठे हुए हैं। बहुत सी ऐसी स्ट्रेटजी हैं, टेक्नोलॉजी हैं, जो हम अपनाना चाहते हैं, मगर कर नहीं पाते हैं, क्योंकि स्ट्रक्चर ऐसा बना है। वहां बैठे हुए लोग कुछ करने नहीं देना चाहते हैं, जिनको हम अभी छेड़ नहीं सकते हैं, जिनको हम अभी हिला नहीं सकते हैं।” आकाश आनंद ने उन्हें बड़ा बताते हुए और आदर देते हुए कोशिश करने की बात कही थी कि बिना छेड़े कुछ सुधार हो जाए। 31% वाली पार्टी को इसी स्ट्रक्चर ने 2024 में 9.4% पर पहुंचा दिया। यह 2022 में मिले 13% वाले सदमे से भी बड़ा सदमा था। VIDEO देखिए… मायावती ने एक महीने पहले आकाश के ससुर को पार्टी से निकाला था मायावती ने 2 अगस्त को ही आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से बाहर किया था। तब मायावती ने कहा था कि अशोक बार-बार चेतावनी देने के बाद भी नहीं सुधरे। अब इन्हें कभी पार्टी में वापस नहीं लेंगे। डेढ़ साल में यह दूसरा मौका था, जब मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निकाला। 12 फरवरी, 2025 को गुटबाजी करने पर भी अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से बाहर किया था। हालांकि, 6 महीने बाद सितंबर, 2025 में उनकी दोबारा पार्टी में वापसी हो गई थी। अशोक सिद्धार्थ के पास तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, गुजरात, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में बसपा की जिम्मेदारी थी। ……………………… ये खबर भी पढ़िए… विनोद तावड़े बोले- क्षेत्रीय अध्यक्ष लखनऊ में दिखाई न दें:विधानसभा क्षेत्रों का दौरा करें, भाजपा 2022 में हारी हुई सीटों पर पूरी ताकत लगाएगी भाजपा ने यूपी विधानसभा चुनाव के लिए कमर कस ली है। यूपी प्रभारी विनोद तावड़े लखनऊ के पार्टी कार्यालय में पहली बार पदाधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने चुनावी एजेंडा बताया और पदाधिकारियों से सुझाव लिए। पूरी खबर पढ़िए…
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