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    जमोहरा-गुलहरिया ग्रामपंचायतों में 43.63 लाख के घोटाले पर कार्रवाई ठप:सचिवों से मांगा था जवाब, एफआईआर की चेतावनी के बाद भी मामला ठंडे बस्ते में

    5 hours ago

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    संतकबीरनगर के मेंहदावल विकास खंड की जमोहरा और गुलहरिया ग्राम पंचायतों में 43.63 लाख रुपये के विकास कार्यों में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। इस मामले में डीपीआरओ ने एक माह पूर्व नोटिस जारी किया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। लोगों का आरोप है कि आर्थिक प्रभाव के कारण कार्रवाई धीमी पड़ गई है और वे डीपीआरओ की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। शिकायत मिलने और मौके पर जांच के बाद दोनों ग्राम पंचायतों के सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उनसे तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया था। संतोषजनक जवाब न मिलने पर एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी भी दी गई थी, लेकिन अब यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। डीपीआरओ अरुण कुमार ने तीन अगस्त को जमोहरा और गुलहरिया ग्राम पंचायतों का दौरा कर जांच की थी। जमोहरा में पंचायत भवन अधूरा मिला। इसमें खिड़की-दरवाजे नहीं लगे थे और बिजली व शौचालय का काम भी पूरा नहीं हुआ था। पंचायत सचिवालय भी चालू नहीं था। पंचायत सहायक ने बताया कि सचिवालय में फर्नीचर, लैपटॉप, इंटरनेट और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। जांच में सामने आया कि करीब 8.14 लाख रुपये का भुगतान बिना काम किए ही कर दिया गया था। सीसी रोड, इंटरलॉकिंग, हैंडपंप मरम्मत और रिबोर जैसे कई कामों पर 10.84 लाख रुपये का भुगतान दर्ज था, लेकिन ये काम मौके पर नहीं मिले। एक स्कूल में 15वें और पांचवें वित्त आयोग के पैसे से आरओ प्लांट और हाईमास्ट लाइटों पर नियमों के खिलाफ भुगतान पर भी जांच टीम ने आपत्ति जताई थी। गुलहरिया ग्राम पंचायत में भी विकास कार्यों की स्थिति ठीक नहीं मिली। जांच में साल 2025-26 के दौरान पांचवें और 15वें वित्त आयोग के 11.21 लाख रुपये से कराए गए नाला सफाई, सीसी रोड, अंडरग्राउंड नाली, स्ट्रीट लाइट और खड़ंजा मरम्मत जैसे कई कामों का सत्यापन किया गया था। कई कार्य मौके पर नहीं मिले। तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका, एस्टीमेट और स्वीकृति पत्र समेत जरूरी अभिलेख भी जांच टीम के सामने प्रस्तुत नहीं किए जा सके थे। इसके बावजूद अब तक सचिव, प्रधान और संबंधित फर्म के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होने से विभागीय कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। डीपीआरओ ने जमोहरा के सचिव सरमद खान और गुलहरिया के सचिव अवनीश गौड़ को नोटिस जारी कर तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा था। नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विभागीय कार्रवाई के साथ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इसके बावजूद अब तक सचिव, प्रधान और संबंधित फर्म के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होने से विभागीय कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। डीपीआरओ अरुण कुमार ने कहा भ्रष्टाचार बर्दाश्त नही की जाएगी, पूरे प्रकरण को दोबारा दिखवा रहा हूं।
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