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    अचानक भारत आ रहे नेपाल के प्रधानमंत्री, चीन के लिए बुरी खबर!

    22 hours ago

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    नेपाल में भीषण बाढ़ से मची तबाही के दौरान भारत ने जिस तरह से नेपाल की मदद की उसने दुनिया को एक बहुत बड़ा संदेश दिया। भले ही नेपाल की सरकार शुरू में मदद लेने के लिए अजीब तरह की हरकतें कर रही थी, लेकिन फिर भी भारत ने एक पड़ोसी होने के नाते अपना धर्म और कर्म दोनों निभाया। तमाम चुनौतियों के बावजूद भी अपनी जान पर खेलकर भारत की रेस्क्यू टीम मलवे में दबे लोगों को लगातार निकाल रही है। जरूरतमंद लोगों तक खाने-पीने की मदद पहुंचाई जा रही है। इसे भी पढ़ें: Nepal Floods: बाढ़ प्रभावित इलाकों में पत्रकारों के लिए सख्त Guidelines लागूभारत के इसी रूप को देखकर नेपाल के पीएम के सुर बदल गए हैं। जो कुछ दिनों पहले तक चीन से हाथ मिलाकर भारत के साथ संबंधों को खराब करने का संकेत दे रहे थे। अब वही बालेन शाह भारत के मुरीद हो गए हैं। यानी कि संकट की घड़ी में भारत जिस तरह से चट्टान की तरह नेपाल के साथ खड़ा हुआ उसने बालेन शाह का मन बदल दिया है। इसे भी पढ़ें: Nepal Flood: बाढ़ त्रासदी के 13वें दिन मनाया गया National Mourning Day, 1340 से अधिक मृतकों को श्रद्धांजलिअब उन्होंने बहुत बड़ा फैसला लिया है जो चीन को भी चौंका देगा। खबर है कि नेपाल के प्रधानमंत्री बालन शाह जल्द भारत के दौरे पर आ सकते हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली द्विपक्षीय विदेश यात्रा होगी। जिससे दोनों देशों के संबंधों में अहम बदलाव आ सकता है। बालेन शाह के न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होने के बाद भारत आने की उम्मीद है। कई रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि बालन शाह दशहरा से पहले भारत आ सकते हैं। बालन शाह या तो न्यूयॉर्क से सीधे भारत आ सकते हैं या नेपाल लौटने के बाद अलग यात्रा के रूप में दौरा कर सकते हैं। हाल ही में नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम ने कहा था कि प्रधानमंत्री के रूप में बालन शाह की पहली विदेश यात्रा भारत की होगी। दरअसल पारंपरिक रूप से नेपाल के प्रधानमंत्री अपनी पहली द्विपक्षी यात्रा के लिए भारत को ही चुनते हैं। इसे भी पढ़ें: नेपाल में बाढ़ का कोहराम: अमेरिकी सांसदों ने Marco Rubio से DART Team और राहत पैकेज की मांग कीहालांकि कई बार यह परंपरा टूटी भी है। खासतौर पर लिपुलेख, काला पानी जैसे मुद्दों को लेकर बालन शाह के बयानों ने इस दौरे को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी थी। नेपाल ने इन तीनों इलाकों को अपने आधिकारिक नक्शे में शामिल कर लिया था। जिसे डंके की चोट पर भारत ने खारिज कर दिया और कहा कि एक तरफा कारवाही से हकीकत नहीं बदलती। सीमा विवाद का मुद्दा दोनों देशों के बीच कुछ सालों में तनाव की अहम वजह बनकर उभरा है। हालांकि 26 अगस्त की भयावह बाढ़ ने हालात में काफी बदलाव किया है। क्योंकि आपदा के बाद भारत सबसे पहला मददगार बनकर खड़ा हुआ। 
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