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    ‘मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलाना नहीं’:जज रवि कुमार ने लिखा- बहुत दुखी और आहत हूं, शहजादी हत्याकांड में पति को फांसी दी

    4 hours ago

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    “मैं मरना पसंद करूंगा, लेकिन डरपोक जज कहलाना पसंद नहीं करूंगा।” यह टिप्पणी सोमवार को मुजफ्फरनगर में जज रवि कुमार दिवाकर ने शाहपुर शहजादी हत्याकांड में पति नदीम को फांसी की सजा सुनाते हुए अपने फैसले में लिखी। कोर्ट ने नदीम पर 1 लाख जुर्माना भी लगाया है। फैसले में रवि कुमार दिवाकर ने लिखा कि उनके माता-पिता ने उन्हें भगवान से डरने और किसी अन्य व्यक्ति से नहीं डरने की शिक्षा दी है। उन्होंने कहा कि यदि न्यायाधीश बाहुबलियों, माफिया या अपराधियों के दबाव में काम करने लगे तो जनता का न्यायपालिका पर भरोसा कमजोर होगा। पहले एक नजर में मामला समझिए… 23 जुलाई 2018 की रात लगभग 8:30 बजे नदीम ने अपनी पत्नी शहजादी के साथ मारपीट और गाली-गलौज की। उस पर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा दी। इलाज के दौरान 28 जुलाई 2018 को सफदरजंग अस्पताल, दिल्ली में शहजादी की मौत हो गई। शहजादी के माता-पिता और भाई कोर्ट में अपने बयानों से मुकर गए, लेकिन 24 जुलाई 2018 को सफदरजंग अस्पताल में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने दिया गया शहजादी का आखिरी बयान निर्णायक रहा। अपने बयान में शहजादी ने कहा था कि उसके पति नदीम ने ही उस पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगाई थी। अपर सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने सोमवार (7 सितंबर) को नदीम को फांसी की सजा सुनाई। शहजादी ने अपने बयान में दहेज की मांग या प्रताड़ना का कोई जिक्र नहीं किया था, इसलिए नदीम को दहेज हत्या के आरोपों से बरी कर दिया गया। मामले में आरोपी ननद सोनी को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। वहीं सास शमशीदा की मौत हो चुकी है। फैसले में लिखीं जज रवि कुमार दिवाकर की मुख्य बातें… "मैं मरना पंसद करूंगा, डरपोक जज कहलवाना नही पसंद करूंगा।" जब तक मैं अपने सिद्धान्तों पर चल सकता हूं। तब तक सर्विस करूंगा अन्यथा त्यागपत्र दे दूंगा। जब तक मैं जज की कुर्सी पर हूं तो फैसला/निर्णय लेने का अधिकार भी एकमात्र मेरा ही होगा।" मुझे मेरे माता-पिता ने शुरू से यह शिक्षा दी है कि सदैव भगवान से डरो और अन्य किसी व्यक्ति से नहीं। अगर मैं किसी और से डरूंगा तो आम जनता का भरोसा कोर्ट से उठ जाएगा। अगर मैं माफियाओं से डरता हूं तो मेरे लिये यह उचित होगा कि मैं इस पवित्र न्यायिक संस्था से त्यागपत्र दे दूं। मुजफ्फरनगर में भरी अदालत में विक्की त्यागी की हत्या कर दी गयी थी, जिससे यह समझा जा सकता है कि यहां अपराधियों को कानून का कोई डर नही था। कोर्ट में भी अपराधी मुकदमे लेट करवाते थे। देरी का कारण जिले में तमाम गैंगस्टरों और माफियाओं का आतंक भी था। एक समय शौकीन गैंग का आतंक हुआ करता था। हाल ही में इसी कोर्ट ने शौकीन के भाई शाहनवाज को फांसी की सजा दी गयी है। ज्ञानवापी मामले के बाद अंर्तराष्ट्रीय स्तर से मिली धमकी ज्ञानवापी मामले के बाद मुझे और परिवारवालों को कई बार जान से मारने की धमकी मिल चुकी है। यह धमकी अंर्तराष्ट्रीय स्तर से भी दी गई। आरोपी अदनान खान ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर रवि कुमार दिवाकर को यह धमकी दी थी कि काफिर का खून तुम्हारे लिए हलाल है, जो तुम्हारे दीन के खिलाफ लड़ रहे हैं। रवि कुमार दिवाकर की फोटो लगाकर उनकी आंखों के ऊपर लाल रंग से काफिर लिखा गया था। इस्लामिक कट्टरपंथी शक्तियों के द्वारा धर्म विशेष के लोगों का ब्रेन वॉश करके मेरे व मेरे परिवार की हत्या के लिए उकसाया जा रहा है। मुझे काफिर घोषित कर, मेरे व मेरे परिवार की हत्या करने के लिये षडयंत्र रचा जा रहा है। इन सबके बावजूद स्थानीय पुलिस के द्वारा सुरक्षा में बराबर लापरवाही बरती जा रही है। पुलिस अधिकारियों को लगता है कि वह सुरक्षा देकर कोई एहसान कर रहे हैं। लिखा- व्यवहार से बहुत आहत और दुखी वर्तमान समय में मैं कुछ व्यवहार से बहुत आहत और दुःखी हूं। अपने व्यक्तिगत विचार भी व्यक्त करने से अपने आपको नही रोक पा रहा हूं। पता नहीं जिन लोगों ने मेरे साथ यह व्यवहार किया है वह भगवान में विश्वास करते हैं या नहीं, लेकिन जो व्यवहार उन्होंने मेरे साथ किया है, जब वह अपनी अंतरात्मा में झाकेगें तो अपने आपको कभी माफ नही कर पाएंगें। कोई व्यक्ति दुनिया को बेवकूफ बना सकता है, लेकिन अपनी अंतरात्मा को बेवकूफ नही बना सकता। ऐसा व्यवहार करने का कारण माफियाओं/गैंगस्टरों/अपराधियों को बचाना है। ऐसा क्यों हुआ, इसकी संपूर्ण जानकारी मुझे है, लेकिन इस वक्त बोलना ठीक नही होगा, क्योंकि पद की भी मर्यादा होती है।" मुझे पश्चिम के एक गैंगस्टर ने मैसेज भेजा था कि अभी तो सिर्फ पत्रावलियों को ही हटवाया गया है। अगर हमारे पीछे पड़े तो कोर्ट चेंज करवा देगें। जिले से बाहर ट्रांसफर करवा देगें, क्योंकि हमारी पहुंच ऊपर तक है। किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिये यह एक गंभीर संकट होता है जब न्यायाधीश माफियाओं/गैंगस्टरों/अपराधियों के डर, दबाव या प्रभाव में न्याय करने में असमर्थ होते है। 29 नवंबर 2025 को संभाला था कार्यभार न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर का मुजफ्फरनगर का कार्यकाल खासा महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने 17 साल की न्यायिक सेवा में 35 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। इनमें से मुजफ्फरनगर में करीब 9 महीने के कार्यकाल के दौरान 9 गंभीर हत्याकांडों में 23 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई। रवि कुमार दिवाकर ने 29 नवंबर 2025 को मुजफ्फरनगर में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 का कार्यभार संभाला था। मुजफ्फरनगर में दी गई फांसी की सजा… अधिवक्ता समीर सैफी हत्याकांड में तीन को मृत्युदंड 15 अक्टूबर 2019 को शहर कोतवाली क्षेत्र में 40 लाख रुपये के लेन-देन के विवाद में अधिवक्ता समीर सैफी की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अदालत ने 6 अप्रैल 2026 को फैसला सुनाते हुए सिंगोल अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान और शालू उर्फ अरबाज को मृत्युदंड की सजा सुनाई। शेखर हत्याकांड में चार दोषियों को फांसी भौराकलां क्षेत्र के सिसौली निवासी शेखर की वर्ष 2019 में 70 हजार रुपये के लेन-देन के विवाद में हत्या कर दी गई थी। मामले की सुनवाई के बाद 28 अप्रैल 2026 को अदालत ने मुकेश, प्रदीप, संदीप और सोनू को मृत्युदंड की सजा सुनाई। महिला और छह वर्षीय बच्चे की हत्या में भी सख्त फैसला चरथावल क्षेत्र में वर्ष 2011 में राजेश देवी और उनके छह वर्षीय बेटे हिमांशु की हत्या का मामला भी बेहद गंभीर मामलों में शामिल रहा। मामले में दोषी रईस उर्फ रहीस (निवासी बरेली) को अदालत ने 30 मई 2026 को मृत्युदंड की सजा सुनाई। मां और मासूम बच्चे की हत्या से जुड़े इस मामले में अदालत के फैसले को बेहद महत्वपूर्ण माना गया। राजेंद्र सैनी की हत्या और शव जलाने के मामले में दो को फांसी गांव ककरौली निवासी राजेंद्र सैनी की वर्ष 2018 में हत्या कर शव जलाने के मामले में अदालत ने 20 जून 2026 को रामकरण उर्फ सावन गिरी और गजेंद्र उर्फ गीलू को मृत्युदंड की सजा सुनाई। ड्यूटी के दौरान होमगार्ड रतिराम की हत्या में दीपक को मृत्युदंड शहर कोतवाली क्षेत्र के बुढ़ाना मोड़ पर वर्ष 2020 में गश्त के दौरान होमगार्ड रतिराम की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अदालत ने 2 जुलाई 2026 को दोषी दीपक को मृत्युदंड की सजा सुनाई। कुड़ाना के किसान राज सिंह हत्याकांड में चार को फांसी शामली जनपद के कुड़ाना गांव के जंगल में 11 अगस्त 2011 को किसान राज सिंह की हत्या हुई थी। मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद 17 जुलाई 2026 को अदालत ने सुनील, अनिल, अजीत और सूरज उर्फ काला को मृत्युदंड की सजा सुनाई। सालिम हत्याकांड में शाहनवाज को मृत्युदंड छपार क्षेत्र के तेजलहेड़ा में लकड़ी ठेकेदार सालिम की हत्या के मामले में 12 अगस्त 2026 को दोषी शाहनवाज को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। इसके अगले ही दिन 13 अगस्त 2026 को शामली के भभीसा गांव में हुए पवन हत्याकांड में चार दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। 7 सितंबर को शहजादी हत्याकांड में पति नदीम को फांसी देने के साथ ही यह संख्या 23 तक पहुंच गई है। 17 साल में 36 दोषियों को मृत्युदंड न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने वर्ष 2009 में न्यायिक सेवा शुरू की थी। मुजफ्फरनगर से पहले संभल और बरेली में तैनाती के दौरान हत्या के विभिन्न मामलों में उन्होंने 13 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। मुजफ्फरनगर में 23 दोषियों को मृत्युदंड दिए जाने के बाद उनके न्यायिक करियर में यह आंकड़ा 36 तक पहुंच गया है। ज्ञानवापी और संभल सर्वे के आदेशों से भी रहे चर्चा में न्यायिक सेवा के दौरान रवि कुमार दिवाकर कई महत्वपूर्ण आदेशों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे हैं। वाराणसी (वाराणसी/ज्ञानवापी संदर्भ) में तैनाती के दौरान ज्ञानवापी परिसर के सर्वेक्षण से जुड़े आदेश के कारण उनका नाम सुर्खियों में आया था। इसके अलावा संभल में जामा मस्जिद के सर्वे से जुड़े मामले में भी उनके आदेश की काफी चर्चा हुई थी। ----------------- यह खबर भी पढ़ें… डॉक्टर से 4 लाख वसूले, थानेदार ने जान दी:बस्ती की ब्लैकमेलर महिला ने प्रेमी को भी नहीं छोड़ा; मां बोली- सजा मिले “बेटी दोषी है तो उसे सजा मिले, लेकिन मेरे पति निर्दोष हैं। जो वकील है, उसी ने प्रियंका से सब कुछ कराया। हम बस यही चाहते हैं कि हमारे पति को छुड़वा दीजिए।” ये शब्द हैं प्रियंका चौधरी की मां सुभावती चौधरी के। उनकी बेटी पर ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोप हैं। बस्ती में तैनात थानेदार सूर्य प्रकाश सिंह ने इसी मामले से परेशान होकर 29 अगस्त को आत्महत्या कर ली थी। पढ़ें पूरी खबर…
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