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    AI को जिस दिशा में लेकर जाएंगे, वैसा ही हमारा भविष्य होगा, इंपैक्ट समिट में बोले पीएम मोदी

    3 hours from now

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में अपने मुख्य भाषण में एआई और इसके प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए भारत के इस दृष्टिकोण को रेखांकित किया कि वह इस तकनीक को अपने सभी नागरिकों के लिए सुलभ बनाएगा। उन्होंने कहा कि विश्व के सबसे ऐतिहासिक एआई शिखर सम्मेलन में आप सभी का स्वागत है। भारत विश्व के सबसे बड़े तकनीकी केंद्र में स्थित है। वैश्विक दक्षिण के लिए यह गर्व की बात है कि एआई शिखर सम्मेलन का आयोजन भारत में हो रहा है। जब पहली बार वायरलेस तरीके से सिग्नल भेजे गए थे, तब किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन पूरी दुनिया वास्तविक समय में जुड़ जाएगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव इतिहास का एक ऐसा रूपांतरण है। आज हम जो देख रहे हैं, जो भविष्यवाणी कर रहे हैं, वह तो इसके प्रभाव की मात्र शुरुआत है।इसे भी पढ़ें: भारत नई टेक्नोलॉजी बनाता भी है और उसे अपनाता भी है, AI समिट में बोले PM मोदीप्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एआई को लाभकारी दृष्टि से देखता है और इसीलिए हमने 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' को अपना विषय चुना है। एआई को सभी के लिए, विशेषकर वैश्विक दक्षिण के लिए, लोकतांत्रिक बनाना आवश्यक है। एआई मशीनों को बुद्धिमान बना रहा है, लेकिन इससे भी बढ़कर, यह मानवीय क्षमताओं को कई गुना बढ़ा रहा है। केवल एक ही अंतर है: इस बार गति अभूतपूर्व है और इसका पैमाना भी अप्रत्याशित है। पहले, प्रौद्योगिकी का प्रभाव दिखने में दशकों लग जाते थे। आज, मशीन लर्निंग से लेकर लर्निंग मशीनों तक का सफर पहले से कहीं अधिक तेज, गहरा और व्यापक है।इसे भी पढ़ें: AI Impact Summit: शानदार देश में वापस आकर बहुत अच्छा लग रहा, एआई इम्पैक्ट समिट में बोले मैक्रोंप्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि स्वायत्त बुद्धिमत्ता का उपयोग करके एक बेहतर राष्ट्र का निर्माण कैसे किया जा सकता है और कहा कि वर्तमान में हम बुद्धिमत्ता का उपयोग किस प्रकार कर सकते हैं, इसे समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है।उन्होंने कहा, "हमें एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाना होगा और उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी निभानी होगी। वर्तमान पीढ़ी के साथ-साथ हमें इस बात की भी चिंता करनी होगी कि हम आने वाली पीढ़ियों को बुद्धिमत्ता का कौन सा स्वरूप सौंपेंगे। इसलिए, आज का असली सवाल यह नहीं है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भविष्य में क्या कर सकती है। सवाल यह है कि हम वर्तमान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कैसे करें? ऐसे सवाल मानवता के सामने पहले भी आ चुके हैं। इसका सबसे सशक्त उदाहरण परमाणु ऊर्जा है। हमने इसका विनाश भी देखा है और इसके सकारात्मक योगदान भी देखे हैं। प्रधानमंत्री ने अपने दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा कि सभी के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए बुद्धिमत्ता को मानव-केंद्रित बनाना अनिवार्य है।
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