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    AI से पढ़ाई आसान, लेकिन छात्रों की सोच पर असर:मेरठ में टीचर्स डे पर शिक्षक बोले- तकनीक का इस्तेमाल करें, उस पर निर्भर न हों

    4 hours ago

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    बदलती तकनीक के साथ छात्रों की पढ़ाई का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। AI ने कुछ ही सेकंड में नोट्स, जवाब और रिसर्च उपलब्ध कराना आसान कर दिया है। वहीं, शिक्षकों के सामने छात्रों की सोचने की क्षमता को बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। शिक्षक दिवस के मौके पर शिक्षकों ने बताया कि आज के छात्र तकनीक के मामले में पहले से कहीं ज्यादा आगे हैं, लेकिन कई मामलों में वे खुद सोचने के बजाय AI पर निर्भर होते जा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि AI का इस्तेमाल गलत नहीं है, लेकिन इसका इस्तेमाल अपनी सोच और समझ की जगह नहीं होना चाहिए। विभोर गौड़ ने कहा- छात्र अपने विचारों पर भरोसा करने के बजाय AI से जवाब लेने लगे हैं पत्रकारिता के शिक्षक विभोर गौड़ ने बताया कि पहले मोबाइल नंबर से लेकर पहाड़े तक याद रखना जरूरी होता था। धीरे-धीरे कैलकुलेटर और मोबाइल के इस्तेमाल से चीजों को याद रखने की जरूरत कम हुई। अब AI ने छात्रों के सोचने के तरीके को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चिंता यह है कि छात्र अपने नए विचारों पर भरोसा करने के बजाय सीधे AI से जवाब लेने लगे हैं। यहां तक कि जब छात्रों से उनके ख्वाब और सपनों के बारे में लिखने को कहा गया, तो कुछ छात्रों ने उसके लिए भी AI की मदद ली। विभोर गौड़ का कहना है कि AI का इस्तेमाल जरूर होना चाहिए, लेकिन छात्रों को अपनी सोच और फील्ड वर्क को नहीं छोड़ना चाहिए। AI के कारण टैलेंट के सामने एक नई चुनौती भी खड़ी हुई है। जो छात्र खुद सोचकर लिखते हैं, उन्हें कई बार उन छात्रों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है, जो AI की मदद से बेहतर भाषा और प्रस्तुति तैयार कर लेते हैं। प्रोफेसर तनु शर्मा बोलीं- क्लास में मोबाइल पर रोक से छात्रों की सोचने की क्षमता बढ़ेगी प्रोफेसर तनु शर्मा ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या यह देखने को मिल रही है कि छात्र खुद सोचने की आदत खोते जा रहे हैं। ग्रेजुएशन के शुरुआती साल में पहुंचने वाले कई छात्रों को भी कई बुनियादी चीजों की जानकारी नहीं होती। उनका मानना है कि AI पर अत्यधिक निर्भरता इसका एक बड़ा कारण है। उन्होंने सुझाव दिया कि क्लास में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सकती है। शुरुआत में छात्रों को परेशानी होगी, लेकिन धीरे-धीरे वे बिना मोबाइल के सोचने और काम करने के आदी हो सकते हैं। डॉ. प्रियंका राणा बोलीं- छात्रों को लगता है कि उन्हें शिक्षक से ज्यादा जानकारी है एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रियंका राणा ने बताया कि आज के छात्र काफी प्रैक्टिकल हैं और तकनीक का बेहतर इस्तेमाल करना जानते हैं। हालांकि, क्लासरूम में इससे एक नई चुनौती भी सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि कई छात्रों को लगता है कि उन्हें शिक्षक से ज्यादा जानकारी है, क्योंकि वे ChatGPT और दूसरे AI प्लेटफॉर्म से तुरंत जवाब और नोट्स तैयार कर लेते हैं। डॉ. प्रियंका राणा ने कहा कि AI से मिलने वाले जवाब हमेशा पूरी तरह सही हों, यह जरूरी नहीं है। शिक्षक अपने अनुभव और वास्तविक उदाहरणों के जरिए किसी विषय को जिस तरह समझाते हैं, वह AI से अलग है। इसलिए छात्रों को अपने शिक्षकों पर भरोसा रखना चाहिए और AI को केवल सहायक माध्यम के तौर पर इस्तेमाल करना चाहिए।
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