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    अखिलेश बोले- बीजेपी आपके संपर्क में है या नहीं?:केशव मौर्य पर किया पलटवार; कहा- आप मेन लाइन में हैं या साइड लाइन

    18 hours ago

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    सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने डिप्टी सीएम केशव मौर्य पर पलटवार किया। कहा कि बीजेपी उनके संपर्क में है या नहीं? अखिलेश यादव का यह बयान केशव मौर्य के तंज के बाद आया है। केशव ने दावा किया था कि सपा के विधायक उनके संपर्क में हैं। पहले पढ़िए अखिलेश यादव ने क्या कहा अखिलेश यादव ने रविवार को सोशल मीडिया X पर पोस्ट किया। लिखा- पहले ये बताएं कि बीजेपी आपके संपर्क में है या नहीं। आप मेन लाइन में हैं या साइड लाइन हैं या आउट ऑफ लाइन हैं? अखिलेश यादव और केशव यादव के बीच बयानों का ये दौर नया नहीं है। इससे पहले भी दोनों नेता कई बार एक दूसरे पर तंज कसते रहे हैं। हाल ही में बीते बिहार चुनाव के प्रचार के दौरान पटना एयरपोर्ट पर दोनों नेताओं का आमना सामना भी हुआ था। उस समय अखिलेश यादव ने कहा था कि केशव ने मिठाई खिलाने का वादा किया है। परिणाम आने के बाद केशव मौर्य ने कहा कि हम मिठाई के साथ अखिलेश यादव का इंतजार कर रहे हैं। वो आ ही नहीं रहे हैं मिठाई खाने। इसके अलावा भी अखिलेश यादव और केशव मौर्य के बीच सोशल मीडिया साइट एक्स पर समय समय पर आरोप प्रत्यारोप और एक दूसरे पर तंज चलता रहता है। जैसे अयोध्या के पोस्टर से केशव की तस्वीर गायब होने को लेकर अखिलेश यादव ने तंज किया था। इसी तरह केशव भी समय समय पर अखिलेश यादव को हताश और समाजवादी पार्टी को समाप्तवादी पार्टी बताते रहे हैं। अब पढ़िए केशव ने क्या कहा था आगरा में शुक्रवार (9 जनवरी) को डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने सपा को लेकर बयान दिया था। कहा था- सपा के कई विधायक हमारे संपर्क में हैं। वे भाजपा में शामिल होना चाहते हैं, लेकिन पार्टी उन्हें लेना नहीं चाहती। जब से अखिलेश यादव बिहार में चुनाव हारकर लौटे हैं, तभी से बौखलाए और घबराए हुए हैं। वे मुंगेरी लाल के हसीन सपने देख रहे हैं कि 2027 में सरकार बना लेंगे और समाज को बांटकर राज करेंगे। दरअसल, कुछ दिन पहले ब्राह्मण विधायकों की बैठकर पर शिवपाल ने कहा था- हमारे साथ आ जाइए, सम्मान मिलेगा। सपा के इसी बयान पर केशव मौर्य ने पलटवार किया है। केशव प्रसाद मौर्य ने कहा था- झूठ फैलाकर सपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में कुछ सीटें जरूर हासिल कर ली थीं। उस भ्रम को हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली और बिहार की जनता ने नकार दिया। देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ है, देश भाजपा के साथ था और देश आज भी भाजपा के साथ है। PDA का फुल फॉर्म समझाया था- PDA का मतलब परिवार डवलपमेंट एजेंसी है और अब इसकी हवा निकल चुकी है। सपा पीडीए को लेकर बिहार चुनाव में गई थी, लेकिन वहां उनका कोई प्रत्याशी तक नहीं था। अखिलेश वहां बेगानी शादी में अब्दुल्ला की तरह पहुंच गए। अखिलेश यादव का कोई ठिकाना नहीं है, वे आज कुछ बोलते हैं और कल कुछ और। अखिलेश यादव का काम गुंडों और माफियाओं को बढ़ावा देना रहा है और यही उनका एकमात्र एजेंडा है। लोकसभा चुनाव के बाद तेज हुए हमले जानकारों का मानना है, लोकसभा चुनाव में अखिलेश का PDA का फॉर्मूला सफल रहा है। सपा के 37 सांसदों में से 23 पिछड़े वर्ग से हैं। इनमें 7 कुर्मी, 6 यादव, 2 मौर्य-कुशवाहा, 2 निषाद, लोधी, शाक्य और राजभर समाज से एक-एक सांसद है। भाजपा के 33 में से मात्र 9 सांसद पिछड़े वर्ग के हैं। उसके बाद से अखिलेश ने केशव पर हमले तेज कर दिए हैं। अखिलेश कभी उन्हें 'दिल्ली का मोहरा' बताते हैं, तो कभी 'सौ लाओ सरकार बनाओ' का ऑफर देते हैं। अब अखिलेश बताने की कोशिश कर रहे हैं कि पिछड़े वर्ग में केशव की कोई लोकप्रियता नहीं। सपा के राजनीतिक गुलदस्ते में पिछड़े वर्ग की सभी प्रमुख जातियों के सांसद और विधायक हैं। इसके पहले सपा सिराथू से मैसेज दे चुकी है। सपा प्रत्याशी पल्लवी पटेल ने विधानसभा चुनाव- 2022 में सिराथू से भाजपा प्रत्याशी और तत्कालीन डिप्टी सीएम केशव मौर्य को हराया था। उसके बाद से सपा लगातार संदेश देने की कोशिश कर रही है कि केशव पिछड़े वर्ग के नेता नहीं हैं। पिछड़ा वर्ग बहुल सीट सिराथू में सपा ने उन्हें चुनाव हराया। केशव को निशाने पर लेने की 3 मुख्य वजह… 1- सपा के PDA का मजबूत तोड़ हैं केशव: राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं, बीते 10 साल में केशव प्रसाद मौर्य पिछड़े वर्ग के बड़े नेता बने हैं। भाजपा उन्हें न केवल प्रदेश, देश में भी पिछड़े वर्ग का चेहरा बना रही है। गैर यादव पिछड़े वर्ग की ज्यादातर जातियों में केशव की स्वीकार्यता है। भाजपा ही नहीं, सपा, बसपा, कांग्रेस सहित अन्य दलों के पिछड़े वर्ग के नेताओं से भी केश‌व के करीबी रिश्ते हैं। ऐसे में सपा के PDA के पिछड़े वर्ग में सेंध लगाने की क्षमता केशव में ही है। 2- क्योंकि.. अपमान नहीं भूलते अखिलेश: अखिलेश यादव को करीब से जानने वाले बताते हैं कि वह सब कुछ सहन कर सकते हैं, लेकिन अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते। केशव मौर्य ने 2023 में विधानसभा में बजट सत्र में चर्चा के दौरान अखिलेश को लेकर कहा था कि ऐसा लगता है 'सैफई की जमीन बेचकर सब कुछ बनवा दिया'। इस पर अखिलेश ने तुरंत पलटवार करते हुए कहा था, 'तुम अपने पिताजी से पैसा लाते हो क्या?' उसके बाद से ही न केवल अखिलेश, पूरी सपा केशव पर निशाना साधती रहती है। 3- 13 करोड़ ओबीसी वोट-बैंक: यह तीसरी सबसे बड़ी वजह है। प्रदेश में 13 करोड़ से अधिक पिछड़े और अति पिछड़े मतदाताओं का वोट बैंक है। यादवों के बाद कुर्मी वोटर सबसे ज्यादा ओबीसी में हैं। यही वजह है, केशव हमेशा सपा के निशाने पर रहते हैं। पॉलिटिकल एक्सपर्ट कहते हैं कि भाजपा में स्वतंत्र देव जैसे भी नेता हैं, जो ओबीसी से आते हैं। लेकिन अखिलेश उन पर हमलावर नहीं होते, जितने केशव प्रसाद मौर्य पर। -------------------------- यह खबर भी पढ़ें काशी में डिप्टी CM केशव प्रसाद ने कहा- भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी अम्मा है कांग्रेस वाराणसी में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा- भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी अम्मा कांग्रेस है। जब भी देश से भ्रष्टाचार खत्म करने की बात हुई तो कांग्रेस ने हमेशा विरोध किया। लेकिन भाजपा सरकार ने मनरेगा रूपी दानव का अंत कर दिया है। जी रामजी अधिनियम बन चुका है। यहां पढ़ें पूरी खबर
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