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    अखिलेश का ऑफर- विधायकी लड़नी है तो पहले पद छोड़ो:अब तक 4 नेताओं का इस्तीफा; लोकसभा चुनाव के वक्त भी यही दांव खेला था

    8 hours ago

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    सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पिछले दिनों पार्टी की बड़ी बैठक की। इसमें उन्होंने कहा- पार्टी के जो नेता या संगठन पदाधिकारी 2027 विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं, वो पद से इस्तीफा दें। अपना नाम हाईकमान के आगे रखें। आखिरी निर्णय पार्टी संगठन का होगा। इसके बाद पार्टी के 3 बड़े नेताओं ने इस्तीफा दे दिया, एक कुर्सी छोड़ने को तैयार हैं। अंदरखाने चर्चा है कि कई चेहरे जो चुनाव लड़ना चाहते हैं, वो राष्ट्रीय अध्यक्ष को प्रस्ताव भेज रहे हैं कि हमारे नाम पर विचार करें। ऐसे में कई पदाधिकारी इस्तीफा देने की तैयारी कर रहे हैं। अखिलेश बोले- टिकट दिलाने का ठेका न लें 2 अप्रैल को अखिलेश यादव ने लखनऊ के सपा कार्यालय में एक बड़ी बैठक की थी। 75 जिलों के जिलाध्यक्ष और पदाधिकारी शामिल हुए थे। इसमें अखिलेश ने कहा था- जिलाध्यक्ष किसी भी नेता को टिकट दिलाने का ठेका न लें। अगर किसी की शिकायत मिली तो कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा था- अगर कोई जिलाध्यक्ष खुद चुनाव लड़ना चाहता है, तो उसे पहले इस्तीफा देना होगा। इसके बाद ही पार्टी विचार करेगी। कोई भी जिलाध्यक्ष खुद को प्रत्याशी घोषित न करे। ये गलत होगा। अखिलेश के फैसले की 3 बड़ी वजह 1. अंदरूनी कलह कम करने के लिए- अगर कोई जिलाध्यक्ष या पदाधिकारी पद पर रहते हुए खुद के टिकट के लिए दावेदारी करता है, तो जिले के अन्य स्थानीय नेताओं में तनाव और असंतोष पैदा होता है। चुनाव के समय इसका असर वोटरों के बिखराव के रूप में दिखता है। पद छोड़ने से यह गुटबाजी खत्म होगी। 2. संगठन का काम प्रभावित न हो- अखिलेश यादव का साफ मानना है कि चुनाव के समय संगठन का मजबूत रहना सबसे जरूरी है। अगर पदाधिकारी खुद चुनाव प्रचार में व्यस्त हो जाएगा, तो पूरे जिले में पार्टी का मैनेजमेंट कमजोर पड़ जाएगा। 3. हार-जीत के वोटों के अंतर को कम करना- 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को सपा की तुलना में 85 लाख ज्यादा वोट मिले थे। अखिलेश जानते हैं कि अगर आंतरिक कलह रुक जाए और बेहतर को-ऑर्डिनेशन हो, तो सपा 2027 में इस हार-जीत के अंतर को कम या पूरी तरह से खत्म कर सकती है। टिकट बंटवारे में कोई कन्फ्यूजन नहीं चाहती सपा वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस के मुताबिक, सपा ने 2027 में सत्ता पाने के लिए अपना एजेंडा सेट कर दिया है। अखिलेश इस बार टिकट बंटवारे को लेकर कोई कन्फ्यूजन या अंतर्कलह नहीं चाहते। 'वन लीडर, वन पोस्ट' के तहत केवल जिताऊ और बेहतर उम्मीदवार को ही मैदान में उतारा जाएगा, जो बिना किसी दबाव के सिर्फ अपने क्षेत्र की जनता के बीच एक्टिव रहेगा। सिद्धार्थ कलहंस का मानना है कि जो भी पदाधिकारी इस्तीफा दे रहा है, उसकी दावेदारी जरूर मजबूत होगी। लेकिन, इसकी कोई गारंटी नहीं है कि उन्हें टिकट मिल ही जाए। क्योंकि सपा सभी चुनावी गुणा-गणित और सामने वाले प्रत्याशी की मजबूती को देखते हुए कैंडिडेट का सिलेक्शन करती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी कर चुके हैं प्रयोग सिद्धार्थ कलहंस कहते हैं- लोकसभा चुनाव-2024 में भी अखिलेश यादव ये प्रयोग कर चुके हैं। उन्होंने तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल से इस्तीफा दिलवाकर फतेहपुर से चुनाव लड़ाया था। इस दौरान वे जीत गए थे। अब इसी सफल मॉडल को पूरे राज्य में लागू किया जा रहा है। ----------------------------------------- भास्कर एनालिसिस भी पढ़िए.. अखिलेश अकेले भाजपा को कैसे रोकेंगे?, ममता को हराने के बाद पूरा फोकस यूपी पर; कई बड़े नेता मैदान में उतरेंगे “INDIA गठबंधन की ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव और राहुल गांधी को हरा दिया, अब अखिलेश यादव की बारी है।” पश्चिम बंगाल में जीत के बाद BJP नेता सुवेंदु अधिकारी ने ऐसा कहा है। मतलब, BJP के निशाने पर अब सपा प्रमुख अखिलेश यादव हैं। यूपी की 80 लोकसभा सीटों की बात करें, तो सपा ही 37 सांसदों के साथ पहले नंबर पर है। पढ़िए पूरी खबर...
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