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    अखिलेश ने विधायक कमाल अख्तर से कहा-इस्तीफा दे दो:तुरंत मुख्य सचेतक पद छोड़ा; सांसद रुचि वीरा ने शिकायत की थी

    9 hours ago

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    मुरादाबाद की कांठ विधानसभा सीट से सपा विधायक कमाल अख्तर ने मंगलवार को विधानमंडल के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) पद से इस्तीफा दे दिया है। दोपहर ढाई बजे कमाल अख्तर लखनऊ पहुंचे। पार्टी मुख्यालय में अध्यक्ष अखिलेश से मुलाकात की और उन्हें इस्तीफा सौंप दिया। दैनिक भास्कर से बातचीत में कमाल अख्तर ने कहा- मैंने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के आदेश पर मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दिया है। वो हमारे नेता हैं, उनका आदेश मानना हमारा कर्तव्य है। पार्टी में समय-समय पर नेताओं की जिम्मेदारियां बदलती रहती हैं। और ये इसी रूटीन बदलाव का हिस्सा है। मैं करीब डेढ़ साल से इस पद पर था। पार्टी में अब किसी नए नेता को यह जिम्मेदारी मिलेगी। मुझे चुनाव लड़ना है, इसलिए मेरा फोकस अब अपनी सीट पर है। कमाल अख्तर की मुरादाबाद की सपा सांसद रुचि वीरा से अनबन चल रही है। विवाद को सुलझाने के लिए 25 जून को पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में दोनों के साथ बैठक भी की थी। रुचि वीरा और कमाल अख्तर ने एक-दूसरे पर गुटबाजी के आरोप लगाए थे। इस मीटिंग के बाद माना जा रहा था कि मामला शांत हो गया है, लेकिन अब कमाल अख्तर के इस्तीफे ने अटकलों को फिर हवा दे दी है। मनोज पांडेय के बागी होने के बाद बने थे चीफ व्हिप सपा ने कमाल अख्तर को 28 जुलाई, 2024 को यूपी विधानसभा में अपना मुख्य सचेतक बनाया था। उनसे पहले रायबरेली विधायक मनोज कुमार पांडेय चीफ व्हिप थे। लेकिन मनोज ने फरवरी, 2024 में राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी रुख अपनाते हुए मुख्य सचेतक के पद से इस्तीफा दे दिया था और भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया था। उनके पाला बदलने के बाद ही यह पद खाली हो गया था, जिस पर बाद में कमाल अख्तर को नियुक्त किया गया था। कमाल अख्तर ने दैनिक भास्कर के सवालों का जवाब दिया, पढ़िए... सवाल: अचानक आज मुख्य सचेतक का पद छोड़ दिया, क्या वजह रही? जवाब: संगठन और विधानमंडल दल में अलग-अलग जिम्मेदारी नेताओं को दी जाती है। हम लोग पार्टी के कार्यकर्ता हैं। हमारे नेता अखिलेश यादव जी का जो भी निर्देश होता है, जो भी आदेश होता है, उसका पालन करना हमारी जिम्मेदारी है। इस्तीफा देने का आदेश अखिलेशजी का था। अब इस जिम्मेदारी को कोई और संभाले, ऐसा उनको लगा होगा। विधानमंडल दल की कार्रवाई में हम सब मिलकर सहयोग करेंगे। सवाल: तीन-चार दिन पहले एक बैठक हुई, उसमें आपके बीच और रुचि वीरा के बीच कुछ हॉट टॉक भी हुई? जवाब: यह पता नहीं। आपको कहां से ऐसी सूचना मिल जाती है। क्या आप बैठक में थे? सवाल: कोई था? जवाब: (हंसते हुए) क्या? कोई पत्रकार हो या रुचि वीरा ने आपको बताया, वह बात अलग है। लेकिन, मैं जहां तक समझता हूं, पार्टी की बहुत सारी बैठकें होती हैं, पार्टी के बहुत सारे डिफ्रेंसेस होते हैं। ये सब नॉर्मल छोटी-छोटी चीजें चलती रहती हैं। तो उसको कहीं भी इससे जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। सवाल: उस बैठक में आपके और रुचि वीरा के बीच क्या हुआ था? जवाब: यही था कि आगे संगठन को सही करना है, आगे कैसे चुनाव लड़ना है, तो उसी के संबंध में बैठक हुई थी। सवाल: आपके फैसले में रुचि वीरा की कितनी भूमिका है? जवाब: ज़ीरो। सवाल: अखिलेश से आज मुलाकात हुई है? जवाब: अखिलेश जी से रोजाना हमारी चर्चा होती है। सवाल: उन्होंने क्या आपका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है? जवाब: सिर हिलाते हुए सहमति जताई। सांसद रुचिवीरा और कमाल अख्तर के बीच अनबन कमाल अख्तर और रुचि वीरा के रिश्तों में खटास लोकसभा चुनाव 2024 से ही चली आ रही है। लेकिन, अभी तक मामला अंदरखाने चल रहा था। लेकिन ये कलह सतह पर उस वक्त आ गई, जब मुरादाबाद में 14 जून को पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) सम्मान सम्मेलन हुआ। इसमें सांसद रुचि वीरा को न तो बुलाया गया और न ही कार्यक्रम में फोटो लगाई गई। इस पर रुचि वीरा नाराज हो गईं। राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। इसमें सांसद रुचि वीरा, राज्यसभा सांसद जावेद अली, पूर्व मंत्री कमाल अख्तर और पूर्व विधायक यूसुफ अंसारी मौजूद थे। मीटिंग में रुचि वीरा ने कहा- मुरादाबाद में कमाल अख्तर उनका विरोध करते हैं और वही पार्टी में गुटबाजी कर रहे हैं। पीडीए सम्मेलन में कमाल अख्तर ने ही फोटो नहीं लगने दी। इससे भाजपा और सहयोगी दलों को बोलने का मौका मिल गया कि सपा में महिलाओं का सम्मान नहीं है। कमाल अख्तर ने रुचि वीरा पर गुटबाजी करने का आरोप लगाया था। कमाल ने कहा था कि जब से रुचि वीरा सांसद बनी हैं, वो किसी विधायक या सपा नेता की फोटो अपने होर्डिंग में लगने नहीं देती हैं। जब वह किसी का फोटो नहीं लगाती हैं तो उनका फोटो क्यों लगाएगा। मुरादाबाद से लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे कमाल अख्तर कमाल अख्तर और रुचिवीरा के बीच अनबन की मूल वजह मुरादाबाद लोकसभा सीट है। कमाल अख्तर की गिनती अखिलेश यादव के करीबी और भरोसेमंद नेताओं में होती है। अखिलेश सरकार में मंत्री रह चुके कमाल अख्तर इसके पहले सपा के राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों में कमाल अख्तर मुरादाबाद सीट से लड़ना चाहते थे। अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी सिंबल भी दे दिया था। लेकिन ऐन वक्त पर सपा नेता आजम खां के वीटो लगाने पर अखिलेश यादव को कमाल अख्तर से सिंबल वापस लेकर रुचिवीरा को देना पड़ा था। बेटी को लड़ाना चाहती हैं रुचि वीरा सांसद रुचि वीरा मुरादाबाद शहर सीट से 2027 में अपनी बेटी स्वाति वीरा को चुनाव लड़ाना चाहती हैं। स्वाति वीरा बिजनौर से नगर पंचायत का चुनाव लड़ चुकी हैं। लेकिन वह चुनाव हार गई थीं। अब रुचि वीरा अपनी बेटी को मुरादाबाद शहर सीट से चुनाव लड़ाकर विधायक बनाना चाहती हैं। इसे लेकर भी कमाल अख्तर कुछ असहज हैं। कौन हैं कमाल अख्तर? राजनीतिक परिवार से आते हैं: कमाल अख्तर का जन्म 24 अक्टूबर 1971 को अमरोहा के उझारी गांव में हुआ। उनके पिता नफीसुद्दीन अहमद और माता महजबीन स्थानीय राजनीति के बड़े चेहरे रहे हैं। शुरुआती पढ़ाई के बाद उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से बीए (ऑनर्स) अर्थशास्त्र और एलएलबी की पढ़ाई की। इसके बाद समाजवादी पार्टी के साथ सक्रिय राजनीति में कदम रखा। परिवार की कई पीढ़ियां राजनीति में: कमाल अख्तर को राजनीति विरासत में मिली। उनके पिता तीन बार उझारी गांव के प्रधान और 1988 से 1993 तक नगर पंचायत चेयरमैन रहे। उनकी मां महजबीन भी तीन बार नगर पंचायत अध्यक्ष चुनी गईं। बाद में उनकी पत्नी हुमेरा अख्तर ने भी नगर पंचायत की कमान संभाली। मुलायम सिंह ने दिया बड़ा मौका: कमाल अख्तर की सक्रियता को देखते हुए सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने उन्हें समाजवादी युवजन सभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया। इस जिम्मेदारी के दौरान उन्होंने संगठन में युवाओं को जोड़ने का काम किया और पार्टी में अपनी अलग पहचान बनाई। विधानसभा टिकट नहीं मिला, राज्यसभा भेजे गए: 2002 में हसनपुर विधानसभा सीट से टिकट नहीं मिला, लेकिन पार्टी ने 2004 में उन पर भरोसा जताते हुए सीधे राज्यसभा भेज दिया। यहीं से उनका संसदीय सफर शुरू हुआ। विधायक बने, फिर मंत्री भी: 2012 में हसनपुर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने। अखिलेश यादव सरकार में पहले पंचायती राज मंत्री और बाद में 2015 में खाद्य एवं रसद विभाग के कैबिनेट मंत्री बनाए गए। पत्नी भी लड़ चुकी हैं चुनाव: कमाल अख्तर की पत्नी हुमेरा अख्तर भी सक्रिय राजनीति में रही हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने उन्हें अमरोहा से उम्मीदवार बनाया था। उन्हें करीब 3.70 लाख वोट मिले और वह दूसरे स्थान पर रहीं। 2017 में हार, 2022 में कांठ से वापसी: 2017 में हसनपुर सीट से चुनाव हारने के बाद समाजवादी पार्टी ने 2022 में उन्हें मुरादाबाद की कांठ विधानसभा सीट से टिकट दिया। यहां से जीत दर्ज कर उन्होंने विधानसभा में वापसी की और पार्टी के प्रमुख मुस्लिम चेहरों में अपनी जगह बनाए रखी। मुख्य सचेतक पद क्यों अहम? मुख्य सचेतक का पद संसदीय प्रणाली में अहम होता है। यह मुख्य रूप से राजनीतिक दल के अनुशासन, उपस्थिति और मतदान को सुनिश्चित करने का दायित्व निभाता है। मुख्य सचेतक का प्रमुख काम पार्टी में अनुशासन बनाए रखना, विधायक दल के सदस्यों को पार्टी की नीति और लाइन के अनुसार व्यवहार करने के लिए निर्देशित करना है। सदस्यों को किसी मुद्दे पर कैसे मतदान करना है, यह भी बताना है। व्हिप का उल्लंघन करने पर सदस्य को अयोग्य ठहराए जाने का प्रावधान कर सकता है। विधानसभा सत्रों में मतदान और महत्वपूर्ण चर्चाओं के दौरान दल के सभी सदस्यों को उपस्थित रखने की जिम्मेदारी, मतदान के समय पर्याप्त संख्या में सदस्यों की मौजूदगी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी मुख्य सचेतक की होती है। मुख्य सचेतक पार्टी नेतृत्व और विधायकों के बीच पुल का काम करता है। सदस्यों की राय, असंतोष या सुझावों को नेतृत्व तक पहुंचाना और पार्टी की स्थिति सदस्यों को बताने का काम भी मुख्य सचेतक का काम होता है। ********************* यह खबर भी पढ़ें:- भाजपा नेता को धक्का मारने वाले IAS का तबादला:रिंकू सिंह को उरई का SDM न्यायिक बनाया गया; कागजात नहीं मिलने पर भड़के थे जालौन के SDM रिंकू सिंह राही का मंगलवार दोपहर 1 बजे ट्रांसफर कर दिया गया। उन्हें उरई का एसडीएम न्यायिक बनाया गया है। उनकी जगह राकेश कुमार सोनी को जालौन का नया SDM नियुक्त किया गया है। डीएम राजेश कुमार पांडेय ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए दोनों अफसरों को कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं। पढ़ें पूरी खबर…
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