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    अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के टैरिफ रद्द किए:कहा- उन्हें टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं; अमेरिकी राष्ट्रपति बोले- यह फैसला निराशाजनक

    5 hours ago

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    अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने दूसरे देशों पर लगाए गए टैरिफ को अवैध बताया है। भारत पर लगा 18% रेसिप्रोकल टैरिफ भी अब अवैध घोषित हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, सिर्फ कांग्रेस (अमेरिकी संसद) को है। फैसले पर ट्रम्प ने कहा कि यह बहुत निराशाजनक है। उन्हें कोर्ट के कुछ सदस्यों पर शर्म आ रही है कि उनमें हमारे देश के लिए सही काम करने की हिम्मत नहीं है। इससे पहले ट्रम्प ने टैरिफ पर सुनवाई को लेकर कहा था कि अगर केस हारे तो देश बर्बाद हो जाएगा। कोर्ट का यह फैसला ट्रम्प की आर्थिक नीतियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। दरअसल, अप्रैल 2025 में ट्रम्प ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए दुनिया के कई देशों से आने वाले सामान पर भारी टैरिफ यानी आयात शुल्क लगा दिए थे। टैरिफ का मतलब होता है कि किसी देश से आने वाले सामान पर ज्यादा टैक्स लगाया जाए, ताकि वह महंगा हो जाए और घरेलू कंपनियों को फायदा मिले। कोर्ट की ट्रम्प को फटकार, कहा- हर देश से युद्ध की स्थिति में नहीं सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को फटकारते हुए कहा कि अमेरिका दुनिया के हर देश के साथ युद्ध की स्थिति में नहीं है। हालांकि फैसले को लेकर 3 जजों जस्टिस सैमुअल एलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कैवनॉ ने इस फैसले से असहमति जताई। कैवनॉ ने अपने नोट में लिखा कि टैरिफ नीति समझदारी भरी है या नहीं, यह अलग सवाल है, लेकिन उनके मुताबिक यह कानूनी तौर पर वैध थी। कैवनॉ ने अपने नोट में भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर लगाए गए टैरिफ का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि ये टैरिफ विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों के तहत लगाए गए थे। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में कुल 9 जज हैं। इनमें से 6 जजों को रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किया है, जबकि 3 जज डेमोक्रेटिक राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किए। फैसले के खिलाफ वोट करने वाले तीनों जज रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किए थे। फैसले से सभी टैरिफ खत्म नहीं होंगे कोर्ट के आदेश से ट्रम्प के सभी टैरिफ खत्म नहीं हुए हैं। स्टील और एल्युमिनियम पर लगाए गए टैरिफ अलग कानूनों के तहत लगाए गए थे, इसलिए वे अभी भी लागू रहेंगे। हालांकि, दो बड़े कैटेगरी के टैरिफ पर रोक लग गई है। पहली कैटेगरी रेसिप्रोकल टैरिफ की है, जो ट्रम्प ने अलग-अलग देशों पर लगाए थे। इसमें चीन पर 34% और बाकी दुनिया के लिए 10% बेसलाइन टैरिफ तय किया गया था। कोर्ट के फैसले के बाद ये टैरिफ अमान्य हो गए हैं। दूसरी कैटेगरी 25% टैरिफ की है, जो ट्रम्प ने कनाडा, चीन और मैक्सिको से आने वाले कुछ सामान पर लगाया था। ट्रम्प प्रशासन का कहना था कि इन देशों ने अमेरिका में फेंटेनाइल की तस्करी रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। कोर्ट के फैसले ने इस 25% टैरिफ को भी निरस्त कर दिया है। अमेरिका ने टैरिफ से 200 अरब डॉलर वसूले, रिफंड पर सस्पेंस न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल की शुरुआत से अब तक ट्रम्प प्रशासन ने 200 अरब डॉलर से ज्यादा का टैरिफ वसूला है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब इस रकम के रिफंड को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। फैसले के बाद यह साफ नहीं है कि सरकार को कंपनियों को वसूला गया पैसा लौटाना पड़ेगा या नहीं। ट्रम्प प्रशासन ने पहले कहा था कि अगर केस हार गए तो कई देशों के साथ हुए व्यापार समझौतों को वापस लेना पड़ सकता है और भारी रिफंड चुकाने पड़ सकते हैं। फैसले की आशंका को देखते हुए कई कंपनियों ने पहले ही वकील रख लिए थे। उन्होंने कोर्ट में मुकदमे दायर किए और टैरिफ के रूप में चुकाई गई रकम के रिफंड के लिए दावे भी दाखिल किए। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार को इन कंपनियों को भुगतान करना पड़ेगा। फिलहाल इस पर स्थिति साफ नहीं है। सुप्रीम रोक के बाद भी ट्रम्प फिर टैरिफ लगा सकते हैं सुप्रीम कोर्ट ने भले ही ट्रम्प के आपातकालीन टैरिफ पर रोक लगा दी है, लेकिन उनके पास टैरिफ लगाने के अभी भी कई विकल्प हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति के पास अब भी कई अन्य कानूनी रास्ते हैं, जिनसे वे आयात पर टैरिफ लगा सकते हैं। ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीयर ने पहले ही कहा था कि कांग्रेस ने राष्ट्रपति को काफी टैरिफ अधिकार सौंपे हैं। जस्टिस ब्रेट कैवनॉ ने भी कहा कि कोर्ट का फैसला भविष्य में राष्ट्रपति के टैरिफ अधिकार को पूरी तरह सीमित नहीं करेगा। जानिए किन कानूनों के तहत ट्रम्प टैरिफ लगा सकते हैं… सेक्शन 232: राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर टैरिफ लगाने की अनुमति देता है। पहले स्टील, ऑटो और कॉपर पर इस्तेमाल हो चुका है। लेकिन इसके लिए कॉमर्स डिपार्टमेंट की जांच जरूरी है। सेक्शन 122: अधिकतम 15% तक ग्लोबल टैरिफ, लेकिन सिर्फ 150 दिनों के लिए। इसका इस्तेमाल बड़े व्यापार घाटे से निपटने के लिए किया जा सकता है। सेक्शन 301: अनुचित व्यापार प्रथाओं पर जांच के बाद टैरिफ। चीन पर भारी शुल्क इसी प्रावधान के तहत लगाए गए थे। सेक्शन 338: अगर कोई देश अमेरिका के साथ भेदभाव करे तो जवाबी टैरिफ लगाने की अनुमति। ट्रम्प ने 49 साल पुराने कानून के इस्तेमाल कर टैरिफ लगाया था ट्रम्प के टैरिफ विवाद के केंद्र में एक कानून है, जिसका नाम इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) है। यह कानून 1977 में बनाया गया था। इसका मकसद यह था कि अगर देश पर कोई गंभीर खतरा जैसे युद्ध जैसी स्थिति, विदेशी दुश्मन से बड़ा आर्थिक खतरा या असाधारण अंतरराष्ट्रीय संकट आए तो राष्ट्रपति को कुछ खास शक्तियां दी जा सकें। इन शक्तियों के तहत राष्ट्रपति विदेशी लेन-देन पर रोक लगा सकता है, उन्हें नियंत्रित कर सकता है या कुछ आर्थिक फैसले तुरंत लागू कर सकता है। ट्रम्प ने टैरिफ लगाने के लिए IEEPA का ही सहारा लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ पर सवाल उठाए थे पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प सरकार के टैरिफ लगाने के कानूनी आधार पर सवाल उठाए थे। उस दौरान जजों ने पूछा था कि क्या राष्ट्रपति को इस तरह के ग्लोबल टैरिफ लगाने का अधिकार है। कोर्ट ने इस मामले में लंबी सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि ट्रम्प 150 दिनों तक 15% टैरिफ लगा सकते हैं, लेकिन इसके लिए ठोस कारण चाहिए। फैसले में कहा गया कि IEEPA में ‘टैरिफ’ शब्द का कहीं जिक्र नहीं है और न ही इसमें राष्ट्रपति के अधिकारों पर कोई स्पष्ट सीमा तय की गई है। ट्रम्प के खिलाफ 12 राज्यों का मुकदमा ट्रम्प ने पिछले साल अप्रैल इन टैरिफ के ऐलान किए थे। इन टैरिफ के खिलाफ अमेरिका के कई छोटे कारोबारी और 12 राज्यों ने मुकदमा दायर किया था। उनका कहना था कि राष्ट्रपति ने अपनी सीमा से बाहर जाकर आयात होने वाले सामान पर नए टैरिफ लगाए। एरिजोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, इलिनॉय, मेन, मिनेसोटा, नेवादा, न्यू मेक्सिको, न्यूयॉर्क, ओरेगन और वर्मोंट राज्यों ने छोटे कारोबारियों के साथ मिलकर ट्रम्प सरकार के खिलाफ यह केस किया था। निचली अदालतों ने टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था इससे पहले निचली अदालतों (कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड और फेडरल सर्किट कोर्ट) ने टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था। उनका मानना था कि IEEPA टैरिफ लगाने की इतनी व्यापक शक्ति नहीं देता। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में मौखिक बहस सुनी थी, जहां जजों ने ट्रम्प की ओर से पेश की गईं दलीलों पर संदेह जताया था। कोर्ट के 6-3 बहुमत के बावजूद, जस्टिस ने पूछा था कि क्या राष्ट्रपति कांग्रेस की मंजूरी के बिना इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगा सकता है, क्योंकि टैरिफ टैक्स का रूप हैं और यह संसद की जिम्मेदारी हैं। ----------------------------------- टैरिफ से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- टैरिफ के खिलाफ फैसला आया तो तबाही मचेगी:फिर कोई भी हालात संभाल नहीं पाएगा; टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट कल फैसला सुनाएगा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अगर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उनके लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया, तो अमेरिका के लिए हालात पूरी तरह बिगड़ सकते हैं। ट्रम्प ने कहा कि ऐसा हुआ तो देश पूरी तरह फंस जाएगा और सब कुछ गड़बड़ हो जाएगा। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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