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    अनेक प्रकार की चुनौतियों को साधने अयोध्या आ रहे पंकज:लोस हार की धमक अभी भी ,अयोध्या व लखनऊ आसपास की 20 में 8 सीटें ही बचीं

    2 hours ago

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    भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी सोमवार को रामलला के दर्शन करने यहां पहुंच रहे हैं। यह दर्शन का कार्यक्रम तो है ही, साथ ही अवध के 15 जिलों के पदाधिकारियों को भी वह संबोधित करेंगे। यह क्षेत्र पार्टी के लिए चुनौती भी बना हुआ है। लखनऊ से अयोध्या तक गाजे-बाजे ढोल-नगाड़े से पूरे रास्ते भले ही उनका जोरदार स्वागत सत्कार हो, चुनौतियों की खटपट और कंटीली राह भी उनके सामने होगी, जिसे सही करने का दायित्व उन्हें संगठन ने सौंपा है। लोकसभा चुनाव की हार की धमक आज भी गूंज रही है क्योंकि पार्टी इस क्षेत्र में अपनी प्रतिष्ठा की सीट फैजाबाद संसदीय क्षेत्र को भी बचा नहीं पाई है और अयोध्या व लखनऊ के आसपास की 20 में से मात्र आठ सीटें ही बच पाईं हैं, जबकि इसके पहले के चुनाव यानी 2019 में भाजपा 17 सीटों पर जीती थीं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आठ सौ से अधिक की क्षमता वाले डाक्टर राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के विवेकानंद सभागार में इन 20 सीटों से जुड़े 15 जिलों के पदाधिकारियों को संबोधित करेंगे। इनमें से कई जिलों में वह अब तक जिलाध्यक्ष का चयन भी नहीं कर सकें हैं। जहां पर उनका संबोधन होगा, वहीं का पेंच पार्टी की गुटबाजी में उलझा हुआ है, 45 लोगों ने महानगर और जिलाध्यक्ष पद की दावेदारी ठोंक रखी है, जिनमें पूर्व और निवर्तमान अध्यक्ष भी शामिल हैं। गोंडा और अंबेडकर नगर के साथ ही लखीमपुर में भी यह गुत्थी सुलझ नहीं रही है। 98 संगठनात्मक जिलों में से 14 जिलों के अध्यक्ष का चयन जातीय गुणा गणित में तो उलझा है ही, साथ ही पुराने क्षत्रपों की टिकट की दावेदारियों का भी झमेला अभी से उठ खड़ा हुआ है। भाजपा के बजरंगी कहे जाने वाले विनय कटियार के अचानक टिकट की दावेदारी भी इसमें सबसे प्रमुख है और प्रदेश अध्यक्ष ने ही पद संभालते ही उनसे भेंट कर इसे हवा भी दी है। वह डंके की चोट पर दावे पर दावे करते जा रहे हैं और यह भी सही है कि अयोध्या विधानसभा क्षेत्र का जातीय समीकरण भले ही उनके लिए बहुत अच्छा ना हो, संसदीय क्षेत्र में वह अपने सजातीयों के वोट बैंक के चलते वर्तमान सांसद की चुनौती का उत्तर देते नजर आते हैं। एक चुनाव वह भले ही अपने ही एक सजातीय क्षत्रप के भितरघात से यहां हारे हो, उन्होंने प्रतिद्वंद्वी से कड़ा मुकाबला किया था। उन्होंने भाजपा के लिए सांप छछूंदर वाली स्थिति उत्पन्न कर दी है, क्योंकि गुजरात विधानसभा के चुनाव भी साथ ही होने हैं, जहां प्रदेश अध्यक्ष और विनय कटियार के सजातीय मत चुनाव की दिशा तय करते आए हैं।
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