Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    ‘अनुराग कश्यप ने ट्रेलर कहा बकवास:सुमित गहलावत बोले- सबकी अपनी सोच है, द केरला स्टोरी 2 का बीफ सीन हर कोई देखें

    2 hours ago

    1

    0

    ‘द केरल स्टोरी’ के पहले भाग ने देशभर में तीखी बहस को जन्म दिया था। फिल्म को लेकर राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। अब इसका दूसरा भाग एक नई कहानी और नए किरदारों के साथ दर्शकों के सामने आने वाला है। फिल्म के इस भाग में अभिनेता सुमित गहलावत सलीम नामक एक अहम और परतदार किरदार निभा रहे हैं। लगभग 12 वर्षों से इंडस्ट्री में सक्रिय सुमित का कहना है कि यह उनके करियर की अब तक की सबसे बड़ी और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में से एक है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने फिल्म, विवाद, संघर्ष और अपने सफर पर खुलकर बात की हैं। आपकी फिल्में, जैसे द केरल स्टोरी और बस्तर: द नक्सल स्टोरी, अक्सर राजनीतिक और वैचारिक बहस को जन्म देती हैं। एक कलाकार के रूप में आप इन प्रतिक्रियाओं और विवादों को किस नजरिए से देखते हैं? मैं व्यक्तिगत रूप से हर फिल्म को सिर्फ सिनेमा के रूप में देखता हूं। एक अभिनेता के तौर पर मेरा काम है अपने किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाना। विषय राजनीतिक है, सामाजिक है या विवादित है यह लेखक और निर्देशक का दृष्टिकोण होता है। मैं स्क्रिप्ट पढ़ते समय यही देखता हूं कि मेरे किरदार में कितनी गहराई है, कितनी चुनौती है और मैं उसमें कितना सच्चापन ला सकता हूं। मैं इस इंडस्ट्री में इसलिए आया हूं ताकि अलग-अलग तरह के रोल निभा सकूं। इसलिए मेरा चयन हमेशा भूमिका और स्क्रिप्ट के आधार पर होता है, किसी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर नहीं। ऐसी फिल्मों में ‘प्रोपेगेंडा बनाम सच्चाई’ की बहस शुरू हो जाती है। क्या यह आपको प्रभावित करती है? बहस होना स्वाभाविक है, लेकिन कभी-कभी दुख इस बात का होता है कि अभिनय की चर्चा पीछे रह जाती है। हम कलाकार महीनों तैयारी करते हैं, मानसिक रूप से किरदार में उतरते हैं, कई सालों के संघर्ष के बाद ऐसे मौके मिलते हैं। जब फिल्म रिलीज होती है तो चर्चा कहानी से ज्यादा राजनीतिक एंगल पर होने लगती है। मैं राजनीति में नहीं पड़ता। मैं सिर्फ इतना चाहता हूं कि लोग यह भी देखें कि कलाकार ने अपना काम कितनी ईमानदारी से किया है। फिल्म के ट्रेलर को लेकर अनुराग कश्यप और प्रकाश राज जैसे फिल्मी हस्तियों ने आलोचना की। इस पर आपका क्या कहना है? मैं इस पर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं देना चाहूंगा। हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है। जरूरी नहीं कि हर फिल्म या ट्रेलर सबको पसंद आए। कई बार हमें भी कोई ट्रेलर पसंद नहीं आता और हम आपस में खुलकर बोल देते हैं। अगर किसी को अच्छा नहीं लगा तो यह उनकी व्यक्तिगत पसंद है। बहुत से लोग तारीफ भी कर रहे हैं। जो अच्छा कह रहे हैं, उनका भी सम्मान है और जो आलोचना कर रहे हैं, उनका भी। हमारा काम है मेहनत करना और आगे और बेहतर करने की कोशिश करना। ट्रेलर में दिखाए गए एक ‘बीफ’ से जुड़े दृश्य को लेकर विवाद हुआ। क्या उस सीन को हटाने या बदलने पर कोई चर्चा हुई? ऐसे फैसले पूरी तरह निर्देशक और निर्माता के होते हैं। एक अभिनेता के रूप में हमारा काम है कि जो सीन हमें दिया गया है, उसे पूरी सच्चाई और प्रभाव के साथ निभाएं। वह दृश्य भावनात्मक रूप से कठिन था। लेकिन अगर दर्शक मेरे किरदार सलीम से नफरत महसूस करते हैं, तो एक अभिनेता के रूप में मैं समझूंगा कि मैंने अपना काम सही तरीके से किया। नेगेटिव किरदार को इस तरह निभाना कि वह वास्तविक लगे यही अभिनय की सफलता है। द केरला स्टोरी पार्ट 2 में आपका किरदार कितना अलग है? इस बार कहानी पूरी तरह नई है। मैं सलीम का किरदार निभा रहा हूं। यह एक लेयर्ड रोल है। शुरुआत में वह पढ़ा-लिखा, समझदार और सभ्य व्यक्ति दिखाई देता है, लेकिन परिस्थितियों के साथ उसका दूसरा रूप सामने आता है। यह किरदार केवल पूरी तरह नकारात्मक या सकारात्मक नहीं है। उसकी एक यात्रा है एक बदलाव है। उस जर्नी को निभाना मेरे लिए बेहद रोचक और चुनौतीपूर्ण अनुभव रहा। नेगेटिव रोल करने से क्या इमेज या फैन बेस पर असर पड़ सकता है? बिल्कुल नहीं। एक अभिनेता का काम हर तरह के भाव निभाना है। अगर आप उदाहरण देखें तो मनोज बाजपेयी और नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसे कलाकारों ने सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की भूमिकाएं की हैं। आज दर्शक समझदार हैं। वे जानते हैं कि अभिनेता और उसका किरदार अलग होते हैं। नेगेटिव रोल में अक्सर ज्यादा चैलेंज होता है और अभिनेता को अपने अभिनय की रेंज दिखाने का मौका मिलता है। एक आउटसाइडर के तौर पर इंडस्ट्री में आपका संघर्ष कैसा रहा? जब मैं मुंबई आया तो मुझे शहर की बुनियादी जानकारी भी नहीं थी। ऑडिशन के लिए लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ता था। कई बार ‘फिट नहीं’ कहकर मना कर दिया जाता था। मैंने शुरू से तय कर लिया था कि कम से कम 10 साल इस इंडस्ट्री को देने होंगे। यहां कोई गारंटी नहीं है। एक फिल्म मिलने का मतलब यह नहीं कि दूसरी भी मिल जाएगी। हर स्तर पर खुद को साबित करना पड़ता है। धैर्य सबसे जरूरी है। अगर धैर्य नहीं है, तो इस क्षेत्र में टिक पाना मुश्किल है। दर्शकों के लिए द केरला स्टोरी पार्ट 2 खास क्यों है और उन्हें यह फिल्म देखने के लिए क्या संदेश या अनुभव मिलेगा? यह फिल्म बहुत मेहनत से बनी है। निर्देशक से लेकर तकनीकी टीम और कलाकारों तक, सभी ने पूरी लगन से काम किया है। हम नए कलाकार हैं और हमारे लिए दर्शकों का भरोसा बहुत मायने रखता है। हम बस यही चाहते हैं कि दर्शक एक मौका दें। अगर उन्हें हमारा काम पसंद आए, तो वही हमारी सबसे बड़ी सफलता होगी।
    Click here to Read more
    Prev Article
    नोएडा में 90 करोड़ से बिजली लाइन हो रही भूमिगत:सेक्टर-15ए में 50 प्रतिशत काम पूरा, सेक्टर-47 में होगा शुरू, गर्मी तक आपरेट होंगे 6 सब स्टेशन
    Next Article
    पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक के जवाब में अफगानिस्तान का बड़ा हमला, 19 चौकियों पर किया कब्जा, 55 सैनिकों को मार गिराए

    Related मनोरंजन Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment